दतिया: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली लेकिन परिणाम के बाद चर्चा केवल विजेता घनश्याम सिंह की नहीं हो रही. चुनाव में तीसरे स्थान पर रही चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने 22 हजार से ज्यादा वोट हासिल करके भाजपा और कांग्रेस के परंपरागत चुनावी गणित को हिला दिया. चुनाव आयोग के अनुसार, कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले. उन्होंने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया है. आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले. वहीं आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ को 22,527 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे. पहली नजर में यह कांग्रेस और भाजपा के बीच छह हजार वोट की सामान्य जीत-हार दिखाई देती है लेकिन आजाद समाज पार्टी के वोट जोड़ते ही मुकाबले की राजनीतिक तस्वीर बदल जाती है. पार्टी को मिले 22,527 वोट कांग्रेस की जीत के अंतर से लगभग 3.74 गुना ज्यादा हैं. यही वजह है कि सवाल उठ रहा है-क्या चंद्रशेखर आजाद की पार्टी ने भाजपा के हाथ आती हुई जीत छीनकर कांग्रेस की राह आसान कर दी?चुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे. अन्य सभी प्रत्याशी एक हजार वोट का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके. इसके उलट आजाद समाज पार्टी ने 22,527 वोट लेकर तीसरे स्थान पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.
उम्मीदवारों और NOTA को मिलाकर कुल 1,57,499 वोट गिने गए. इसके आधार पर:
– कांग्रेस को करीब 42.39 प्रतिशत वोट
– भाजपा को करीब 38.57 प्रतिशत वोट
– आजाद समाज पार्टी को करीब 14.30 प्रतिशत वोट मिले.
यानी दतिया में मतदान करने वाले प्रत्येक सात मतदाताओं में से लगभग एक ने चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के प्रत्याशी को वोट दिया. किसी उपचुनाव में तीसरे दल के लिए 14 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना सामान्य प्रदर्शन नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच बताया जा रहा हो.
सीधे तौर पर इसका दावा करना उचित नहीं होगा. चुनाव आयोग केवल यह बताता है कि किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले. वह यह नहीं बताता कि आजाद समाज पार्टी को वोट देने वाले लोग उसके मैदान में नहीं होने पर भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य उम्मीदवार को चुनते. इसलिए यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि आजाद समाज पार्टी के सभी 22,527 वोट भाजपा से कटे लेकिन एक चुनावी तथ्य बहुत महत्वपूर्ण है. कांग्रेस और भाजपा के बीच अंतर केवल 6,016 वोट का था, जबकि आजाद समाज पार्टी को इससे करीब साढ़े तीन गुना अधिक वोट मिले. इसका अर्थ है कि तीसरे उम्मीदवार ने चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा प्रभाव डाला. यदि आजाद समाज पार्टी के मतदाताओं का एक हिस्सा भी भाजपा के संभावित सामाजिक आधार से आया, तो वह भाजपा की हार में निर्णायक साबित हो सकता है. लेकिन यदि उसका अधिकांश वोट कांग्रेस के परंपरागत दलित वोट बैंक से आया, तो आजाद समाज पार्टी ने कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया होगा- इसके बावजूद कांग्रेस जीतने में सफल रही.
कांग्रेस की बल्ले-बल्ले हुई
आजाद समाज पार्टी के मजबूत प्रदर्शन से वोटों का मुकाबला त्रिकोणीय बन गया. ऐसी स्थिति में किसी उम्मीदवार को कुल मतों का 50 प्रतिशत हासिल करना जरूरी नहीं रहता; सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है. कांग्रेस ने करीब 42.39 प्रतिशत मत हासिल करके सीट जीत ली. भाजपा लगभग 38.57 प्रतिशत पर रही, जबकि ASP ने 14.30 प्रतिशत वोट अपने खाते में डाल लिए. यदि तीसरे उम्मीदवार को इतने वोट नहीं मिलते, तो वे वोट कांग्रेस और भाजपा के बीच किस अनुपात में बंटते यह तय नहीं कहा जा सकता लेकिन आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी ने यह जरूर सुनिश्चित किया कि 22 हजार से ज्यादा मत दोनों बड़े दलों के खाते में नहीं गए. इस विभाजन के बीच कांग्रेस ने अपना वोट भाजपा से 6,016 अधिक रखा और सीट बचा ली.
दतिया में दलित मतदाता
निर्वाचन आयोग विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का जातिवार विवरण जारी नहीं करता. इसलिए दतिया में दलित मतदाताओं की कोई आधिकारिक ECI संख्या उपलब्ध नहीं है. चुनाव से पहले प्रकाशित स्थानीय राजनीतिक आकलनों में दतिया विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या करीब 58 हजार से 60 हजार बताई गई थी. इनमें जाटव और अहिरवार समाज के मतदाता लगभग 33 हजार से 40 हजार तक होने का अनुमान लगाया गया. एक अन्य जातीय आकलन में अहिरवार-जाटव समाज की हिस्सेदारी करीब 14.7 प्रतिशत बताई गई थी. इन अनुमानों को परिणाम से जोड़ें तो आजाद समाज पार्टी को मिला 14.30 प्रतिशत वोट महत्वपूर्ण दिखाई देता है लेकिन यह मान लेना सही नहीं होगा कि पार्टी के सभी वोट दलित समुदाय से ही आए.
उम्मीदवार यादव, पार्टी की पहचान दलित राजनीति से
आजाद समाज पार्टी ने दतिया से दामोदर यादव ‘मंडल’ को उम्मीदवार बनाया था. उम्मीदवार स्वयं यादव समाज से आते हैं, जबकि चंद्रशेखर आजाद की पार्टी की सबसे मजबूत राजनीतिक पहचान दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़ी है. इस समीकरण ने ASP को दो प्रकार के मतदाताओं तक पहुंचने का अवसर दिया:
– चंद्रशेखर आजाद और बहुजन राजनीति से प्रभावित दलित मतदाता.
– दामोदर यादव की सामाजिक पहचान और स्थानीय संपर्क से जुड़े यादव मतदाता.
– चुनाव पूर्व विश्लेषणों में भी माना गया था कि आजाद समाज पार्टी उम्मीदवार अनुसूचित जाति, विशेषकर जाटव-अहिरवार मतों के साथ यादव वोटों में भी सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं. यही सामाजिक गठजोड़ दामोदर यादव को 22,527 वोट तक पहुंचाने की एक संभावित वजह हो सकता है.
भाजपा को कहां हुआ नुकसान?
भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश की थी. दतिया में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 33 से 35 हजार होने का अनुमान लगाया गया था. इसके साथ पार्टी को अपने परंपरागत OBC और अन्य समर्थक वर्गों पर भरोसा था. लेकिन ASP के यादव उम्मीदवार ने OBC मतों के एक हिस्से में सेंध लगाई हो सकती है. वहीं चंद्रशेखर आजाद के प्रचार और पार्टी की बहुजन पहचान ने उन दलित मतदाताओं को आकर्षित किया होगा जो पहले भाजपा, कांग्रेस या बसपा में बंटते रहे हैं. भाजपा केवल 6,016 वोट से हारी. ऐसे में यादव, दलित या नाराज स्थानीय मतदाताओं का छोटा-सा स्थानांतरण भी परिणाम बदलने के लिए पर्याप्त था. इसके अतिरिक्त भाजपा में उम्मीदवार चयन को लेकर अंदरूनी असंतोष की चर्चा भी चुनाव के दौरान रही. परिणाम संबंधी रिपोर्टों में इसे पार्टी की हार के संभावित कारणों में गिना गया.
क्या आजाद समाज पार्टी ने कांग्रेस के भी वोट काटे?
इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. दतिया में दलित मतदाताओं, खासकर जाटव और अहिरवार समुदाय को कांग्रेस के महत्वपूर्ण सामाजिक आधारों में माना जाता रहा है. चुनाव से पहले भी यह कहा जा रहा था कि आजाद समाज पार्टी की एंट्री से कांग्रेस के परंपरागत दलित वोट में बिखराव हो सकता है. यदि आजाद समाज पार्टी को दलित वोट का बड़ा हिस्सा मिला, तो उसने कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया. इसके बावजूद कांग्रेस का जीतना बताता है कि घनश्याम सिंह ने दूसरे समुदायों और स्थानीय समर्थकों के बीच पर्याप्त बढ़त बनाई. इसलिए परिणाम को केवल आजाद समाज पार्टी ने भाजपा का वोट काटकर कांग्रेस को जिता दिया कहना अधूरा होगा. ज्यादा संतुलित निष्कर्ष यह है कि आजाद समाज पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के संभावित सामाजिक आधारों में सेंध लगाई लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले का अंतिम लाभ कांग्रेस को मिला.
दतिया में 2023 के विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार को केवल 490 वोट मिले थे. उस चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोट से हराया था. कांग्रेस को 88,977 और भाजपा को 81,235 वोट मिले थे. अब 2026 के उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी का वोट 490 से बढ़कर 22,527 हो गया. इसका मतलब वोटों में 22,037 की वृद्धि, पिछले चुनाव से लगभग 46 गुना बेहतर प्रदर्शन, वोट शेयर करीब 0.28 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 14.30 प्रतिशत की यह छलांग चुनाव के सबसे बड़े राजनीतिक संदेशों में से एक है. हालांकि उपचुनाव और आम विधानसभा चुनाव में मतदान, उम्मीदवार और स्थानीय परिस्थितियां अलग होती हैं. इसलिए दोनों चुनावों की सीधी तुलना सावधानी के साथ की जानी चाहिए.
एक सांसद वाली पार्टी का बड़ा संदेश
