नई दिल्ली: पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बिल पर बोलने से पहले 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा.गोगोई ने कहा, “हमने देखा कि पुलिस ने पैलेट गन चलाई, महिलाओं पर हमला किया, उन्हें थप्पड़ मारे और उनकी आंखों में आंसू देखे. इसलिए हम बार-बार पूछ रहे थे कि पैलेट गन चलाने, आंसू गैस छोड़ने और पैरों की जगह सिर पर वार करने का आदेश किसने दिया?”उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बिल या इस पर चर्चा का विरोध नहीं कर रहा था, बल्कि वह पुलिस की कार्रवाई पर सरकार से जवाब चाहता था. मॉनसून सत्र में छह दिन तक चले गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में इस बिल पर चर्चा और इसे पारित करने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसी मुद्दे को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार स्थगित हो रही थी.
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने वाला यह विधेयक पेश किया. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन के तहत परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सजा 3-5 साल से बढ़ाकर 5-10 साल और जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है. पेपर लीक कराने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स या एजेंसियों के लिए जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये और परीक्षा कराने पर रोक 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है. अगर मामला किसी संगठित गिरोह से जुड़ा होगा, तो सजा 7-10 साल और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक हो सकता है.जितेंद्र सिंह ने कहा, “परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी.”उन्होंने 2024 के कानून को “स्वतंत्र भारत के इतिहास का अपनी तरह का पहला कानून” बताया. उन्होंने 2009 के रेलवे भर्ती बोर्ड पेपर लीक से लेकर 2013 की महाराष्ट्र माध्यमिक परीक्षा तक कई मामलों का ज़िक्र किया और कहा कि ये पहले की सरकारों के समय हुए थे. उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की स्थापना 2017 में हुई थी, जबकि 1992 और 2010 में कॉमन टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ.
गौरव गोगोई ने इस विधेयक को “दिखावटी बिल” बताया. उन्होंने पूछा, “अगर यह कानून 2024 में लागू हो गया था, तो 2025 और उसके बाद भी इतने पेपर लीक कैसे हुए?”उन्होंने एनटीए पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उसके स्वीकृत पद सिर्फ 34 हैं, तो सरकार ने 47 अधिकारियों का तबादला कैसे कर दिया. गोगोई ने सदन में नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले की जांच की स्थिति भी रखी.उन्होंने कहा, “नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में जिन 45 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, उनमें से 44 को पहले ही जमानत मिल चुकी है.” उन्होंने इसके लिए 2026 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया.उन्होंने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्होंने बाद में नीट से जुड़े विवादों के बीच इस्तीफा दे दिया, पहले कहते थे, “पेपर कहां लीक हुआ? कोई पेपर लीक नहीं हुआ.” गोगोई ने कहा कि सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शिक्षा विभाग पर लोगों का भरोसा वापस नहीं आएगा. उन्होंने सदन को बताया कि प्रधान के कार्यकाल में 21 छात्रों ने आत्महत्या की.
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं गलत हैं. गोगोई ने कहा, “कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक और सॉल्वर गैंग पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंस्टाग्राम पर ज्यादा ध्यान दीजिए.”उन्होंने यह भी कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बाद संसद पहुंचे, तो बीजेपी सांसदों ने “उनका ऐसा स्वागत किया, जैसे वह पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों.”गौरव गोगोई ने अपने भाषण की शुरुआत असम में आई बाढ़ का मुद्दा उठाकर की. उन्होंने राज्य के लिए राहत पैकेज की मांग की और कहा कि वहां अब तक कम से कम 70 लोगों की मौत हो चुकी है.सरकार की ओर से बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने जवाब की शुरुआत की. एनडीए की ओर से कुल 13 सांसदों को बोलना था, जिनमें तेजस्वी सूर्या, अनुराग ठाकुर और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे भी शामिल थे. कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल और गौरव गोगोई को इस बिल पर बोलने के लिए रखा गया.लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस बहस के लिए 6 घंटे का समय तय किया था. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर सरकार और समय देने को तैयार है. उन्होंने बताया कि उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी के नेताओं से बात की है.उन्होंने कहा, “अगर दो घंटे और चाहिए तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. अगर आठ घंटे से भी ज्यादा समय चाहिए, तो हम 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए तैयार हैं.”इस बहस के साथ लोकसभा में छह दिन से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया. हालांकि, राज्यसभा में विपक्ष अब भी गृह मंत्री अमित शाह से छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई पर बयान देने की मांग कर रहा है. इसी वजह से वहां कामकाज प्रभावित रहा. पिछले दिन की तरह छठे दिन भी राज्यसभा में कोई विधायी काम नहीं हो सका और नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस खारिज कर दिए गए.
