श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बुधवार (19 अगस्त) को मुलाकात के बाद श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है।मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा, ‘कश्मीर भारत का एक अहम हिस्सा है। मैं पहली बार यहां आया हूं। यह बेहद खूबसूरत जगह है।’ उमर अब्दुल्ला के साथ खड़े होकर मीडिया से बात करते हुए गोर ने कहा, ‘हमारी मुलाकात बहुत अच्छी रही और हम अपने रिश्तों को और मजबूत बनाना चाहते हैं।’बता दें कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर और मई 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद, कश्मीर का दौरा करने वाले यह शीर्ष अमेरिकी राजनयिक हैं।
वहीं, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ हुई मुलाकात के बाद सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें अमेरिका और भारत के रिश्तों पर चर्चा करने का मौका मिला, जिसमें जम्मू-कश्मीर पर खास ध्यान दिया गया।सीएम ने कहा, ‘हमारी बैठक बहुत अच्छी रही। हमें दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा करने का मौका मिला, लेकिन इसमें खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया गया कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए क्या कर सकता है। जाहिर है, कुछ पुराने मुद्दे हैं, जिन्हें हम समय के साथ सुलझाने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।’मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि आने वाले सालों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच जुड़ाव और गहरा और व्यापक होगा।
अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर का यह पहला आधिकारिक दौरा है।लेकिन इस यात्रा की अहमियत केवल इतनी नहीं है। गोर ऐसे समय कश्मीर हैं, जब घाटी में आतंकवाद निर्णायक रूप से कमजोर पड़ चुका है और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में वहां की जनता पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है। ऐसे बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य में यह दौरा महज एक नियमित राजनयिक कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि इसके व्यापक रणनीतिक और राजनीतिक संकेतों को समझना भी जरूरी हो जाता है।सर्जियो गोर ने जनवरी 2026 में भारत में अमेरिकी राजदूत का कार्यभार संभाला। शुरुआती दौर में उन्होंने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है।यही पृष्ठभूमि उनकी श्रीनगर यात्रा को खास बनाती है। मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से उनकी मुलाकात अपने आप में किसी संवैधानिक या अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रश्न नहीं है, लेकिन यह जरूर संकेत देती है कि अमेरिकी कूटनीति जम्मू-कश्मीर में किन संस्थागत संपर्कों को प्राथमिकता दे रही है।
कश्मीर को लेकर अमेरिकी कूटनीति का इतिहास एक जैसा नहीं रहा है। 1990 के दशक में अमेरिकी राजनयिकों का संपर्क कश्मीर की विभिन्न राजनीतिक धाराओं तक फैला हुआ था। सरकारी और मुख्यधारा के राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ अलगाववादी नेताओं, शिक्षाविदों, छात्रों, पत्रकारों और कारोबारी प्रतिनिधियों से संवाद के उदाहरण भी सामने आते रहे।समय के साथ आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा अमेरिकी नीति के अधिक महत्वपूर्ण आयाम बनते गए। इसके साथ ही कश्मीर में अमेरिकी राजनयिकों की गतिविधियां भी अधिक संस्थागत और आधिकारिक स्वरूप लेती गईं।2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया। अब सर्जियो गोर ऐसे जम्मू-कश्मीर में पहुंच रहे हैं, जहां केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था के साथ-साथ एक निर्वाचित सरकार भी काम कर रही है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी यात्रा अतीत की अमेरिकी कश्मीर कूटनीति की पुनरावृत्ति है या अमेरिकी नीति के एक नए अध्याय का संकेत।
