नई दिल्ली:कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. इस मौके पर कांग्रेस कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है. कांग्रेस के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी है. पीएम मोदी ने एक एक्स पोस्ट में राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं. उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करता हूं.कांग्रेस ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए एक पोस्ट लिखा है. कांग्रेस ने एक्स पर लिखा – ऐसी दुनिया में जहां ज्यादातर लोग चुप रहना पसंद करते हैं, आपने हमेशा उस बात के लिए आवाज उठाई है जिसे आप सही मानते हैं. अन्याय, असमानता और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आपकी लगातार लड़ाई ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है.आप लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि राजनीति सिर्फ सत्ता पाने की बेरहम दौड़ नहीं है, बल्कि यह बदलाव लाने का एक सशक्त जरिया है. यह उसूलों पर चलने वाली और करुणा से प्रेरित हो सकती है.ईमानदारी, सहानुभूति और उम्मीद की तलाश कर रही पूरी पीढ़ी के लिए, आप ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) की आवाज़ बन गए हैं. एक ऐसे नेता जो उनकी बात सुनते हैं, समझते हैं, उन्हें सशक्त बनाते हैं और उनकी आकांक्षाओं के लिए आवाज उठाते हैं. एक अधिक दयालु, निष्पक्ष भारत और हर दिल में ‘मोहब्बत की दुकान’ के लिए, आपके लिए हमेशा शक्ति और खुशियों की कामना करता हूं.
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राहुल गांधी को दी जन्मदिन की बधाई
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा- संविधान के आदर्शों के प्रति आपकी अटूट निष्ठा और अनसुनी आवाजों के लिए आपकी बेबाक लड़ाई ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है. कांग्रेस पार्टी की सबको साथ लेकर चलने की परंपरा, सामाजिक न्याय, सद्भाव और करुणा की भावना आपके सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व में झलकती है. लोगों के साथ लगातार जुड़ाव और सत्ता के सामने सच बोलने के आपके साहस के ज़रिए, आपने हमेशा सबसे कमज़ोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के हितों की वकालत की है. ईश्वर आपको अच्छा स्वास्थ्य, खुशी, शक्ति और देश की सेवा में लंबी उम्र प्रदान करे.
अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को दी जन्मदिन की बधाई
राजस्थान के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा- युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए अथक संघर्ष करने वाले राहुल जी पूरे देश में उन लोगों की सशक्त आवाज बन गए हैं, जिनकी बात पहले सुनी नहीं जाती थी. संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता लाखों लोगों को प्रेरित करती रहती है. मैं आपके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और देश की सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए निरंतर शक्ति की कामना करता हूं.
राहुल गांधी 56 साल के हो गए हैं और उनका जन्मदिन बड़े धूमधाम से कांग्रेस दफ्तर में मनाया गया. इस अवसर पर यह भी बात करनी जरूरी है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के सामने क्या चुनौतियां हैं. राहुल गांधी के झोली कुछ सफलता हैं तो कुछ नाकामियां भी हैं.2022-2023 में उनकी भारत जोड़ो यात्रा ने राजनीतिक रूप से उनकी छवि एकदम बदल दी और उसका फायदा कांग्रेस को चुनाव में हुआ. कांग्रेस को लोकसभा में 99 सीटें मिली और राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने. विपक्ष के नेता के रूप में उनके प्रदर्शन पर सबकी निगाहें लगातार बनी रहती है. मगर हाल के दिनों में राहुल गांधी ने जिस तरह के फैसले लिए हैं उसकी काफी चर्चा है. सबसे पहले केरल में वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला जबकि विधायक के सी वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे. फिर तमिलनाडु में डीएमके को छोड़ कर एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के साथ सरकार में शामिल होना.हालांकि राहुल गांधी के इस निर्णय पर बहुत बात की गई कि किस तरह से इंडिया गठबंधन ने अपना एक महत्वपूर्ण सहयोगी खो दिया है. उसके बाद राहुल गांधी का ममता बनर्जी के साथ खड़ा होना और उनके कहने पर इंडिया गठबंधन की मीटिंग बुलाना. इसके बाद राहुल गांधी का नीट की परीक्षा पर छात्रों के बीच जा कर संवाद करना. कहने का मतलब है कि राहुल गांधी इन युवाओं में अपनी स्वीकार्यता बढ़ा कर कांग्रेस के लिए एक अलग वोट बैंक तैयार करने में जुटे हैं.
छात्रों की बात करके वे उनके माता-पिता तक भी पहुंच सकते हैं. जैसा कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एनडीटीवी से कहा, “देश के सामने चुनौतियां हैं. राहुल गांधी जिस संघर्ष को लेकर आगे बढ़ रहे हैं वो देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पूरे देश के युवा उन्हें एक ऐसे इंसान की तरह देखते हैं जो उनकी उम्मीदों को बढ़ाना चाहता है. शिक्षा-परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा टूट चुका है. लोगों के मन में असमंजस है. राहुल गांधी उसका मुकाबला करने के लिए, बड़ी ताकतों से लड़ने के लिए और लोगों को न्याय दिलाने का काम कर रहे हैं. उनकी मेहनत ज़रूर रंग लाएगी. सबने उनको शुभकामनाएं दी और कहा कि आपके संघर्ष में पूरा देश आपके साथ है.”
राहुल गांधी के सामने क्या-क्या चुनौतियां?
ये सब तो ठीक है मगर राहुल गांधी के सामने चुनौतियां भी कम नही है. हर राज्य में पार्टी में गुटबाजी जैसे मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,पंजाब , छत्तीसगढ़, बिहार. इसके चलते कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा है. अभी संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मध्यप्रदेश और झारखंड में हार गए. झारखंड में आरजेडी ने बिहार राज्यसभा चुनाव के तीन विधायकों द्वारा वोट ना करने का बदला लिया.कहने का मतलब है कि कांग्रेस की सहयोगी दल भी उसे गाहे बगाहे आंख दिखाने से नहीं डरते. राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता पंजाब और राजस्थान में पार्टी में नई जान फूंकने की होगी और आगे आने वाले दिनों में इन राज्यों में संगठन में बदलाव भी होने वाले हैं. इसके साथ ही उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस किस तरह से समझौता करके 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ती है यह भी सबकी निगाहों में है.56 के राहुल गांधी, अब क्या है सबसे बड़ी चुनौती? पायलट, थरूर, पवन खेड़ा, अखिलेश ने बतायाराहुल गांधी की बढ़ती उपलब्धियों के साथ-साथ कई चुनौतियां भी उनका पीछा कर रही हैं. बीजेपी का बंगाल जीतना राहुल के लिए एक और सिरदर्द बन गया है.राहुल गांधी 56 साल के हो गए हैं और उनका जन्मदिन बड़े धूमधाम से कांग्रेस दफ्तर में मनाया गया. इसी अवसर पर यह भी बात करनी जरूरी है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के सामने क्या चुनौतियां हैं. राहुल गांधी के झोली कुछ सफलता हैं तो कुछ नाकामियां भी हैं. 2022-2023 में उनकी भारत जोड़ो यात्रा ने राजनीतिक रूप से उनकी छवि एकदम बदल दी और उसका फायदा कांग्रेस को चुनाव में हुआ. कांग्रेस को लोकसभा में 99 सीटें मिली और राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने. विपक्ष के नेता के रूप में उनके प्रदर्शन पर सबकी निगाहें लगातार बनी रहती है. मगर हाल के दिनों में राहुल गांधी ने जिस तरह के फैसले लिए हैं उसकी काफी चर्चा है. सबसे पहले केरल में वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला जबकि विधायक के सी वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे. फिर तमिलनाडु में डीएमके को छोड़ कर एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के साथ सरकार में शामिल होना.
अलग वोट बैंक तैयार करते की रणनीति में जुटे राहुल गांधी
हालांकि राहुल गांधी के इस निर्णय पर बहुत बात की गई कि किस तरह से इंडिया गठबंधन ने अपना एक महत्वपूर्ण सहयोगी खो दिया है. उसके बाद राहुल गांधी का ममता बनर्जी के साथ खड़ा होना और उनके कहने पर इंडिया गठबंधन की मीटिंग बुलाना. इसके बाद राहुल गांधी का नीट की परीक्षा पर छात्रों के बीच जा कर संवाद करना. कहने का मतलब है कि राहुल गांधी इन युवाओं में अपनी स्वीकार्यता बढ़ा कर कांग्रेस के लिए एक अलग वोट बैंक तैयार करने में जुटे हैं.छात्रों की बात करके वे उनके माता-पिता तक भी पहुंच सकते हैं. जैसा कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एनडीटीवी से कहा, “देश के सामने चुनौतियां हैं. राहुल गांधी जिस संघर्ष को लेकर आगे बढ़ रहे हैं वो देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पूरे देश के युवा उन्हें एक ऐसे इंसान की तरह देखते हैं जो उनकी उम्मीदों को बढ़ाना चाहता है. शिक्षा-परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा टूट चुका है. लोगों के मन में असमंजस है. राहुल गांधी उसका मुकाबला करने के लिए, बड़ी ताकतों से लड़ने के लिए और लोगों को न्याय दिलाने का काम कर रहे हैं. उनकी मेहनत ज़रूर रंग लाएगी. सबने उनको शुभकामनाएं दी और कहा कि आपके संघर्ष में पूरा देश आपके साथ है.” राहुल गांधी के लिए सबका बड़ी चुनौती बीजेपी का लगातार बढ़ना है एनडीए लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई का आंकड़ा तक पहुंचने की कोशिश में लगा है जिसके लिए पार्टियों में टूट हो रही है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने एनडीटीवी से कहा, “राहुल गांधी को कोई कुश्ती लड़ कर तो पीएम को परास्त नहीं करना है लेकिन जिस तरह से युवाओं, महिलाओं का समर्थन राहुल गांधी को मिल रहा है उससे लोग पीएम को हराएंगे.”देश की नौजवान पीढ़ी की चुनौतियां हम अपने ऊपर लेते हैं. हमारी जिम्मेदारी है कि हम चुनौतियों का सामना करेंगे और युवाओं के मन में जो अवसाद है उससे हम लड़ेंगे.” राहुल गांधी ने दक्षिण भारत में कांग्रेस के लिए ठीक-ठाक इंतजाम कर लिया है मगर उत्तर के राज्य खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़,राजस्थान, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार और गुजरात उनके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है. अगले साल पंजाब,उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड,गोवा,मणिपुर और बाद में हिमाचल और गुजरात में होने वाले हैं. उसके बाद 2028 में मध्यप्रदेश, राजस्थान, कनार्टक छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव हैं और यही कांग्रेस का भविष्य तय करेंगे. इसके बाद 2029 का लोकसभा चुनाव.मगर तब तक कांग्रेस और राहुल गांधी की दशा और दिशा तय हो चुकी होगी.
