नई दिल्ली: ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज पर भी सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को पूछा कि फॉर्म में बदलाव का आदेश किसने दिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में किस अधिकारी ने इसे मंजूरी दी? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कंपनी पर बदलाव के लिए दबाव बनाया गया था।
राहुल गांधी ने किया पोस्ट
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया गया था, जिसका जिक्र खुद चुनाव आयुक्तों ने अपने रिकॉर्ड में किया है।
कांग्रेस महासचिव ने लगाया आरोप
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 के मध्य में मुख्य चुनाव आयुक्त ने असंवैधानिक तरीके से फॉर्म में बदलाव किया था। इसका मकसद जेन-जी यानी युवा मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर करना था। उन्होंने इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका होने का भी आरोप लगाया।
क्या है पूरा मामला?
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए किया जाता है। विवाद तब शुरू हुआ, जब इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई। इसके तहत आवेदकों को बताना था कि उनका या उनके परिवार के सदस्यों का नाम पिछली मतदाता सूची में था या नहीं।
एक मीडिया रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि फॉर्म-6 एक वैधानिक दस्तावेज है और इसमें बदलाव के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी है। हालांकि चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग के मुताबिक, यह घोषणा केवल SIR की अवधि तक लागू थी।
