दिल्ली में आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच मांगे रखी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खरगे ने लिखा कि कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह एक बार फिर भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी है। जिस तरह अंग्रेजों से लड़कर वोट का हक छीना, उसी तरह आज भी उसी हक को बचाने के लिए लड़ना पड़ रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद चल रहा है। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हो रही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत अन्य नेता शामिल हुए।
सीईसी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी: दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक
लोकतंत्र की नींव को खोखला किया गया’
कांग्रेस अध्यक्ष ने पोस्ट में लिखा, ‘हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नींव रखी थी, उसे मोदी सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।’ खरगे ने कहा कि साजिश के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार की कठपुतली बन गए हैं। खरगे ने कहा, ‘बाबा साहेब ने कहा था कि किसी अफसर की मर्जी से मतदाताओं का नाम नहीं कटेगा। आज अफसर भाजपा और मोदी सरकार के इशारे पर मनमर्जी से नाम काट रहे हैं। डॉ. आंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था, लेकिन आज इसका उलटा हो रहा है। जनता ने जिसे वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन गया है।’
‘संस्थाएं सत्ता के आगे सिर झुकाएं खड़ी हैं’
मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनके अपने साथी भरोसा नहीं कर रहे, उन पर देश कैसे भरोसा कर सकता है? खरगे ने आरोप लगाया कि चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया गया, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। नौकरी तो दी नहीं और अब वोट का अधिकार भी छीनना चाहते हैं। खरगे ने आगे कहा, ‘कांग्रेस ने इस देश की संस्थाओं को बनाया और उन्हें अधिकार संपन्न बनाया, लेकिन आज वे ही संस्थाएं सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी हैं। भाजपा-आरएसएस योजना के तहत ये काम कर रही हैं।’
कांग्रेस की पांच मांगें क्या हैं?
कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच मांगें रखी हैं, जो कि निम्न हैं-
मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले।
राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा आसान फॉर्मेट में समय पर उपलब्ध हो।
जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में खुद ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी पक्ष को यह कहने का अवसर न मिले कि जानकारी छिपाई जा रही है।
लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली मतदाता
खरगे ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है। हम इस मुद्दे को किसी चुनाव को जीतने या हारने की लड़ाई के रूप में नहीं देखते। चुनाव तो आते जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है। हमें हर नागरिक से कहना है कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम वोटर है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं।’
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में विपक्ष
गोवा में कांग्रेस प्रभारी माणिकराव ठाकरे ने बैठक में आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और इसके खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक पार्टी से देशव्यापी आंदोलन करने का आह्वान किया। द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी। अखबार के अनुसार, दोनों का कहना था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। हालांकि चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने कहा कि उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी आधार प्राप्त है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त कथित तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी के लिए मोर्चे के रूप में काम कर रहे हैं और उनका पद संविधान के लिए अपमान है।
