Criminal cases Against MP-MLA : लोकसभा-राज्यसभा के 776 सांसदों में से 326 पर मुकदमे दर्ज हैं. यानी करीब 42% सांसदों पर केस है. देशभर में सांसदों-विधायकों पर दर्ज 4 हजार से भी ज्यादा मुकदमे पेंडिंग हैं. तेलंगाना और केरलम के जनप्रतिनिधियों पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले हैं. जबकि हरियाणा-छत्तीसगढ़ में सबसे कम हैं. तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी पर अन्य मुख्यमंत्रियों की तुलना में सबसे ज्यादा मुकदमे हैं. सुप्रीम कोर्ट में पेश हाल ही एक रिपोर्ट में ये जानकारियां सामने आईं हैं.
यूपी के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने नेताओं पर दर्ज मुकदमे के निपटारे के लिए आवाज उठाई थी. उन्होंने साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया को साल 2018 में सुनवाई में तेजी लाने के मकसद से एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) बनाया था. आज यानी 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की विशेष बेंच को इस याचिका पर सुनवाई करना था.
इससे पूर्व 17 अगस्त को एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने नेताओं के आपराधिक इतिहास पर आधारित 22वीं रिपोर्ट पेश की. इसमें बताया कि लोकसभा के 543 में से 251 जबकि राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं. सांसदों-विधायकों के खिलाफ 4 हजार से ज्यादा मुकदमे पेंडिंग पड़े हैं. देशभर के 28 राज्यों में से 14 राज्यों के सीएम भी मुकदमे झेल रहे हैं. इनमें कई मुकदमे गंभीर कैटेगरी वाले भी हैं.
10 साल से भी ज्यादा समय के हैं मुकदमे : रिपोर्ट में बताया गया है कि विधायकों-सांसदों पर दर्ज ये मुकदमे 10 साल से भी ज्यादा समय के हैं. कुल 4,192 मामलों में से 754 मामले 5 से 10 साल के अंदर के हैं. यानी साल 2016 से लेकर 2021 के बीच के. वहीं 562 केस 3 से 5 साल के अंदर वाले जबकि 1 हजार 95 मामले 3 साल से भी कम समय से पेंडिंग हैं. रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्रियों में तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी पर सबसे ज्यादा 89 केस दर्ज हैं.
यूपी में सबसे ज्यादा पेंडिंग नेताओं पर दर्ज मुकदमे : एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के अनुसार राज्यों/हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश में सांसदों-विधायकों पर दर्ज सबसे ज्यादा 1,171 केस पेंडिंग हैं. इसके बाद केरलम में इस तरह के 543, बिहार में 373, महाराष्ट्र में 364, ओडिशा में 330 मुकदमे लंबित हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रायल के लिए लंबित मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है. हालांकि 2018 से यह संख्या 4 हजार से ऊपर ही है.
मुकदमों के निपटारे में आ रही ये समस्या : एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया के मुताबिक सांसदों-विधायकों पर दर्ज मुकदमों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं. इसके बावजूद इसमें तेजी नहीं दिख रही है. विशेष अदालतों पर रोजाना कामकाज का लोड बना रहता है, कई बार सुनवाई भी टलती रहती है, आरोपी पेश नहीं हो पाते हैं, गवाह देरी से बुलाए जाते हैं, इन वजहों से भी केस लंबित पड़े रहते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे स्पेशल कोर्ट बनाने के आदेश : विधायकों-सांसदों पर दर्ज मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट बनाने के आदेश दिए थे. देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके तहत 12 स्पेशल कोर्ट बनाए जाने थे. इसके एक साल बाद ही यानी 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने हर जिले में खास सेशंस कोर्ट और एक खास मजिस्ट्रेट कोर्ट गठित करने के भी आदेश दिए थे.
सांसदों पर दर्ज 170 मामले गंभीर : एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के हवाले से सांसदों पर दर्ज मुकदमों की गंभीरता के बारे में भी जानकारी दी गई है. बताया गया है कि लोकसभा के जिन 543 सदस्यों में से 251 पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 170 मामले गंभीर हैं. ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ 5 साल या उससे ज्यादा की सजा सुनाई जा सकती है.
केरलम के 20 में से 19 सांसदों पर मुकदमे : रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्यसभा में 233 में से 75 सदस्यों पर मुकदमे दर्ज हैं. यह करीब 33% है. इनमें से 40 मुकदमे गंभीर हैं. इनमें भी 5 साल या इससे ज्यादा की सजा का प्रावधान है. केरलम के 20 में से 19 सांसद यानी करीब 95% पर मुकदमे दर्ज हैं. यहां 11 सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं. विजय हंसारिया ने विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट से मिले डेटा का विश्लेषण भी किया है.
तेलंगाना में 82% सांसदों पर आपराधिक मुकदमे : रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में 17 में से 14 सांसद (82%) अलग-अलग तरह के मुकदमों का सामना कर रहे हैं. इसी तरह ओडिशा में 21 में से 16 सांसद, झारखंड में 14 में से 10 सांसद, तमिलनाडु में 39 में से 26 सांसदों पर मुकदमे दर्ज हैं.इसी तरह हरियाणा के 10 सांसदों में से एक, छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में से एक पर केस दर्ज है. गुजरात में 25 में से 5 सांसदों पर मुकदमे लिखे गए हैं.
विशेष अदालतें केवल इन्हीं केसों की करें सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में विधायकों-सांसदों पर दर्ज मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए.हैं. नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की सुप्रीम कोर्ट की ओर से निगरानी करने पर जोर दिया गया. इसके अलावा यह भी मांग की गई है कि ऐसे मामलों के लिए गठित विशेष अदालतें केवल इन्हीं मामलों की सुनवाई करें. इसके बाद ही किसी दूसरे केस पर विचार करें.
रोजाना हो पेंडिंग केसों की सुनवाई : यह भी सुझाव दिया गया कि ऐसे केसों की सुनवाई कोर्ट में रोजाना हो जो 3 साल से भी ज्यादा समय से पेंडिंग हैं. जिस नेता पर मुकदमा दर्ज हो, अगर वह लगातार 2 सुनवाई में गैर हाजिर रहता हो तो उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए जाएं. गवाहों के बुलाने के लिए एक नोडल प्रॉसिक्यूशन अफसर नियुक्त किए जाएं. हाईकोर्ट की वेबसाइट पर केस से जुड़ी जानकारी भी अपडेट की जाए.
अदालतों में 5.4 करोड़ से अधिक मामले लंबित : राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक न्यायपालिका के तीनों स्तरों – जिला और अधीनस्थ न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में कुल करीब 5.4 करोड़ से अधिक मामले पेंडिंग हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट में 12 लाख 26 हजार 425, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में 2 लाख 48 हजार 733, पटना हाईकोर्ट में 2 लाख 18 हजार 963, पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में 4 लाख 18 हजार, 735 केस पेंडिंग पड़े हैं.
