Monsoon Session Of Parliament: राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला. गुरुवार को उच्च सदन में बोलते हुए खरगे ने कहा, “पेपर चुराने वाले बचते रहे और मेहनत करने वाले पिटते रहे. यह कैसा न्याय है?” उन्होंने सवाल उठाया कि पेपर लीक से कितने मासूम छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ, कितने लोग घायल हुए और कितने माता-पिता परेशान हुए. उन्होंने अमित शाह से कहा कि वे बोल नहीं रहे हैं तो क्या किसी ने उनके मुंह को सील दिया क्या? खरगे ने कहा कि नए विधेयक में केवल आंकड़े बदले गए हैं, लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि असली जरूरत परीक्षा प्रणाली को इस तरह मजबूत बनाने की है कि पेपर लीक ही न हो. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि यही कदम उठाने थे तो 2024 में क्यों नहीं उठाए गए. उनके मुताबिक, उस समय लोकसभा चुनाव सामने थे और सरकार राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं करना चाहती थी.
खरगे का बड़ा हमला
राहुल गांधी का भी किया जिक्र कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान लगातार पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे को उठाते रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उस समय कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि इसका श्रेय विपक्ष को मिल सकता था. खरगे ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय सरकार ऐसा कानून लेकर आई, जिसे दो साल के भीतर ही संशोधित करना पड़ रहा है. उनके अनुसार, यह विधेयक समस्या का समाधान नहीं, बल्कि मौजूदा माहौल को शांत करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि युवाओं के व्यापक विरोध को देखने के बाद सरकार को एहसास हुआ कि यदि आंदोलन और बढ़ा तो उसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. इसी वजह से सरकार ने छात्रों की कुछ मांगें मानने का फैसला किया.धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी खरगे ने सीजेपी के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने दबाव और डर की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार और कुर्सी बचाने के लिए यह कदम उठाया. उन्होंने कहा कि जब छात्र लगातार अपनी समस्याएं उठा रहे थे, तब सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अराजक बताया. उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का नाम लेते हुए कहा कि यदि सरकार पहले संवाद करती तो इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को लाठीचार्ज का सामना नहीं करना पड़ता.
डर से प्रधान का इस्तीफा
उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की है. अमित शाह पर साधा निशाना खरगे ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह छोटे-छोटे मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं, लेकिन इस मामले में चुप हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब दिल्ली में इतना बड़ा घटनाक्रम हुआ तो गृह मंत्री ने इस पर बयान क्यों नहीं दिया. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “क्या किसी ने उनका मुंह सिल दिया है?” उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र संवाद चाहते थे, लेकिन उन्हें पैलेट गन, करंट वाली लाठियां और बंद मेट्रो स्टेशन मिले.उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक छात्र घायल हुए, कई छात्र आईसीयू और वेंटिलेटर तक पहुंच गए तथा कई छात्रों को पैलेट के छर्रे लगे. उन्होंने कहा कि यह स्थिति शर्मनाक है. खरगे ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “बंद कमरे में रहकर आप हमेशा नहीं रह सकते. एक दिन जनशक्ति आपको बाहर लेकर आएगी.” बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई असंसदीय शब्द का प्रयोग नहीं किया है और उनका आशय था कि जनता जवाब मांगेगी. कार्रवाई के आदेश पर उठाए सवाल अपने भाषण के अंत में खरगे ने पूछा कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे और सीआरपीएफ किसके निर्देश पर कार्रवाई कर रही थी. उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार पर विपक्ष ने एक बार फिर तीखा हमला बोला है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मेरे विद्यार्थी जो गांव-गांव से आए, उनको पैलेट गन का इस्तेमाल करके मार रहे हैं. उनके हाथ-पैर टूटे. इसका जिम्मेदार कौन है. होम मिनिस्टर है. बंद कमरे में आप मेरी बात सुन रहे होंगे, लेकिन छिपकर आप बहुत दिन रह नहीं सकते. एक दिन हम बाहर खींचकर लाएंगे और जनता के सामने दिखाएंगे कि क्या है. इस पर ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया.कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा कि असली फर्क कानून में आंकड़े बदलने से नहीं पड़ेगा, बल्कि इस बात से पड़ेगा कि सरकार एग्जाम सिस्टम को किस तरह ऑपरेट करती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था करती है. खरगे ने सवाल उठाते हुए कहा कि जो बदलाव सरकार आज कर रही है, वह 2024 में ही क्यों नहीं किए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सरकार की प्राथमिकता समस्या का समाधान नहीं बल्कि राजनीति करना था, क्योंकि लोकसभा चुनाव सामने थे. उन्होंने कहा कि उस दौरान राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा में लगातार पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे उठा रहे थे.
संशोधन में कोई मजबूत व्यवस्था नहीं- मल्लिकार्जुन खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नए संशोधन में ऐसी कोई मजबूत व्यवस्था नहीं दिखाई देती जो भविष्य में पेपर लीक को पूरी तरह रोक सके. उनके अनुसार, सरकार ने केवल कुछ आंकड़े और प्रावधान बदले हैं. उन्होंने दावा किया कि यह बिल मौजूदा माहौल को शांत करने और सड़कों पर उतरे छात्रों के गुस्से को कम करने के लिए लाया गया है, न कि समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए. खरगे ने कहा कि जब सरकार ने युवाओं की ताकत और उनके बढ़ते आंदोलन को देखा तो उसे एहसास हुआ कि यदि विरोध को और नजरअंदाज किया गया तो स्थिति उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगें इसलिए मानीं क्योंकि उसे अपनी कुर्सी बचाने की चिंता थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खरगे का निशाना
राज्यसभा में बोलते हुए खरगे ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहले ही छात्रों से बातचीत करने पहुंच जाती तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों को चोट नहीं लगती. उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, उसके लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है. खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि दिल्ली में इतने बड़े स्तर पर घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार के शीर्ष नेताओं की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई. उन्होंने पूछा कि जब देश के छात्र अपनी समस्याएं उठा रहे थे, तब सरकार उनसे संवाद क्यों नहीं कर सकी.
