लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के पद पर राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति की गई है। अब तक इस पद पर अविनाश पांडे विराजमान थे। उन्हें चुनावी माहौल के गरमाने से पहले ही हटा दिया गया है। राजेंद्र पाल गौतम पिछले महीने लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इसके बाद उनकी चर्चा खूब गरमाई थी। अब यूपी प्रदेश प्रभारी के पद पर उनकी नियुक्ति ने राजनीतिक माहौल को गरमाया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने बड़े संकेत दे दिए हैं। कांग्रेस की नजर प्रदेश के दलित और ओबीसी वोटरों पर जम गई है। अभी तक अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के जरिए कांग्रेस अपर कास्ट वोट बैंक को साधने की कोशिश करती दिख रही थी। राजेंद्र पाल गौतम के जरिए प्रदेश के दलित और ओबीसी वोटरों पर पार्टी ने अपनी नजर गड़ा दी है। गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए राज्य की राजनीति में अपनी अलग पकड़ बनती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस भी अब दलित ओबीसी वोटरों की राजनीति की तरफ शिफ्ट करती दिख रही है।
कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। 26 अप्रैल 1968 को दिल्ली में उनका जन्म हुआ था। पेशे से वकील राजेंद्र पाल गौतम अपनी मजबूत अंबेडकरवादी और सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। बसपा प्रमुख मायावती की मिलने की कोशिश को लेकर वह खासी चर्चा में आए थे।
दरअसल, कांग्रेस अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग के अध्यक्ष के तौर पर वह लखनऊ में बैठक लेने आए थे। इस दौरान विभाग के यूपी अध्यक्ष एवं सांसद तनुज पुनिया के साथ वे मायावती से मिलने उनके आवास तक चले गए थे। हालांकि, मुलाकात का समय निश्चित न होने के कारण उन्हें दरवाजे से लौटना पड़ा था।
राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद राजनीतिक महकमे में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि राजेंद्र पाल गौतम मायावती को पाले में लाने का प्रयास करते दिख सकते हैं। हालांकि, पिछले दिनों जब राजेंद्र पाल गौतम जब मायावती से मिलने उनके घर गए थे तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच रिश्तो में दरार जैसी स्थिति दिखी थी। बाद में राजेंद्र पाल गौतम ने मायावती का स्वास्थ्य जानने के लिए उनके घर जाने की बात कही थी। इसको लेकर कई प्रकार की बातें सामने आई थी।भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 में रोकने के लिए राजेंद्र पाल गौतम कांग्रेस- समाजवादी पार्टी- बहुजन समाज पार्टी गठबंधन बनाने की दिशा में कार्य करते दिख सकते हैं। हालांकि, इसमें वे कितने सफल हो पाएंगे, देखना दिलचस्प होगा। मायावती पहले से ही कांग्रेस और भाजपा पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं।
अखिलेश भी कर चुके हैं साफ
अखिलेश यादव पहले ही गठबंधन के स्वरूप को लेकर स्थिति साफ कर चुके हैं। उन्होंने पिछले दिनों कहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में जो INDI गठबंधन का स्वरूप था, वही 2027 के विधानसभा चुनाव में भी रहेगा। राजेंद्र पाल गौतम के यूपी कांग्रेस में सक्रिय होने के बाद दलित और ओबीसी पॉलिटिक्स पर पार्टी अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश करेगी। वहीं, समाजवादी पार्टी से गठबंधन के तहत अधिक सीटों की मांग भी करती दिख सकती है। तमाम मुद्दों को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का माहौल गर्मा गया है।
हटाए गए अविनाश पांडे
अविनाश पांडे की यूपी कांग्रेस पर प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्ति मिल गई है। उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी बनाया गया था। दिसंबर 2023 में उन्होंने प्रियंका गांधी का स्थान लिया था। यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के साथ मिलकर उन्होंने लोकसभा चुनाव 2009 के बाद कांग्रेस के सबसे बेहतर प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाई। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत मिली। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 2 और 2019 के लोकसभा चुनाव में महज एक सीट पर जीत सकी थी।2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, ओडिशा के कांग्रेस प्रभारी अजय कुमार लल्लू को भी हटा दिया गया है। ऐसे में उनके भी प्रदेश कांग्रेस में सक्रिय होने की बात कही जा रही है।
