चंडीगढ़: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। बीजेपी सार्वजनिक रूप से लगातार यह दावा कर रही है कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि सूत्रों की मानें तो दोनों के बीच अभी गठबंधन को लेकर बातचीत जारी। लेकिन दोनों पार्टियों के बीच मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अकाली की ओर से सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग उठ रही है, जबकि बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है। फिलहाल गठबंधन को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे और चुनावी क्षेत्रों पर भी बातचीत जारी है। ऐसे में सीएम फेस का मुद्दा दोनों पार्टियों के बीच सहमति की राह में एक और बड़ी चुनौती बन सकता है।
सीएम चेहरे पर फंसा पेच
गठबंधन की स्थिति में चुनाव के बाद नेतृत्व का फॉर्मूला भी चर्चा का अहम मुद्दा है। सूत्रों के मुताबिक, अगर दोनों दल अधिक सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो मुख्यमंत्री पद के लिए अकाली दल के चेहरे को आगे किए जाने की संभावना है। अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि बीजेपी के कुछ नेता इस बात को लेकर सहमत नहीं हैं कि चुनाव से पहले किसी एक नेता को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। बीजेपी के इस धड़े का मानना है कि पहले चुनावी प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाना चाहिए और परिणाम आने के बाद नेतृत्व पर फैसला किया जा सकता है। वहीं उपमुख्यमंत्री पद को लेकर भी दोनों दलों के बीच चर्चा होने की संभावना है।
अकाली दल इतनी सीटों की कर रहा डिमांड
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में एक प्रस्ताव के तहत अकाली दल को 70 और बीजेपी को 47 विधानसभा सीटें देने की चर्चा है। अकाली नेताओं का मानना है कि पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए अकाली दल को गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका मिलनी चाहिए। पार्टी खुद को पंजाब की ‘पंथिक पार्टी’ के तौर पर पेश करती रही है और उसका तर्क है कि राज्य की राजनीति में उसकी जमीनी पकड़ को देखते हुए उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
बीजेपी इस फॉर्मूल के लिए नहीं तैयार
हालांकि बीजेपी के भीतर एक धड़ा इस फॉर्मूले से पूरी तरह सहमत नहीं है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि सीटों का बंटवारा लगभग बराबर होना चाहिए। उनका तर्क है कि पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है और राज्य में उसका संगठन भी पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है। ऐसे में पार्टी को पुराने गठबंधन फॉर्मूले के मुकाबले अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
किस सीट पर कौन लड़ेगा इस पर भी हो सकता है टकराव
गठबंधन की राह में दूसरा बड़ा सवाल विधानसभा क्षेत्रों के बंटवारे का है। बीजेपी और अकाली के पुराने गठबंधन में दोनों पार्टियों के बीच सीटों का एक स्पष्ट पैटर्न रहा था। बीजेपी मुख्य रूप से शहरी और हिंदू बहुल इलाकों की सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि अकाली दल का फोकस ग्रामीण पंजाब और पंथिक प्रभाव वाले क्षेत्रों पर रहता था। पहले के गठबंधन में बीजेपी करीब 23 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि बाकी सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार मैदान में उतरते थे। हालांकि इस बार राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। बीजेपी का संगठन पहले की तुलना में मजबूत हुआ है और पार्टी राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा कर रही है। ऐसे में सीटों की पहचान और बंटवारा बातचीत का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
