महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गरमा गई है. सरकार इस बिल को संसद में पेश करने को लेकर पूरी तरह से तैयार है. वहीं विपक्ष भी बिल के विरोध को लेकर एकजुट हो गया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद केंद्र सरकार पर हमला बोला है.मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा कि हमने हमेशा इस बिल का समर्थन किया है, लेकिन हमारा आग्रह है कि पुराने संशोधनों को लागू किया जाए. सरकार ये मानने को तैयार नहीं है. अब हमे सरकार के तरीके पर आपत्ति है. सरकार की नियत में खोट दिख रहा है.उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन सरकार जिस तरह से इसे लागू कराने का प्रयास कर रही है वो गलत है. एक तरह राजनीतिक से प्रेरित है. परिसीमन में चालाकी की गई है. सरकार कार्यपालिका के जरिए संविधान की उन शक्तियों को हथिया रही है जो संसद और संस्थाओं के पास होनी चाहिए. इन्होंने पहले भी असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन में हमें धोखा दिया है. इसलिए संसद में इस बिल का विरोध किया जाएगा. खरगे ने कहा कि संसद में सभी विपक्षी दल एकजुट होकर लड़ेंगे और इस बिल का विरोध करेंगे.
543 के आधार पर दिया जाए एक तिहाई आरक्षण
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बिल को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, विपक्ष चाहता है कि मौजूदा लोकसभा की संख्या 543 है. उसके आधार पर एक तिहाई आरक्षण दिया जाए और इसे महिलाओं के लिए 2029 से लागू किया जाए.उन्होंने कहा कि परिसीमन के प्रावधान के मामले पर हम हरगिज समर्थन नहीं कर सकते. हम इसका विरोध करेंगे और बहस में भाग लेंगे. क्योंकि इस बिल में सिर्फ सरकार की मनमानी है इस पर विपक्ष की किसी भी राय पर अमल नहीं किया गया है.
परिसीमन बिल के खिलाफ वोट करेंगे : केसी वेणुगोपाल
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार को घेरा है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार का परिसीमन कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था, विशेषकर संघीय ढांचे पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. इसलिए हम परिसीमन बिल के खिलाफ वोट करेंगे.इससे पहले उन्होंने लिखा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की बैठक आयोजित की गई. बैठक में संसद के आगामी विशेष सत्र की रणनीति और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा हुई.
महिला आरक्षण बिल के विरोध में विपक्ष के साथ आप
आम आदमी पार्टी ने भी महिला आरक्षण बिल को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. आप ने कहा कि पार्टी महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के साथ है. आप का कहना है कि संसद में 543 सीटों का 33% आरक्षण आज लागू होता है तो हम सरकार के साथ जा सकते हैं. आप का आरोप है कि बिना जनगणना के परिसीमन राज्यों के साथ धोखा करना है. सरकार यह काम खुलेआम कर रही है, जो सरासर गलत है.
जल्दबाजी में लाया जा रहा बिल, ताकि जनगणना न करानी पड़े…महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की सियासत भी गरमा गई है. महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाले इस प्रस्तावित कानून पर समाजवादी पार्टी ने समर्थन जताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण बिल को जल्दबाज़ी में लाने के पीछे एक साज़िश है, ताकि देश में जनगणना न करानी पड़े और जातिवार आंकड़े सामने न आएं.
महिला आरक्षण पर समर्थन, बीजेपी पर आरोप
समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन जिस तरीके से बीजेपी इस बिल को आगे बढ़ा रही है, उस पर सवाल खड़े करना ज़रूरी है. अखिलेश यादव का दावा है कि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आंकड़े भी सामने आएंगे और फिर जातिवार आरक्षण देना पड़ेगा, इसी डर से सरकार इस प्रक्रिया से बचना चाहती है.
सोशल मीडिया पर जताई नाराज़गी
सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा कि वह महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन उस भाजपाई चालबाज़ी के ख़िलाफ़ हैं जो एक साज़िश के तहत की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी देश की सबसे बड़ी आबादी यानी पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं. अखिलेश के मुताबिक यह लोकतंत्र के ख़िलाफ़ एक गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं हो सकती जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं किया जाता.
जनगणना और परिसीमन को लेकर चिंता
अखिलेश यादव ने कहा कि संशोधन के नाम पर दिखाई जा रही जल्दबाज़ी के पीछे बीजेपी की असली मंशा जनगणना से बचने की है. उनका आरोप है कि जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों के अधिकार छीने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट राजनीतिक दलों को मिलनी चाहिए.सपा के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में उसके चार सांसद हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा के 104 विधायक मौजूद हैं. लोकसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी सबसे ज़्यादा सीटों वाली पार्टी है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि अखिलेश यादव अपने सांसदों को सीधे तौर पर बिल का समर्थन करने को कहते हैं या समर्थन के साथ विरोध की रणनीति अपनाते हैं.
महिला आरक्षण और परिसीमन पर नवीन पटनायक की शर्त, बोले- ‘ओडिशा के अधिकारों से समझौता नहीं’
ओडिशा के पूर्व CM और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक का स्वागत केवल तभी किया जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार बरकरार रहें. पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने की अपील की है.ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने CM मोहन चरण मांझी को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने लिखा, ‘हम परिसीमन विधेयक का स्वागत तभी करेंगे जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार बरकरार रहेंगे. यह मात्र संख्या का मामला नहीं है. यह विधेयक संविधान में निहित सहकारी संघवाद की भावना पर सीधा प्रहार करता है. राजनीतिक अधिकारों में किसी भी प्रकार की कमी ओडिशा और यहां की जनता की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाएगी. ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में मैं आपसे इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की अपील करता हूं. आपके पास ऐसा करने का नैतिक और वैध अधिकार है.’पत्र के जरिए नवीन पटनायक ने कहा, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि अगले 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और यह प्रस्ताव पारित किया जाए कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों का 0.001% भी अन्य राज्यों द्वारा छीनने की अनुमति न दी जाए. एक ओडिया नागरिक के रूप में मैं आपसे इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की अपील करता हूं. बीजेडी इस मामले में आपके साथ खड़ी रहेगी, क्योंकि यह हमारे प्रिय राज्य और मातृभूमि ओडिशा के भाग्य और भविष्य को प्रभावित करता है.’बता दें कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक और इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है.
