लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को अहंकार था कि सरकार झुकती नहीं है। देशभर के युवाओं ने अपने आंदोलन से इस सरकार को झुका दिया। अपने भाषण में अखिलेश ने कहा कि युवाओं ने सरकार के खिलाफ नारा दिया- झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है। सरकार झुकी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। लेकिन, सरकार ने ‘प्रधान’ को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। लोकसभा में मंगलवार को ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की निंदा की.
अखिलेश यादव ने कहा, ‘पूरे देश ने देखा कि मंत्री जब मंत्री नहीं रहे, तो संसद के बाहर उनका स्वागत किया गया। स्वागत पर शिकायत नहीं है, लेकिन माननीय सदस्यों को कितनी बड़ी राहत मिली होगी, कि उन्होंने कितने बड़े संकट से बचा लिया। एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। ऐसा आंदोलन किसी ने नहीं देखा, जिसमें कम उम्र की पीढ़ी निकलकर सामने आए। जिस तरह के नारे आंदोलन में दिए गए, उससे साफ हो गया कि ये सरकार पिछले कई सालों से नकारात्मक प्रचार पर टिकी हुई थी।’
भाजपा वचन नहीं देती, जुमला देती है- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में कहा कि भाजपा वचन नहीं देती है, केवल जुमला देती है। छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार परीक्षा संशोधन बिल ला रही है, लेकिन जो सरकार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाई, वो पेपर लीक कैसे रोक पाएगी। उन्होंने कहा कि अकेले उत्तर प्रदेश के अंदर 20 से ज्यादा परीक्षाएं लीक हुई हैं, जंतर-मंतर के आंदोलन में सबसे ज्यादा छात्र नौजवान यूपी से ही निकल कर आए थे।
जब सरकार घबराती है, तब झुकती है- अखिलेश यादव
लोकसभा में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को ये भी एहसास हो गया कि मजाक-मजाक में बना एक दल कितने गंभीर मुद्दे पर परिणाम ले आया। इस सरकार ने किसानों की भी नहीं सुनी थी। जब पूरी दिल्ली को किसानों ने घेर लिया और सामने चुनाव आ गए, तब इन्होंने तीनों काले कृषि कानून वापस ले लिये। जब ये सरकार घबरा जाती है, डर जाती है, तब ये स्वीकार करती है और झुकती है। जब आंदोलन होता है, तो बडे़ स्तर पर तैयारी होती है। लेकिन, दिल्ली में हुआ आंदोलन ऐसा था, जिसमें बच्चों का साथ उनके माता-पिता ने दिया।
इमरजेंसी पर दिया अखिलेश यादव ने दिया जवाब
वहीं, अखिलेश यादव ने अपने भाषण में इमरजेंसी की भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने इमरजेंसी नहीं देखी, लेकिन इमरजेंसी में क्या-क्या हुआ, वो अभी देश की राजधानी दिल्ली में जरूर देखा। बच्चों पर लाठियां चलाई गईं, कील वाली लाठियां मारी गईं, आंसू गैस के गोले छोड़ गए। उस वक्त करंट नहीं लगाया जाता था, इस बार करंट भी लगाया गया। ये इमरजेंसी से कम बड़ा अन्याय नहीं है।’
अखिलेश यादव ने कहा, “मज़ाक-मज़ाक में बनी कॉकरोच जनता पार्टी आज कितनी बड़ी पार्टी बन गई. मज़ाक में शुरू हुई पार्टी अब कितनी गंभीर हो गई है. सरकार युवाओं को झुकाना जानती है. करोड़ों युवाओं की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें. अब धर्मेंद्र प्रधान मंत्री नहीं हैं.”उन्होंने कहा कि जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री संसद पहुंचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया. इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इससे सदस्यों को बड़ी राहत मिली होगी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “एक प्रधान को हटाकर आपने प्रधानमंत्री को बचा लिया.”पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि यह पहला ऐसा आंदोलन था, जिसमें अभिभावकों ने ख़ुद अपने बच्चों से आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा. उन्होंने कहा, “अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ़ कर देते.” अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे. भगवान के दरबार से दान ग़ायब हो गया.”
