गुजरात के वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है. भारत निर्वाचन आयोग (ECINET) की वेबसाइट पर 3:36 बजे जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रभाई (सतीश) पटेल ने 55,481 वोट हासिल कर कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया है. लेकिन इन सबके बीच चुनाव परिणाम से ज्यादा इस बात की भी चर्चा है कि आखिर NOTA तीसरे नंबर पर कैसे पहुंच गया और कांग्रेस इतनी बड़ी लड़ाई में क्यों नहीं टिक सकी. मांजलपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है. दिवंगत विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद हुए इस उपचुनाव में भी पार्टी ने अपनी पकड़ कमजोर नहीं पड़ने दी. बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल ने 55,481 वोट हासिल किए हैं. जबकि कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को 24,851 वोट मिले. दोनों के बीच 30,630 वोटों का अंतर रहा. यह जीत बताती है कि वडोदरा के इस शहरी इलाके में बीजेपी का संगठन और वोट बैंक अभी भी बेहद मजबूत है.
इस चुनाव का सबसे बड़ा सरप्राइज NOTA रहा. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2247 मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार को वोट देने के बजाय NOTA का बटन दबाया है. इसी वजह से NOTA तीसरे नंबर पर पहुंच गया. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कुछ मतदाताओं ने उपलब्ध उम्मीदवारों से असंतोष जताने के लिए यह विकल्प चुना. कम मतदान प्रतिशत ने भी NOTA की चर्चा को और बढ़ा दिया.कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी दूसरे स्थान पर जरूर रहे, लेकिन पूरे चुनाव में बीजेपी के आसपास भी नहीं पहुंच सके. मतगणना के लगभग हर दौर में बीजेपी की बढ़त लगातार बढ़ती गई. इससे साफ हो गया कि मांजलपुर जैसी शहरी सीट पर कांग्रेस अभी भी बीजेपी के मजबूत संगठन और वोट बैंक को चुनौती नहीं दे पा रही है.2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पूरे राज्य में आक्रामक चुनाव प्रचार किया था. कई सीटों पर उसे अच्छा वोट शेयर भी मिला था. लेकिन मांजलपुर उपचुनाव में AAP ने उम्मीदवार ही नहीं उतारा. इसके चलते मुकाबला सीधे बीजेपी और कांग्रेस के बीच सिमट गया. यही वजह रही कि नतीजों में AAP का नाम तक दिखाई नहीं दिया.मांजलपुर उपचुनाव में मतदान करीब 37 प्रतिशत के आसपास रहा. माना जा रहा है कि कम मतदान का फायदा बीजेपी को मिला क्योंकि उसका पारंपरिक वोट बैंक मतदान केंद्रों तक पहुंचा. वहीं विपक्ष अपने समर्थकों को उसी संख्या में मतदान के लिए नहीं निकाल सका. इसका असर सीधे वोटों के अंतर में भी दिखाई दिया.मांजलपुर का उपचुनाव सिर्फ एक सीट का परिणाम नहीं है. इसने साफ कर दिया कि वडोदरा जैसे शहरी इलाकों में बीजेपी की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है. कांग्रेस दूसरे स्थान पर जरूर है, लेकिन जीत की लड़ाई से काफी दूर दिखाई दी. वहीं NOTA का तीसरे नंबर पर पहुंचना यह संकेत भी देता है कि मतदाताओं का एक वर्ग मौजूदा विकल्पों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.
