नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप (Essel group) और जी एंटरटेनमेंट (Zee) के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्रा से जुड़े एक भारी-भरकम कर्ज निपटान (Debt Settlement) को अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले ने पूरे बैंकिंग और कॉर्पोरेट सेक्टर को हैरत में डाल दिया है, क्योंकि इसमें कर्जदाताओं को अपने पैसों का लगभग पूरा हिस्सा भूलना पड़ा है।
कर्ज निपटान के चौंकाने वाले आंकड़ें
इस मामले की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात इसके आंकड़ें हैं। कुल बकाया कर्ज लगभग 22,006 करोड़ रुपये रहा और निपटान राशि महज 6.5 करोड़ रुपये थी। वहीं हेयरकट (Haircut) 99.97% (यानी कर्जदाताओं ने अपने 99.97% पैसों का नुकसान उठाया है)।सुभाष चंद्रा और उनके एस्सेल ग्रुप की कंपनियों पर पिछले कुछ वर्षों से भारी कर्ज का बोझ था। कर्ज चुकाने में असमर्थता के कारण मामला NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में पहुंचा था। रिपोर्ट के अनुसार, NCLT ने अब 22,006 करोड़ रुपये की भारी-भरकम देनदारी को सेटल करने के लिए चंद्रा द्वारा पेश किए गए मात्र 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान प्रस्ताव (Payout plan) के अपनी कानूनी मंजूरी दे दी है।
NCLT के तीसरे सदस्य (न्यायिक) नीलेश शर्मा ने अपना निर्णायक फैसला सुनाते हुए इस रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) को मंजूरी दे दी है। दरअसल, सितंबर 2025 में दो सदस्यीय बेंच के बीच मतभेद (Split Verdict) के बाद फरवरी 2026 में यह मामला उन्हें सौंपा गया था, जिस पर फैसला देते हुए शर्मा ने इस योजना पर अंतिम मुहर लगा दी। इससे पहले नवंबर 2024 में ही लेनदारों (Creditors) ने 80.814% बहुमत के साथ इस प्लान को पास कर दिया था, जो IBC के नियमों के तहत जरूरी 75% से अधिक है। LIC हाउसिंग, HDFC, एक्सिस, केनरा और यूनियन बैंक समेत कुछ अन्य कर्जदाताओं ने इसका विरोध जरूर किया था, लेकिन कुल वोटिंग में उनकी हिस्सेदारी 20% से भी कम होने के कारण प्लान को आसानी से अंतिम मंजूरी मिल गई।
99.97% हेयरकट का मतलब क्या है
बैंकिंग और फाइनेंस की भाषा में ‘हेयरकट’ (Haircut) का मतलब उस रकम से होता है, जिसे बैंक या कर्जदाता डूबत खाते में मानकर छोड़ने (माफ करने) को तैयार हो जाते हैं ताकि उन्हें कम से कम कुछ पैसा वापस मिल सके।इस मामले में 99.97% के हेयरकट का सीधा मतलब यह है कि जिन वित्तीय संस्थानों या कर्जदाताओं ने सुभाष चंद्रा/एस्सेल ग्रुप को पैसा दिया था, उन्हें अपने हर 100 रुपये के बदले सिर्फ 3 पैसे (0.03%) वापस मिले हैं और बाकी 99.97 रुपये पूरी तरह डूब गए हैं।
बहुमत का फैसला: कानून के मुताबिक, कर्ज समाधान के लिए लेनदारों की सहमति जरूरी होती है. विरोध करने वाले बैंकों के पास केवल 20% से कम वोटिंग राइट्स थे, जबकि सुभाष चंद्रा के इस रीपेमेंट प्लान को 80.81% वोटिंग शेयर का भारी समर्थन हासिल था.
संपत्ति की कमी: 144 पन्नों के अपने आदेश में जज नीलेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी (रेज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल) की रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष चंद्रा के पास मौजूद निजी संपत्तियों की कीमत इस रीपेमेंट प्लान में दी जा रही रकम से भी बहुत कम है. ऐसे में अगर इस प्लान को खारिज भी कर दिया जाता, तो भी विरोध करने वाले बैंकों को कोई बड़ी रकम मिलने की उम्मीद नहीं थी.
सभी बैंकों पर लागू होगा फैसला
NCLT ने साफ किया है कि उसका काम बैंकों के व्यावसायिक फैसलों में दखल देना नहीं, बल्कि कानूनी निगरानी करना है. IBC की धारा 115 के तहत, एक बार प्लान मंजूर होने के बाद यह उन सभी बैंकों पर भी पूरी तरह लागू होगा जिन्होंने इसके खिलाफ वोट किया था. अब यह मामला अंतिम औपचारिक आदेश के लिए वापस मूल दो सदस्यीय बेंच के पास जाएगा.
विजय माल्या का फूटा गुस्सा
इस हैरान करने वाले समझौते पर भारत से भागे कारोबारी विजय माल्या ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तंज कसा है. माल्या ने ट्वीट करते हुए लिखा
“अगर यह खबर सच है, तो मेरे दोस्त सुभाष को बहुत-बहुत बधाई. बैंकों और सरकार ने खुद माना है कि उन्होंने मुझसे 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं. वहीं दूसरी तरफ कई बड़े कर्जदारों का मामला महज कुछ रुपयों में रफा-दफा हो जाता है. मुझे लगता है कि भारत में कर्ज के इंसाफ का यही नया तरीका है. अब इस पर मीडिया कोई सवाल नहीं उठाएगा.”बता दें कि विजय माल्या साल 2016 में किंगफिशर एयरलाइंस का लोन न चुकाने के बाद भारत छोड़कर लंदन भाग गए थे, जहां से भारत सरकार आज भी उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस महासचिव ने साधा निशाना
कांग्रेस ने सुभाष चंद्रा के मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मंजूर पुनर्भुगतान योजना को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये मिलना ‘‘सिर्फ हेयरकट नहीं, बल्कि मुंडन’’ है और इससे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 का मजाक बनता है.कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वित्तीय शब्दावली में जब लेनदारों को बकाया रकम का केवल एक हिस्सा मिलता है तो अंतर को प्रतिशत के रूप में ‘हेयरकट’ कहा जाता है.उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने अभी एक जाने-माने कारोबारी की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे.’’कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘यह सिर्फ हेयरकट नहीं है. यह वास्तव में मुंडन है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का पूरा मजाक बनाता है.’’
मेरी छवि खराब करने की हो रही कोशिश… डॉ.सुभाष चंद्रा
एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के चेयरमैन डॉ.सुभाष चंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में लोन सेटलमेंट के मामले को लेकर फिर से अपना पक्ष रखा है. डॉ. चंद्रा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और CMD मुकेश अंबानी के नेटवर्क पर Zee को लेकर गलत अफवाह फैलाने का आरोप लगाया है. एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन ने एक बार फिर से साफ किया कि उन्होंने एक भी रुपये का कर्ज नहीं लिया है. वो सिर्फ पर्सनल गारंटर बने थे. अपने बयान में डॉ. चंद्रा ने 22000 करोड़ रुपये के लोन सेटलमेंट का पूरा सच भी बताया है. उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी एक खुली किताब है. लोन सेटलमेंट मामले को लेकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है.डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि हमने अपनी संपत्ति बेचकर देनदारी चुकायी है. कुछ लोग मेरी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मुकेश अंबानी ने Zee को हथियाने की कोशिश की है. Network 18 CNBC ने 22,000 करोड़ रुपये के लोन को लेकर झूठी बात फैलाई. इसे लेकर मैंने मुकेश अंबानी को फोन भी किया. वापस कॉल नहीं आने पर चिट्ठी भी लिखी.”डॉ. चंद्रा ने NCLT मामले में सामने आ रहे 22000 करोड़ रुपये के आंकड़े पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि वास्तविक क्लेम करीब 3,992 करोड़ रुपये का है. उन्होंने यह भी कहा कि 3,992 करोड़ रुपये के क्लेम की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए. डॉ. चंद्रा ने बताया कि करीब 620 करोड़ रुपये का क्लेम सेटल किया जा चुका है, जबकि लेंडर्स को 1,063 करोड़ रुपये के पेमेंट का ऑफर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह हर उस व्यक्ति और संस्था का पैसा चुकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जिसका पैसा देना है.
