नई दिल्ली: अमेरिका ने ऐलान किया है कि वो ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ की जगह अपना पुराना नाम ‘पैसिफिक कमांड’ (USPACOM) फिर से अपनाएगा और इसमें से ‘इंडो’ (INDO) शब्द हटाने जा रहा है। इस घोषणा के पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका के इस फैसले को इंडो-पैसिफिक रणनीति और ‘क्वाड’ (जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं) की भूमिका के प्रति उसके नजरिए के तौर पर देखा। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने अमेरिकी रक्षा विभाग की इस घोषणा से जुड़ी एक पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है?
अमेरिका के फैसले पर कांग्रेस MP ने उठाए सवाल
अपनी पुरानी पहचान को फिर से हासिल करने की दिशा में एक कदम उठाते हुए, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बुधवार को अहम ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह अपने सबसे पुराने और सबसे बड़े यूनिफाइड कमांड – ‘US पैसिफिक कमांड’ – के नाम से ‘INDO’ शब्द हटाने जा रहा है। उनका ये कदम असल में उसके पुराने नाम को ही फिर से अपनाने की कोशिश है। घोषणा में कहा गया कि कमांड का मुख्य मकसद और क्षेत्रीय सहयोगियों, साझेदारों के साथ मिलकर एक ‘आजाद और खुले क्षेत्र’ को बनाए रखना है। हालांकि, इसके प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
क्या इंडो-पैसिफिक को लेकर बदल रहा रुख?
भले ही अमेरिका ने कहा कि इससे खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि, इस कदम से भारत में चिंता जरूर पैदा हो गई। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव ‘क्वाड’ और अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति के प्रति अमेरिका के नजरिए में बदलाव का संकेत है। नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाने का फैसला 2018 में किए गए एक अहम बदलाव को दर्शाता है। यह बदलाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान किया गया था। उस समय, अमेरिकी प्रशासन ने कहा था कि यह फैसला हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए लिया गया था।हवाई में मुख्यालय वाले इस कमांड को प्रशांत महासागर के आस-पास के रणनीतिक इलाकों, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भारत के लिए ये क्यों है अहम?
मूल रूप से 1 जनवरी, 1947 को अमेरिका के 33वें राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन की ओर से स्थापित यह कमांड 70 से ज्यादा वर्षों तक USPACOM नाम से काम करती रही। 2018 में, अमेरिका ने हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच बढ़ती कनेक्टिविटी को देखते हुए इसका नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ करने का फैसला किया।अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैले इस कमांड ने भारत के लिए वॉशिंगटन के साथ सहयोग बढ़ाने का एक अहम रणनीतिक जरिया बनाया है। इस कमांड ने व्यापक इंडो-पैसिफिक फ़्रेमवर्क और नई दिल्ली के साथ सहयोग के तहत संयुक्त अभ्यास, समुद्री तालमेल और जानकारी साझा करने जैसे तरीकों से भारत-अमेरिका के बीच सैन्य जुड़ाव को बढ़ावा दिया है।
