लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट विरोध मार्च निकाला। इस मार्च में इंडिया ब्लॉक अन्य नेता भी मौजूद रहे। राहुल गांधी इंडिया ब्लॉक के तमाम नेताओं के साथ पैदल चलकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जहां उन्होंने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए इसे वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन और संविधान बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही। विपक्ष ने मतदाता सूची, एसआईआर और बैलेट पेपर को लेकर भी मांगें रखीं।उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन किसी एक पार्टी या नेता की लड़ाई नहीं, बल्कि संविधान और देश के भविष्य को बचाने की मुहिम है। राहुल ने इसे शिवजी की बारात बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी विचारधारा का व्यक्ति शामिल हो सकता है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।

राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की
राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में नाम हटाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे उठाए गए हैं।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कानूनी टीम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप उठाए गए हैं। इस मामले में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 11 नेताओं के नाम
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में 11 नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल हैं। इनके अलावा शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एम. ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम भी याचिका में हैं।
निर्वाचन आयोग समेत चार प्रतिवादी
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए हैं। साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।
CJI ने मुलाकात से किया था इनकार
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, सीजेआई ने यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने की सलाह दी।
राहुल गांधी ने मार्च को जन आंदोलन क्यों बताया
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार से उनकी कोई निजी लड़ाई नहीं है। यह संविधान बचाने की मुहिम है। उन्होंने कहा कि देश की आत्मा पर हमला हुआ है और न्याय मिलने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने युवाओं से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
शिवजी की बारात कहकर राहुल ने क्या संदेश दिया
राहुल गांधी ने मार्च को ‘शिवजी की बारात’ बताते हुए कहा कि इसमें कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी विचारधारा से जुड़े हों, वे इस आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने इसे देश के युवाओं के भविष्य और सम्मान की लड़ाई बताया।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च क्यों निकाला जा रहा है
राहुल गांधी ने बताया कि विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात के बजाय याचिका दाखिल करने को कहा था। राहुल के मुताबिक, विपक्ष अब अदालत के सामने अपनी बात रखेगा। उन्होंने लोगों से दोपहर तीन बजे सुप्रीम कोर्ट के सामने एकजुटता दिखाने की अपील भी की।
मुख्य चुनाव आयुक्त से विपक्ष की क्या मांग है
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार उन्हें बचा रहे हैं। राहुल ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और 2023 के कानून को रद्द करने की मांग भी रखी है।
विपक्ष की चार प्रमुख मांगें क्या हैं
विपक्ष ने चार मांगें रखी हैं। पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और 2023 का कानून रद्द हो। दूसरी, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर रोका जाए और मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं। तीसरी, सभी चुनावों में बैलेट पेपर की व्यवस्था लौटाई जाए। चौथी, जिन विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने वोट चोरी के सबूत देने का दावा किया है, उन्हें रद्द किया जाए।
दिल्ली को किला बनाने का आरोप क्यों लगाया
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोगों को दिल्ली आने से रोका जा रहा है और बसों व ट्रेनों को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजधानी में हर तरफ पुलिस तैनात है। उनके मुताबिक, सरकार विपक्ष के प्रदर्शन को रोकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले भी चुनाव आयोग और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहता था, लेकिन उसे रोका गया।
पुलिस और प्रशासन को लेकर राहुल ने क्या कहा
राहुल गांधी ने दावा किया कि पुलिसकर्मी भी परेशान हैं और सवाल कर रहे हैं कि युवाओं को क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं और महिलाओं के साथ मारपीट की गई। राहुल ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को घरों में विरोध करने की सलाह दी थी, लेकिन विपक्ष ने प्रदर्शन के लिए तय जगह देने की मांग की।
आंदोलन कितने समय तक जारी रखने की बात कही
राहुल गांधी ने कहा कि यह आंदोलन पांच दिन पहले शुरू नहीं हुआ, बल्कि विपक्ष को लंबे समय से रोका जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे। राहुल ने कहा कि आंदोलन एक महीने, दो महीने या एक साल तक चले, वे न्याय मिलने तक डटे रहेंगे।
सरकार के पास किस तरह की जानकारी होने का दावा किया
राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार का पूरा खाका उनके पास है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें जानकारी दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इन अधिकारियों के नाम या अपने दावे के समर्थन में कोई अन्य विवरण नहीं दिया।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को क्या चेतावनी दी
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाकर गलती कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगा और आंदोलन जारी रखेगा। राहुल ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक नेता की नहीं, बल्कि देश की जनता, संविधान और लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ी है।
