अमेरिका में भारतीयों की बस्तियां तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 20 साल में 50 से ज्यादा इलाकों में भारतीयों की बड़ी आबादी बस चुकी है। इन्हें ‘मिनी इंडिया’ कहा जा रहा है। अनुमान है कि अगले 5 साल में ऐसे इलाकों की संख्या 75 तक पहुंच सकती है।ट्रम्प की वीजा और ग्रीन कार्ड पर सख्ती के बावजूद भारतीयों का अमेरिका जाना और वहां बसना जारी है। टेक, हेल्थकेयर और फार्मा जैसे सेक्टर में नौकरियों के मौके इसकी बड़ी वजह हैं। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा करीब 9.3 लाख भारतवंशी रहते हैं।अमेरिका (USA) की कुल आबादी लगभग 333 मिलियन हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुल आबादी के 14 प्रतिशत तो अमेरिका में विदेशी नागरिक हैं। साल लगभग 46 मिलियन विदेशी मूल के लोग संयुक्त राज्य अमेरिका में रहते थे। इनमें से 24.5 मिलियन यानी लगभग 53 प्रतिशत ने स्वाभाविक नागरिक के रूप में अपनी स्थिति बताई है।
भारतीय परिवारों की आय अमेरिकी परिवारों से ज्यादा
‘मिनी इंडिया’ में रहने वाले भारतीय परिवारों की औसत सालाना आय करीब 1.54 करोड़ रुपए है। अमेरिकी परिवारों की औसत आय करीब 80 लाख रुपए है। अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे और प्यू रिसर्च सेंटर रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है।अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग कैलिफोर्निया में रहते हैं। दूसरे नंबर पर टेक्सास है, जहां करीब 5.4 लाख भारतवंशी रहते हैं।
फ्रिस्को में 19% लोग भारतीय मूल के हैं
टेक्सास का फ्रिस्को शहर 25 साल पहले तक ज्यादातर खेतों वाला इलाका था। आज यहां की आबादी 2.5 लाख से ज्यादा है। इनमें करीब 19% लोग भारतीय मूल के हैं।आसपास के प्लेनो और एलन शहरों में भी भारतीय मंदिर, रेस्तरां और दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के
कैलिफोर्निया के डबलिन और सैन रेमन इलाके में भारतीय आबादी करीब 18% है। डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के हैं।यहां भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। नई पीढ़ी दिवाली भी मनाती है और वीकेंड पर क्रिकेट भी खेलती है। भारतीय खाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि कई जगह ड्राइव-थ्रू भारतीय फूड आउटलेट भी खुल गए हैं।सिलिकॉन वैली में भारतीयों का असर बढ़ेगाविलियम फ्रे के मुताबिक, सिलिकॉन वैली में भारतीयों की भूमिका आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारतीयों का यह सफर करीब 25 साल पहले शुरू हुआ था और अब इसकी रफ्तार और बढ़ रही है। आज सिलिकॉन वैली के लगभग 35% स्टार्टअप्स में कम से कम एक भारतीय मूल का सह-संस्थापक है।विलियम का मानना है कि आईटी सेक्टर में भारतीयों की मजबूत मौजूदगी के कारण अमेरिका के दूसरे राज्यों में भी नए ‘मिनी इंडिया’ विकसित होंगे। भारतीय समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहा है और किसी भी अन्य प्रवासी समुदाय की तुलना में उसकी भूमिका ज्यादा मजबूत दिखाई देती है।
ट्रम्प के आने के बाद सख्त हुए नियम
H-1B पर 1 लाख डॉलर का भुगतान
ट्रम्प सरकार ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत हर वीजा पर 1,03,265 डॉलर (करीब 98 लाख रुपए) की अतिरिक्त फीस लगेगी। पहले यह फीस करीब 2,000-5,000 डॉलर थी। रॉयटर्स के मुताबिक, यह नियम साल के आखिर तक लागू किया जा सकता है।
H-1B और H-4 आवेदकों की सोशल मीडिया जांच
दिसंबर 2025 से H-1B और उनके H-4 डिपेंडेंट्स की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच बढ़ाई गई। आवेदकों को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक रखने को कहा गया।
वीजा इंटरव्यू के नियम सख्तअक्टूबर 2025 से ज्यादातर नॉन-इमिग्रेंट वीजा आवेदकों के लिए इंटरव्यू भी जरूरी कर दिया गया। पहले 14 साल से कम और 79 साल से ज्यादा उम्र के आवेदकों को मिलने वाली छूट भी हटा दी गई, हालांकि कुछ मामलों में छूट जारी है।
व्यावसायिक क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा
भारतीय प्रवासियों के बीच मजबूत पारिवारिक संबंध देखे जाते हैं। 70 फीसद भारतीय अमेरिकी शादीशुदा हैं और 20 फीसद लोग पीढ़ियों से रह रहे परिवारों में रहते हैं। अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों ने अच्छी संख्या में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। 78 फीसद भारतीय प्रवासी स्नातक डिग्री या उससे ज्यादा रखते हैं, जो कि अमेरिका के राष्ट्रीय औसत 36 फीसद से कहीं ज्यादा है।अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों का व्यावसायिक क्षेत्रों में दबदबा माना जाता है। 76 फीसद भारतीय अमेरिकी प्रबंधन, व्यवसाय, विज्ञान और कला के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
कौन हैं भारतीय-अमेरिकी?
भारतीय-अमेरिकी (इंडियन अमेरिकंस) वे लोग हैं जो मूल रूप से भारत के हैं और अमेरिका में रहने लगे हैं या जिनके पूर्वज भारत से थे। ‘एशियन इंडियन’ और ‘ईस्ट इंडियन’ शब्दों का उपयोग ‘अमेरिका में नेटिव अमेरिकन’ के साथ भ्रम से बचने के लिए किया जाता है, जिन्हें भी ‘इंडियंस’ या ‘अमेरिकन इंडियंस’ कहा जाता है।
भारतीय अमेरिकी साउथ एशियन अमेरिकंस का सबसे बड़ा समूह हैं, साथ ही सबसे बड़ा एशियाई-अकेला समूह और चीनी अमेरिकियों के बाद एशियन अमेरिकंस का का सबसे बड़ा समूह हैं। भारतीय अमेरिकी अमेरिका में सबसे ज्यादा आय अर्जित करने वाला जातीय समूह माना जाता है।
