हैदराबाद. आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनने की दिशा में देश की महिलाएं साल-दर-साल खासी प्रगति कर रही हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6(NFHS) की रिपोर्ट के आंकड़े ऐसी की सुखद तस्वीर पेश कर रहे हैं.बात चाहे घर-परिवार के अहम फैसलों में भागीदारी-रायशुमारी की हो या फिर स्वत्रंत रूप से बैंकिंग खाता हैंडल करना. अपना पर्सनल फोन-इंटरनेट का यूज हो या अपने नाम पर जमीन-जायदाद खरीदना, करीब-करीब हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी जगह मजबूत कर रही हैं. दुनिया-जहान में उन्हें अहमियत मिल रही है. वे पहले से कहीं ज्यादा सशक्त बन रही हैं.
दरअसल, NFHS-6 के तहत 2023-24 के दौरान देश में 715 जिलों के करीब 6.79 लाख घरों-परिवारों का सर्वे किया गया. इसकी रिपोर्ट मई, 2026 में जारी की गई है. इस खबर का आधार उसी रिपोर्ट के आंकड़े हैं. एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट बताती है कि ऐसी शादीशुदा महिलाएं, जो अपने घर-परिवार के कम से कम तीन फैसलों में भूमिका निभाई, उनकी संख्या करीब 89 फीसदी तक पहुंच गई है. 2019 से 21 के बीच किए गए NFHS-5 रिपोर्ट में यह डाटा 88.7 प्रतिशत रहा था. हालांकि ग्रामीण महिलाओं का अपने घर-परिवार के फैसलों में दखल शहरी इलाकों में रहने वाली महिलाओं की तुलना में कम देखने को मिलता है.
अपना बैंक खाता खुद हैंडल करने वाली महिलाएं बढ़ीं
देश की महिलाएं आर्थिक रूप से भी समृद्धि हो रही हैं. अब 89 फीसदी के आसपास महिलाएं अपने बैंक खाते से खुद से ही लेन-देन कर रही हैं. एनएफएचएस-5 में यह पर्सेंटेज 78.6 था. इसी तरह सर्वे के समय पिछले 12 महीनों में कहीं कोई काम या जाॅब करने वाली महिलओं की संख्या 30.8 प्रतिशत तक पहुंच गई जबकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में यह 25.4 पर्सेंट रहा था.
पर्सनल मोबाइल और नेट यूज बढ़ा
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 63.6 फीसद महिलाओं के पास उनका निजी मोबाइल फोन है और वे खुद उसका इस्तेमाल करती हैं. NFHS-5 में ये आंकड़ा 53.9 प्रतिशत था. यही नहीं, लगभग 64.3 महिलाएं इंटरनेट यूज करती हैं. पिछले सर्वे यानी एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 33.3 फीसदी था.
घर-जमीन की मालकिन भी बढ़ीं
एनएफएचएस-6 का डाटा यह दिखाता है कि महिलाओं में घर-जमीन खरीदने का चलन बढ़ा है. देश के करीब 18.8 परिवार ऐसे हैं जहां महिलाओं के खुद के नाम या फिर जाॅइंट नाम पर जमीन-मकान है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में यह हिस्सेदारी 14 फीसदी के करीब थी.
ऱाष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में डीबी़टी. सेल्फ हेल्प ग्रुप्स, डिजिटल लिटरेसी और बैंकिंग लेन-देन जैसी नई जानकारियों को पहली बार शामिल किया गया है. इससे पहले के पांच एनएफएचएस सर्वेक्षणों में इनके इनपुट नहीं जुटाए जाते थे. NFHS सर्वे के लिए मुंबई की इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फाॅर पाॅपुलेशन साइंसेज(IIPS) केंद्र सरकार की ओर से अधिकृत एजेंसी है. सर्वे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से अलग-अलग इनपुट इकट्ठा किए गए हैं.
भारत सरकार के हालिया पाॅपुलेशन ट्रेंड-2026 का डाटा बताता है कि देश की 142.59 करोड़ की कुल आबादी में महिलाओं की भागीदारी करीब 48.65 फीसदी है. साल 2036 तक इसमें और सुधार होने की उम्मीद है.
