देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 5 देशों का दौरा कंप्लीट हो चुका है. लेकिन इस दौरे पर ना सिर्फ उन्होंने उन देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया बल्कि कई लाख करोड़ रुपए का निवेश भी लेकर आ रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी इन 5 देशों से करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश लेकर आ रहे हैं. जिससे देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा ही, साथ देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे. वहीं दूसरी ओर देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी इजाफा देखने को मिलेगा.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की पांच देशों की यात्रा निवेश के मोर्चे पर एक बड़ी सफलता साबित हुई है, जिसमें भारत ने लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए (लगभग $40 बिलियन) के नए निवेश और विस्तार योजनाओं के वादे हासिल किए हैं. इस यात्रा के दौरान, PM मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों की 50 से अधिक वैश्विक कंपनियों के सीईओ और सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की. इन कंपनियों का कुल वैल्यूएशन लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जो इस यात्रा के दौरान हुई बातचीत के बड़े पैमाने को दर्शाता है. इनमें से बड़ी संख्या में कंपनियां पहले से ही भारत में मौजूद हैं, और देश में उनका कुल निवेश और व्यावसायिक विस्तार लगभग 180 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है.
कई कंपनियां अब भारत में अपने कामकाज का विस्तार करना चाहती हैं, ताकि वे देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और बढ़ती उपभोग मांग का लाभ उठा सकें. सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई नई परियोजनाएं और विस्तार योजनाएं अभी पाइपलाइन में हैं. इस यात्रा के दौरान की गई प्रमुख घोषणाओं में से एक यह थी कि संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में 5 बिलियन डॉलर, या लगभग 45,000 करोड़ रुपए के नए निवेश का वादा किया है. इस यात्रा के दौरान चर्चा किए गए नए निवेश के वादों और प्रस्तावित व्यावसायिक विस्तार योजनाओं का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 40 बिलियन डॉलर है. अधिकारियों ने इस परिणाम को भारत की आर्थिक विकास गाथा और दीर्घकालिक निवेश क्षमता का एक मज़बूत समर्थन बताया.
पीएम की यूएई यात्रा में 7 समझौते
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शुक्रवार को पेट्रोलियम भंडार, दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति, रक्षा और जहाजरानी से संबंधित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अबू धाबी ने भारत में कुल पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इन सात समझौतों में रणनीतिक रक्षा साझेदारी से संबंधित रूपरेखा भी शामिल है, जो रक्षा औद्योगिक सहयोग, प्रौद्योगिकी साझाकरण, नवाचार और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है। इसके तहत, दोनों देश कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अलावा सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमत हुए हैं। बयान के अनुसार, इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (देश के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ ‘रणनीतिक सहयोग’ के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
नीदरलैंड यात्रा, 17 समझौते
वैश्विक भू-राजनीति में बदलावों के बीच भारत और नीदरलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीदरलैंड के उनके समकक्ष रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बीते शनिवार शाम हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र और व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की क्योंकि इसके कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।संयुक्त बयान के अनुसार, मोदी और जेटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र नौवहन और वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन का आह्वान किया। उन्होंने किसी भी तरह के ‘प्रतिबंधात्मक’ कदमों का विरोध किया और इस संबंध में जारी पहलों के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस संकरे जलमार्ग से 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद से जहाजों का आवागमन बुरी तरह से बाधित है, जिसके परिणामस्वरूप जवाबी हमले भी हुए। दोनों नेताओं ने यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की जो रूस के साथ जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रमों से प्रभावित है।
स्वीडन यात्रा, 6 समझौते
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्वीडन के उनके समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच रविवार को व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर वार्ता के बाद भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। दो दिवसीय यात्रा पर स्वीडन पहुंचे मोदी को भारत-स्वीडन संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए ’रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान से भी सम्मानित किया गया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक उपलब्धि माना जा रहा है। क्रिस्टर्सन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हर क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को देखते हुए हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है। इस साझेदारी में हम स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को अपनाने, सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और लोगों के बीच संबंधों पर विशेष ध्यान देंगे।’उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और हरित परिवहन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। मोदी ने क्रिस्टर्सन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन की उपस्थिति में कहा, ‘भारत में आयोजित एआई-इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। हम स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और एआई कॉरिडोर पर काम करेंगे।’
नॉर्वे यात्रा, 12 समझौते
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओस्लो यात्रा के दौरान, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने मंगलवार को नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संगठनों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में भारत और नॉर्वे के सहयोग को मजबूत करना है। एक अधिकारी ने कहा, “इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास में भारत-नॉर्वे संबंधों का विस्तार करना है, साथ ही दोनों देशों में संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग के साथ जुड़ाव, शैक्षणिक सहयोग और सतत विकास पहल को बढ़ावा देना है।” इन समझौतों में से एक समझौता सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच हुआ जिसमें जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए संयुक्त कार्यशालाओं, सहयोगी अनुसंधान और विकास परियोजनाओं और आदान-प्रदान यात्राओं की परिकल्पना की गई है। सीएसआईआर ने नॉर्वे के प्रमुख स्वतंत्र अनुसंधान संगठन स्टिफ्टेल्सन सिंतेफ के साथ 2026-2029 के लिए एक सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों संस्थानों के बीच 2014 के मौजूदा समझौता ज्ञापन (एमओयू) के ढांचे के तहत है।
इटली के साथ 15 समझौतो पर हस्ताक्षर
भारत और इटली ने बुधवार को अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक विस्तारित करने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने पश्चिम में उत्पन्न स्थिति और क्षेत्र के साथ-साथ विश्व के शेष भाग पर इसके प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। साथ ही क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया। मोदी और मेलोनी ने नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को पुनः शुरू करने का भी आह्वान किया। मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात रोम पहुंचे थे। मेलोनी के साथ बातचीत के लिए पहुंचने पर मोदी को रस्मी सलामी गारद दी गई।दोनों नेताओं ने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने तथा व्यापार, निवेश और नयी प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। मोदी और मेलोनी ने जनवरी में अंतिम रूप दिए गए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति व्यक्त की और इसके शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी और मेलोनी व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, एआई एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव में सहयोग को और बढ़ाने पर सहमत हुए। मोदी ने कहा, ‘प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के आधार हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हमारे सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।’
