लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. इस टीम को सिर्फ संगठन में पदों के बंटवारे के तौर पर ही नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है. खासतौर पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं हरियाणा की मौजूदगी को 2029 की तैयारी से जोड़कर देखा जा सकता है. नई टीम में उत्तर प्रदेश को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं. प्रो. तारिक मंसूर और रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री, डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है. इसके अलावा अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है.BJP की नई राष्ट्रीय टीम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को जगह देकर पार्टी ने एक ऐसा संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की कोशिश की है, जो 2027 के चुनाव में संगठन, सामाजिक समीकरण और वोट विस्तार तीनों को साध सके.उत्तराखंड से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।वहीं, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही आलोक भट्ट सोशल मीडिया सह संयोजक, महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री बनाया गया है।

यूपी में सबसे बड़ा सामाजिक समीकरण
दरअसल, यूपी भाजपा के लिए 2027 का चुनाव पिछली जीत को दोहराने से कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपना आधार किस तरह मजबूत रखा जाए. ऐसे समय में अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान मिलना अपने आप में अहम संकेत है. इसके साथ ही संगीता यादव और हरीश द्विवेदी जैसे चेहरों को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलना यूपी के प्रतिनिधित्व को मजबूत करता है.खास बात यह है कि नितिन नबीन ने नई टीम घोषित करने से पहले यूपी के करीब 20 सांसदों से वन-टू-वन बातचीत भी की थी. रिपोर्टों के मुताबिक, इन बैठकों में जातीय समीकरण और कार्यकर्ताओं के मनोबल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. इससे साफ है कि 2027 की तैयारी में भाजपा ऊपर से तय रणनीति के बजाय जमीन की राजनीतिक नब्ज को समझने पर भी जोर दे रही है.
स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी का संदेश
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने का यूपी के लिहाज से अलग महत्व है. अमेठी से उनका पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है और महिला वोटरों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति में उनका इस्तेमाल अहम हो सकता है. वहीं हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलने से पूर्वी यूपी के संगठनात्मक अनुभव को केंद्रीय स्तर पर जगह मिली है. दोनों की भूमिका केवल दिल्ली के संगठन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चुनावी राज्यों में केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति को जमीन तक पहुंचाने में भी हो सकती है.यूपी में भाजपा के लिए 2027 का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि दलित और ओबीसी वोटों को लेकर मुकाबला पहले से अधिक हुआ है. बसपा के कमजोर होने से दलित वोटों में नए राजनीतिक समीकरण की संभावना बनी है और भाजपा, सपा समेत कई दल इस वर्ग में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत ,अनिल बलूनी बने मीडिया संयोजक
उत्तराखंड में तस्वीर कुछ अलग है. नई टीम में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री, अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है.उत्तराखंड के लिए यह टीम खास मायने रखती है, क्योंकि राज्य में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की परीक्षा है. नितिन नबीन पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी उत्तराखंड में किसी दूसरे राज्य के मॉडल के बजाय ‘धामी मॉडल’ पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनाने का भरोसा भी जताया है.ऐसे में तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना पुराने और अनुभवी नेतृत्व को केंद्रीय संगठन से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. दूसरी तरफ अनिल बलूनी जैसे नेता को मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना उत्तराखंड से निकलने वाले राजनीतिक नैरेटिव को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने की दिशा में अहम हो सकता है.यानी उत्तराखंड में भाजपा का फॉर्मूला फिलहाल साफ दिखाई देता है कि चेहरा धामी का, संगठन मजबूत और संदेश राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अनुभवी नेताओं की.
हिमाचल चुनावी चिंता बड़ी,पर जगह नहीं मिली
सबसे दिलचस्प संकेत हिमाचल प्रदेश को लेकर है. 2027 के आखिर में हिमाचल में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन नितिन नबीन की घोषित राष्ट्रीय टीम में हिमाचल प्रदेश से किसी नेता को राष्ट्रीय पदाधिकारी के तौर पर जगह नहीं मिली. हालांकि इसे सीधे तौर पर हिमाचल की अनदेखी मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि राज्य में भाजपा पहले ही प्रदेश स्तर पर संगठन को चुनावी मोड में ला चुकी है. प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में संगठन ने 2027 के लिए अपनी तैयारियां तेज की हैं और जुलाई में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में भी चुनावी रोडमैप पर चर्चा हुई थी. लेकिन राष्ट्रीय टीम में हिमाचल की गैरमौजूदगी का एक दूसरा मतलब ये भी हो सकता है कि पार्टी शायद राज्य के लिए केंद्रीय संगठन में नए चेहरे तलाशने के बजाय मौजूदा प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय चुनावी ढांचे पर ज्यादा भरोसा कर रही है.
