मुंबई में जब शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने मीडिया के सामने आए तो वहां का नजारा बेहद नाटकीय और गहरी सियासी सांकेत से भरा हुआ था. कैमरों के फ्लैश और पत्रकारों की भीड़ के बीच सबकी नजरें उद्धव ठाकरे पर तो थीं ही लेकिन उससे भी ज्यादा ध्यान उनके बगल में रखी एक बेहद खास और भव्य खाली कुर्सी ने खींचा. यह कोई आम कुर्सी नहीं बल्कि लकड़ी पर नक्काशीदार शिल्प से तैयार की गई एक शाही सिंहासन जैसी आसंदी थी, जो हमेशा दिवंगत शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पहचान रही है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे के ठीक बगल में इस खाली कुर्सी का मौजूद होना और उस पर भगवा कपड़ा व माला जैसी आकृति सजना, सीधे तौर पर एक बड़ा भावनात्मक संदेश दे रहा था. इस दृश्य ने बिना कुछ बोले ही महाराष्ट्र की सियासत में यह साफ कर दिया कि भले ही पार्टी का नाम और सिंबल छिन गया हो लेकिन बालासाहेब की असली विरासत और उनके विचारों का सिंहासन आज भी किसके पास है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर जमकर बरसे उद्धव ठाकरे
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्य रूप से नीट (NEET) पेपर लीक मामले और सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखे हमले किए. उनके भाषण के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
• नीट पेपर लीक का केंद्र महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि देश को हिला देने वाले नीट परीक्षा पेपर लीक मामले का मुख्य केंद्र स्वयं महाराष्ट्र में ही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर वह ऐसा बोलते हैं, तो शायद राज्य के मुख्यमंत्री को यह महाराष्ट्र के खिलाफ देशद्रोह जैसा महसूस होने लगेगा.
• माताओं-पिता की गाढ़ी कमाई बर्बाद: उन्होंने छात्रों और अभिभावकों का दर्द साझा करते हुए कहा कि आज पूरे देश में माता-पिता बेहद परेशान हैं. बच्चों की पूरी शिक्षा और मां-बाप की जीवनभर की कमाई इस अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण बर्बाद हो गई है, लेकिन सत्ता में बैठे बेपरवाह हुक्मरानों को इस बात की रत्ती भर भी परवाह नहीं है.
• सोनम वांगचुक के आंदोलन को बिना शर्त समर्थन: उद्धव ठाकरे ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके के आंदोलन को अपनी पार्टी शिवसेना (UBT) की तरफ से पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि देश भर के माता-पिता और नागरिकों को अब जागना होगा, क्योंकि यह पूरे राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा मामला है.
• वांगचुक से अनशन तोड़ने की भावुक अपील: सरकार की संवेदनहीनता पर निशाना साधते हुए उन्होंने सोनम वांगचुक से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि वे अपना अनशन वापस ले लें. उद्धव ने कहा, “देश को आप जैसे बुद्धिमान लोगों की जरूरत है. यह सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन है, आप जैसे लोग रहें या न रहें, इस सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता. इसलिए देश के हित के लिए अपनी बुद्धिमत्ता बचाएं और उपवास छोड़ दें.”
• देश भर के राजनीतिक दलों से आह्वान: उन्होंने कहा कि जब तक पूरा देश एकजुट होकर इस आंदोलन के समर्थन में खड़ा नहीं होगा, तब तक सत्ता के नशे में चूर इन लापरवाह शासकों को उनकी सही जगह का अहसास नहीं कराया जा सकता.
