जीवन के लिए पानी ‘अमृत’ समान है. यह लोगों की बुनियादी जरूरत है. शहरीकरण और औद्योगीकरण ने काफी हद तक इसकी गुणवत्ता को प्रभावित किया है. ग्राउंड वाटर लेवल भी साल दर साल नीचे जा रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 60 करोड़ लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं जबकि 16 करोड़ लोग गंदा पानी पी रहे हैं.
शुद्ध पानी के लिए सरकार करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. देश के करीब 9 राज्यों में पानी की गुणवत्ता खराब है. यहां नाइट्रेट, फ्लोराइड, क्रोमियम, मैंगनीज, आयरन, निकेल, कोबाल्ट जैसे तत्व मानक से अधिक पाए गए हैं. खराब पानी की वजह से काफी लोगों की मौत भी चुकी है. काफी लोग तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं.
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड(सीजीडब्ल्यूबी) ने वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 जारी की. इसमें देशभर में ग्राउंड वाटर क्वालिटी का पता लगाने के लिए 2023 को बेस ईयर मानकर कुल 15,259 सैंपल इकट्ठा किए गए. साल 2024 में 5 हजार 368 स्टेशनों से ये नमूने लिए गए. इनमें से कुछ मानसून से पहले जबकि कुछ मानसून के बाद के थे.
इनकी जांच अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन में दिए गए स्टैंडर्ड तरीकों से कराई गई. जांच के पीछे का मकसद पीने और खेती के लिए इस्तेमाल होने पानी की गुणवत्ता को अलग-अलग पैरामीटर पर परखना था. जांच में कई राज्यों के पेयजल शुद्ध पाए गए जबकि कई स्टेट में ये काफी प्रदूषित मिले.
शुद्ध पेयजल के मानक क्या हैं?, देश की कितनी आबादी दूषित पानी से परेशान है?, ग्राउंड वाटर लेवल साल दर साल नीचे क्यों जा रहा है?, विश्व के अन्य कौन से देश दूषित पेयजल का सामना कर रहे हैं. सरकार वाटर क्वालिटी को सुधारने के लिए क्या उपाय कर रही है?. ये जानने के लिए पढ़िए ईटीवी भारत की खास रिपोर्ट..
जांच में क्या निकला, किन राज्यों का पानी सबसे शुद्ध? : जांच में अरुणाचल, मिजोरम, मेघालय और जम्मू कश्मीर के 100% नमूने BIS (भारतीय मानक ब्यूरो ) के अनुरूप पाए गए. यानी यहां का पानी पूरी तरह शुद्ध है. लिहाजा ये पीने और फसलों की सिंचाई के लिए काफी उपयुक्त है. यहां के लोगों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को लेकर फिक्रमंद होने की जरूरत नहीं है.कम आबादी और कम औद्योगीकरण के कारण यहां पानी की गुणवत्ता ठीक है. इन राज्यों में इंडस्ट्रियल कचरे और शहरी प्रदूषण का दबाव कम है. मानसून में होने वाली ज्यादा बारिश सतह और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में मदद करती है. यहां सीमित खेती होती है. मतलब फर्टिलाइजर/पेस्टीसाइड का प्रयोग कम किया जाता है.किन राज्यों का पानी है खराब? : राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में नाइट्रेट मानक से अधिक पाया गया. लवणता (Salinity) भी ज्यादा मिली. पूर्वी राज्य यानी असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, सिक्किम आदि और उत्तर-पूर्वी राज्यों में आयरन, मैंगनीज और आर्सेनिक पाए गए हैं. कुल 9 राज्यों में पानी की गुणवत्ता खराब है. साफ पानी को लेकर ये प्रदेश हाई रिस्क पर माने गए हैं.
जांच में यह पता चला कि राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश दूषित पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यहां नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और खारेपन की मात्रा बहुत ज्यादा है. राजस्थान, हरियाणा और आंध्र प्रदेश के पानी में भी काफी गंदगी नजर आती है. पंजाब और गुजरात के भी हालात ठीक नहीं हैं.25% स्टेशन (जहां से नमून लिए गए थे) BIS के मानकों पर खरे नहीं उतरे. मतलब यहां पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई. सैंपलों की जांच में बड़ी चिंताएं सामने आईं. ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट, फ्लोराइड और EC (Electrical Conductivity) की मात्रा ज्यादा मिली. करीब 20.7% सैंपल में नाइट्रेट तय मानक से ज्यादा पाए गए. 8.05% सैंपल में फ्लोराइड का स्तर ज्यादा मिला.लगभग 20.7% सैंपल नाइट्रेट की तय लिमिट से ज्यादा थे, जबकि 8.05% सैंपल में फ्लोराइड का लेवल मानक से ज्यादा था. 7.23% सैंपल EC से दूषित पाए गए. राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में नेचुरल हाइड्रोकेमिकल प्रोसेस की वजह से क्लोराइड सांद्रता (Concentration) ज्यादा है.
पानी में किस तरह का मिला प्रदूषण?
नाइट्रेट : काफी सैंपलों की जांच में नाइट्रेट ज्यादा पाए गए. नाइट्रेट पानी में आसानी से घुलकर गंभीर जल प्रदूषण का कारण बनता है. यह खेती, सेप्टिक टैंकों आदि से रिसकर भूजल और सतही जल में मिल जाता है. इससे पानी विषैला हो जाता है. इसके पीछे का कारण कचरे का गलत तरीके से निपटारा है. इसके अलावा अन्य भी कई कारण हैं.
फ्लोराइड : जांच में यह पाया गया कि पानी में फ्लोराइड का ज्यादा होना कुदरती है. इसके लिए कोई खास वजह जिम्मेदार नहीं है. यह जमीन या रेत के नीचे स्थित क्रिस्टलीय व कठोर चट्टानों और पानी की परस्पर क्रिया से जुड़ा है.
इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC) : EC की मात्रा मानक से ज्यादा होने पर पानी खारा हो जाता है. सूखे और कम बारिश वाले राज्यों में यह ज्यादा देखने को मिलता है. राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में पानी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं.
इन धातुओं के कारण दूषित हो रहा पानी : पानी में आर्सेनिक का होना काफी समय से चिंता का विषय है. गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी जिन जमीनों से होकर गुजरती हैं, खास तौर पर वहां यह समस्या ज्यादा है. राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी कभी-कभार यूरेनियम मानक से ज्यादा पाए गए हैं.
असम, कर्नाटक, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों के पानी में गैंगनीज की मात्रा ज्यादा पाई गई है. वहीं पूरे देश में कॉपर का लेवल लगातार तय लिमिट के अंदर पाया गया.
बारिश से पानी की गुणवत्ता में आता है सुधार : मानसून सीजन में बारिश के दौरान कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा गया. जबकि कई जगहों पर क्वालिटी में गिरावट भी देखी गई. ऐसे में ग्राउंड वाटर के लिए कई राज्यों में बारिश फायदेफंद साबित होती है. जबकि कई जगहों पर नुकसान भी पहुंचाती है.
क्या फसलों की सिंचाई के लिए सही है पानी? : 98.9% सैंपल की जांच में SAR (Sodium Adsorption Ratio) 26 रिकॉर्ड किया गया. इससे साबित होता है कि काफी जगहों पर सिंचाई के लिए ग्राउंड वाटर की क्वालिटी काफी हद तक सही है. केवल 1.11% सैंपल में तय लिमिट से SAR ज्यादा पाए गए. सबसे ज्यादा SAR वैल्यू बिहार में (505 तक) पाया गया. इसी कड़ी में दिल्ली में 179.8 तक जबकि राजस्थान में 72.6 तक देखी गई, इससे पता चलता है कि यहां कई लोकल एरिया ऐसे हैं जहां सोडियम का खतरा ज्यादा है.
किन राज्यों के पानी में ज्यादा है RSC? : एकत्र किए गए सभी सैंपलों की जांच में यह पता चला है कि पूरे देश के 11.27% सैंपल में RSC (Residual Sodium Carbonate) की मात्रा (2.5 meq/L) ज्यादा है. कई राज्यों को सोडियम की अधिकता से परेशान होना पड़ सकता है. दिल्ली में 51.11%, उत्तराखंड में 41.94%, आंध्र प्रदेश में 26.87%, पंजाब में 24.60% और राजस्थान में 24.42% में तय लिमिट से ज्यादा RSC के मामले सामने आए, यह इन राज्यों के लिए चिंता की बात है.
हरियाणा में 15.54%, कर्नाटक में 13.32%, उत्तर प्रदेश में 13.65% और तेलंगाना में 11.76% में इसकी मात्रा ज्यादा देखने को मिली. इससे सोडियम और मिट्टी के खराब होने के खतरे की वजह से यहां का पानी सिंचाई के लिए सही नहीं है.
क्वालिटी खराब मिलने पर क्या कदम उठाए जाते हैं ? : पानी की गुणवत्ता खराब मिलने पर केंद्र सरकार के विभाग ICAR (Indian Council of Agricultural Research), DDWS (Department of Drinking Water and Sanitation), CPCB (Central Pollution Control Board), MOHUA (Ministry of Housing and Urban Affairs) और GSI (Geological Survey of India) की ओर से संबंधित राज्यों को अलर्ट किया जाता है. दो सप्ताह के अंतराल पर भी रिपोर्ट साझा की जाती है.
पानी में कौन से तत्व कितनी मात्रा में जरूरी? : पीने के पानी के लिए इंडियन स्टैंडर्ड (IS) 10500 को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने 1983 में पब्लिश किया था. समय के साथ इसमें कई बदलाव किए गए. सबसे नया परिवर्तन साल 2012 में किया गया. इसमें अमोनिया, क्लोरामाइन, बेरियम, मोलिब्डेनम, सिल्वर, सल्फाइड, निकल, पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल और ट्राइहैलोमीथेन जैसे टेस्ट के लिए और चीजें ऐड की गईं.
पानी के दूषित होने के क्या हैं कारण? : इंडस्ट्रियल कचरा, घरेलू सीवेज, प्लास्टिक और ठोस कचरा, तेल का रिसाव और समुद्री प्रदूषण, केमिकल और दवा का कचरा, शहरीकरण और कंस्ट्रक्शन का कचरा, धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाज से निकले कूड़े पानी में मिलकर उसे दूषित कर देते हैं. जागरूकता समेत अन्य तरीकों से इन पर रोक लगाकर पानी को प्रदूषित होने से रोका जा सकता है.
क्यों कम होता जा रहा ग्राउंड वाटर लेवल? : भारत में ग्राउंड वाटर लेवल कई वजहों से लगातार कम हो रहा है. सिंचाई के लिए ज्यादा पानी निकालना भी इनमें से एक है. पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में धान और गन्ने जैसी फसलों की सिंचाई के लिए जमीन से ज्यादा पानी निकाला जाता है. दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में शहरी मांग बढ़ रही है. यहां तेजी से कंस्ट्रक्शन और पक्की सड़कों की वजह से भूजल प्राकृतिक रूप से रिचार्च नहीं हो पा रहा है.
इसके अलावा मौसम में बदलाव, अनियमित मानसून, देर से बारिश और सूखे की वजह से भी दिक्कत आ रही है. शहरी और इंडस्ट्रियल जोन के बढ़ने से जमीन तक पानी का रिसाव रुक जाता है. फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक प्रदूषण के कारण लोगों को गहरे कुएं खोदने पड़ते हैं. इससे तेजी से पानी खत्म हो रहा है.
कौन से शहर गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे? : मौजूदा समय करीब 30 शहर गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. WWF (World Wide Fund) के अनुसार साल 2050 तक यहां पानी काफी दूषित हो जाएगा. इन शहरों में जयपुर, इंदौर, कोलकाता, जालंधर, अहमदाबाद, पुणे, ठाणे, जबलपुर, धनबाद, वड़ोदरा, मुंबई, भोपाल, श्रीनगर, लखनऊ, ग्वालियर, राजकोट, हुबली-धारवाड़, सूरत, कोटा, नागपुर, दिल्ली, नासिक, चंडीगढ़, अलीगढ़, विशाखापट्टनम, अमृतसर, कोझिकोड, बेंगलुरु, लुधियाना, कन्नूर शामिल हैं.
5 राज्यों में पानी के प्रदूषित होने के कारण : उत्तर प्रदेश के पवित्र गंगा नदी में इंडस्ट्रियल गंदगी, बिना ट्रीट किया हुआ घरेलू सीवेज और खेती से निकला पानी मिलकर उसे दूषित बना रहा है. कई जगहों पर पेयजल के दूषित होने का भी यही कारण है. महाराष्ट्र में मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी की वजह से मीठी और गोदावरी नदियों में प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है. इसी तरह दिल्ली में बार-बार सफाई के बावजूद यमुना नदी बहुत ज्यादा गंदी है.
इसमें बिना ट्रीट किए सीवेज और शहरों से निकलने वाला गंदा पानी पहुंचता है. भारत के बड़े इंडस्ट्रियल पावर हाउस में से एक गुजरात भी खराब पानी की चुनौतियों का सामना कर रहा है. फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल क्लस्टर से निकलने वाला केमिकल कचरा, टेक्सटाइल डाई और हेवी मेटल सतही और ग्राउंड वाटर सोर्स में पहुंच रहे हैं. पंजाब में खेती से निकलने वाला फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का बहाव पानी को दूषित कर रहा है. छोटी इंडस्ट्रीज से निकलने वाला गंदे पानी ने ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट का लेवल बढ़ा दिया है.
कितनी आबादी खराब पानी की समस्या से जूझ रही? : भारत की अभी की आबादी लगभग 142.59 करोड़ है. 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खराब पानी की समस्या का सामना कर रहा है. देश के करीब 60 करोड़ लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है. जबकि 16 करोड़ लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. मौजूदा समय में लगभग 70% पानी के सोर्स खराब हैं.
26 शहरों में गंदे पानी से बीमार पड़े हजारों लोग : करीब 20 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे पानी के संपर्क में हैं जिनमें आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे केमिकल मानक से ज्यादा हैं. जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच 26 शहरों में सीवेज का गंदा पानी नल में मिल गया. इसकी वजह से करीब 5500 लोग बीमार पड़ गए. 3.77 करोड़ लोग हर साल पानी से होने वाली बीमारियों से प्रभावित होते हैं.
दिल्ली, पटना और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में 40 साल पुराने पाइपों का सीवेज में मिलना सिर्फ मानसून की समस्या नहीं है, बल्कि यह साल भर की समस्या है.
हर साल होती है 2 लाख लोगों की मौत : नीति आयोग की साल 2018 की रिपोर्ट के अनुसार साफ पानी की कमी से हर साल देश में लगभग 2 लाख लोगों की मौत होती है. मौजूदा माइक्रोबायोलॉजी स्टडीज के अनुसार यह देखा गया कि एक्यूट डायरिया डिजीज (ADD), टाइफाइड, हैजा, हेपेटाइटिस और शिगेलोसिस भारत में पानी से होने वाली आम बीमारियां हैं. इनसे 2014 और 2018 के बीच लगभग 11,728 मौतें हुईं. इनमें 10,738 मौतें 2017 के बाद की हैं.
गंदे पानी से होने वाली बीमारियों पर एक नजर : गंदे पानी से हैजा, डायरिया, पेचिश, हेपेटाइटिस A, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं. खराब पानी पीने या मछली समेत झींगा, केकड़ा आदि खाने से माइक्रोप्लास्टिक भी शरीर के अंदर पहुंच जाता है.
2020 की एक स्टडी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इंसान हर सप्ताह करीब 0.1 से 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक खा लेता है. इसी तरह आर्सेनिक मिले पानी से हाइपरटेंशन, कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम और लीवर प्रभावित होते हैं.
लंबे समय तक आर्सेनिक के संपर्क में रहने पर स्किन में हाइपरकेराटोसिस, हाइपरपिग्मेंटेशन और हाइपोपिग्मेंटेशन जैसे रोग लग जाते हैं. तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है. WHO के मुताबिक हर साल दुनिया में लगभग 14 लाख लोग खराब सफाई, खराब हाइजीन या खराब पीने पीने से मर जाते हैं.
शुद्ध पेयजल पर कितना खर्च कर रही सरकार? : लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. जल जीवन मिशन (हर घर जल) के तहत अब 81% ज्यादा ग्रामीणों के घरों में साफ पानी पहुंच रहा है. 22 अक्टूबर 2025 तक 15.72 करोड़ से ज्यादा लोगों को घरेलू नलों से साफ पानी मिला.
मिशन के तहत सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2,08,652 करोड़ दिए. इसकी ज्यादातर रकम का इस्तेमाल हो चुका है. इसके अलावा ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ाने, पानी को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए अन्य तरीके से भी काफी रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
वाटर क्वालिटी में क्या है दुनिया के अन्य देशों की रैंकिंग? : भारत के अलावा दुनिया के अन्य भी कई देश दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. चाड, केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य, लिसोटो समेत कई देशों के लोगों को खराब गुणवत्ता वाले पेयजल का सामना करना पड़ रहा है. यहां भी दूषित पानी से कई तरह की बीमारियां हो रहीं हैं. जबकि फिनलैंड, जर्मनी समेत कई देशों का पानी उच्च गुणवत्ता वाला है. दूषित पानी के मामले में दुनिया में भारत की रैंक 144 है, जबकि स्कोर 25.5 है.
