लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या दौरे पर रहेंगे। उनके प्रस्तावित कार्यक्रमों में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन भी शामिल है। इसी बीच राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर चल रहे विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम से दूर रखने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री के राम मंदिर दर्शन-पूजन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए वह और सदस्य अनिल मिश्र, गोपाल राव के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध किया गया है।यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे विवाद और उससे जुड़ी जांच चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा यह भी है कि ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। तीनों पदाधिकारियों से इन दिनों लगातार समय-समय पर एसआईटी जानकारी के लिए बुला रही है।
चंपत राय को अपना प्रतिनिधि भेजने का निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रवार को अयोध्या का दौरा है। उनका रामलला के दर्शन-पूजन का भी कार्यक्रम है। सीएम योगी आदित्यनाथ के राम मंदिर आगमन पर इस बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अगवानी नहीं करेंगे। उनके स्थान पर किसी को नामित करने का अनुरोध किया गया है।जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों में चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री के राम मंदिर दर्शन-पूजन कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए वह किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें। साथ ही इसकी सूचना ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सीयूजी नंबर पर उपलब्ध कराएं। यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विवाद और जांच का मामला चर्चा में है। इससे पहले मंदिर आने वाले प्रत्येक वीआईपी की अगवानी चंपत राय करते थे।
प्रशासनिक निर्णय
हालांकि, जिला प्रशासन और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रतिनिधि नामित करने संबंधी निर्देश सामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। उधर, चंपत राय के समर्थन में हाल के दिनों में दी गई विभिन्न सफाइयों का भी फिलहाल कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे और राम मंदिर में उनके कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक एवं धार्मिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
आगामी व्यवस्थाएं
मुख्यमंत्री योगी के दौरे के दौरान होने वाली व्यवस्थाओं और मंदिर परिसर में मौजूद रहने वाले प्रमुख लोगों को लेकर अब अटकलों का दौर तेज हो गया है। हालांकि, वास्तविक स्थिति मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के समय ही स्पष्ट हो सकेगी।
रामलला के मंदिर चढ़ावे की चोरी , तीसरे दिन SIT ने खंगाले रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेज
अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर से जुड़ा एक मामला इन दिनों पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है. ये मामला है श्रद्धालुओं के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की चोरी का. जब ये पूरा मामला सामने आया, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. अब तक की जांच में करीब 8 करोड़ रुपये से ज्यादा के हेरफेर के सबूत मिले हैं. SIT ने 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है और कई लोगों को हिरासत में लिया है. इस पूरे मामले को शुरू से लेकर आखिर तक हर पहलू के साथ समझते हैं…
कैसे सामने आया ये पूरा मामला?
ये मामला जून 2026 की शुरुआत में तब सामने आया, जब राम मंदिर ट्रस्ट अपने हिसाब-किताब की जांच कर रहा था. ऑडिट के दौरान ट्रस्ट को दानपात्रों से नकदी और कीमती सामान गायब होने का शक हुआ. जब मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, तो वहां काम करने वाले कुछ कर्मचारियों की हरकतें संदिग्ध लगीं:
7 जून 2026: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को सार्वजनिक किया. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया कि राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब है. इसी दिन पूर्व सपा मंत्री पवन पांडेय ने भी दावा किया कि राम मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये चोरी हुए हैं.
8 जून 2026: अखिलेश यादव के आरोपों के जवाब में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का आंतरिक ऑडिट चल रहा है और अभी तक बड़े पैमाने पर गबन का कोई सबूत नहीं मिला है.
9 जून 2026: बीजेपी नेता डॉ. राजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की CBI जांच की मांग की.
10 जून 2026: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस मामले में रिपोर्ट मांगी.
13 जून 2026: राम मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष और गहन जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की. उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया. ट्रस्ट ने SIT जांच की मांग इसलिए की थी, क्योंकि उसे लगा कि इस मामले को लेकर गलत सूचनाएं और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा हो रहा है.
15 जून 2026: SIT की टीम अयोध्या पहुंची. टीम ने सीधे राम मंदिर ट्रस्ट के दफ्तर में जांच शुरू की. पहले दिन टीम ने मंदिर परिसर में करीब 7 से 8 घंटे बिताए. SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से जानकारी ली. पांच संदिग्धों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर की पहचान की गई. इनकी निशानदेही पर 2 करोड़ रुपये बरामद किए गए.
16 जून 2026: SIT जांच के दूसरे दिन चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव से करीब 4-4 घंटे पूछताछ हुई. SIT ने 42 कर्मचारियों से पूछताछ की. बैंक अधिकारियों और नोट-गिनने वाले एजेंसी के कर्मचारियों से भी पूछताछ हुई. संतोष दुबे (धर्मसेना), युवा कांग्रेस के शरद शुक्ला और करणी सेना के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने चंपत राय पर 24 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का आरोप लगाया.
17 जून 2026: SIT की जांच के तीसरे दिन ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को पूछताछ के लिए बुलाया गया. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से कई दौर में पूछताछ हुई. RSS के करीब 500 स्वयंसेवकों को दान-गिनती के काम से हटाए जाने का दावा सामने आया. अब तक 8 करोड़ से ज्यादा के हेरफेर के सबूत मिले हैं.
18 जून 2026: SIT की जांच जारी रही. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कल (19 जून) अयोध्या दौरे पर चंपत राय को दूर रहने को कहा गया.
तीन सदस्यीय SIT का गठन
राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया. इसमें:
विजय विश्वास पंत, लखनऊ मंडलायुक्त (SIT के प्रमुख)
किरण एस, लखनऊ रेंज के IG (पुलिस अधिकारी)
नील रतन, उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के विशेष सचिव
SIT ने 15 जून को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू की. पहले दिन टीम ने मंदिर परिसर में करीब 7-8 घंटे बिताए. दूसरे दिन सुबह 10 बजे से जांच जारी रही. तीसरे दिन भी जांच चली.
किस-किस से पूछताछ हुई?
ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से पूछताछ हुई:
चंपत राय (ट्रस्ट के महासचिव): 16 जून को करीब 4 घंटे पूछताछ हुई.
गोपाल राव (ट्रस्ट सदस्य): 16 जून को करीब 4 घंटे पूछताछ.
डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी): 17 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया.
SIT ने दान-गिनती में शामिल 5 कर्मचारियों की पहचान की है. इनमें लवकुश मिश्रा, अवनीश, अनुकल्प मिश्रा, करुणे और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नी शामिल हैं.
इनके अलावा जिनसे पूछताछ हुई:
42 संदिग्ध कर्मचारी.
50 से ज्यादा लोगों से ज्यादा SIT ने अब तक पूछताछ की है.
SBI बैंक अधिकारी.
नोट-गिनती एजेंसी के कर्मचारी.
मंदिर प्रबंधन से जुड़े दर्जनों लोग.
इस मामले में क्या-क्या आरोप लगे?
इस मामले में 5 बड़े आरोप लगे:
- चंपत राय पर 24 करोड़ की जमीन खरीदने का आरोप
AAP सांसद संजय सिंह ने चंपत राय पर 24 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का आरोप लगाया. उन्होंने X पर जमीन के कागजात की फोटो पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि राय ने 3 करोड़ रुपये की नजूल जमीन 24 करोड़ रुपये में खरीदी.
- लवकुश मिश्रा पर शराब पर 50 हजार खर्च करने का आरोप
लवकुश मिश्रा पर आरोप है कि उसने एक बार शराब के ठेके पर करीब 50 हजार रुपये खर्च कर दिए. लवकुश ने गांव वालों पर धौंस जमाने के लिए दारू पार्टी की थी.
- 500 RSS स्वयंसेवकों को हटाने का दावा
सूत्रों का दावा है कि RSS ने देशभर से करीब 500 स्वयंसेवकों को राम मंदिर में सेवा के लिए भेजा था, जिनमें दान-गिनती की ड्यूटी भी शामिल थी. इन स्वयंसेवकों को पहले तीन महीने जूता-प्रबंधन की ड्यूटी दी गई और बाद में हटा दिया गया. इससे RSS कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. RSS के संयुक्त महासचिव भैयाजी जोशी ने तीन दिन पहले अयोध्या का दौरा किया.
- कांग्रेस का आरोप- निष्पक्ष जांच नहीं हो रही
युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने कहा कि जब तक ट्रस्ट के पदाधिकारी अपने पद पर बने रहेंगे, निष्पक्ष जांच प्रभावित होगी. इसके अलावा महंत कमलनयन दास का कहना है कि इस जांच से कुछ नहीं होने वाला है. जांच करने वाले भी वैसे ही हैं. जब जांच करने वाले बेईमान हैं तो जांच क्या ही होगी. - RJD सांसद का कानूनी नोटिस
RJD सांसद ने राम मंदिर ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें 2021-22 से 2025-26 तक के दान और खर्च का साल-दर-साल हिसाब मांगा गया है.
