संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ 1 मिनट चली, जबकि राज्यसभा करीब 1 घंटे चली।लोकसभा में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूरी कैबिनेट और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे। स्पीकर ओम बिड़ला ने वंदे मातरम गान के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।वहीं, राज्यसभा में आखिरी दिन MMDR संशोधन बिल पास हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद हुए शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया।इधर, विपक्षी सांसद संसद के बाहर बंदर का खिलोना लेकर पहुंचे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त को इसका आखिरी दिन था. आज के अंतिम दिन भी संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला. हालांकि पहले सरकार ने कहा था कि, यदि विपक्ष सदन को ऑर्डर में आने देगा तो गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं. मगर गुरुवार को भी सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिससे लोकसभा की कार्यवाही बाधित हुई.मगर महत्वपूर्ण बात ये रही कि, विपक्ष ने कहा कि ये मुद्दा अगले शीतकालीन काल तक भी वो उठाते रहेंगे. गुरुवार को संसद की शुरुआत होते ही मकर द्वार पर दोनों पक्षों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए. विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और प्लेकार्ड लेकर गृह मंत्री अमित शाह से माफी और जवाबदेही की मांग की. यहां तक की विपक्ष के सांसद संसद परिसर में बंदर की रेप्लिका वाले खिलौने लेकर आए थे और सत्तापक्ष और गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.
भाजपा सांसदों ने झारखंड में चल रहे प्रदर्शनों पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर भी धरना प्रदर्शन किया. वहीं, प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने चोर चोर तक के नारे लगाए. वहीं, लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही वंदे मातरम् गाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे. इसके तुरंत बाद विपक्ष के नारेबाजी के बीच स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. वहीं, राज्यसभा में भी हंगामा जारी रहा.वहां हल्द्वानी रैली के बाद ‘शुद्धीकरण’ के मुद्दे पर भी विवाद हुआ. विपक्ष (इंडिया गठबंधन) पूरे सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई (लाठीचार्ज, टियर गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप) को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से बयान और जवाबदेही की मांग पर अड़ा रहा. विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जवाब चाहता था. अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर भी चर्चा की मांग की गई. हालांकि, बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव भी रखा था और कहा था कि वे सभी सवालों के जवाब देने को तैयार हैं.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी समय बढ़ाने की पेशकश की. लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे ‘लेक्चर’ बताते हुए खारिज कर दिया.उन्होंने कहा कि, युवा पीढ़ी यह जानना चाहती है कि छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश किसने दिया. अगर अमित शाह ने आदेश दिया तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए, और अगर नहीं दिया तो अक्षमता के लिए इस्तीफा देना चाहिए.पूरे सत्र का यदि सार देखें तो पूरे मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण लोकसभा में प्रश्नकाल लगभग नहीं हो सका. कई बिल बिना चर्चा के पारित किए गए. सरकार के अनुसार करीब 10 से 12 बिल पास हुए, जिनमें पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल, माइनस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल, केरल नाम परिवर्तन बिल और एनसीडीसी अमेंडमेंट बिल शामिल हैं.विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बिना बहस के कानून पारित कर रही है. सत्र के दौरान संसद परिसर और बाहर भी प्रदर्शन होते रहे. विपक्षी सांसदों ने ‘क्षमा मांगो’, ‘लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया’ जैसे नारे लगाए.
वहीं विपक्ष का ऐलान रहा कि सर्दियों के सत्र तक मांगें जारी रहेंगी. सत्र समाप्त होने के बावजूद विपक्ष ने साफ कहा है कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा. विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया कि छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और अन्य मुद्दों पर वे सर्दियों के सत्र तक भी दबाव बनाए रखेंगे. कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि, सरकार की हठधर्मिता के कारण संसद का कामकाज प्रभावित हुआ. वे अगले सत्र में भी इन मुद्दों को उठाएंगे. उन्होंने कहा कि ये पहली सरकार ऐसी है जो किसी मुद्दे पर चर्चा को राजी नहीं है. विपक्ष की बिल्कुल नहीं सुनी गई और बिल पारित करा लिए गए.वहीं, सरकार की तरफ से कहा गया कि वह चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष बहस से भाग रहा है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने निराशा जताई और कहा कि अगले सत्र में बेहतर उत्पादकता की उम्मीद है. इस तरह हंगामे और गतिरोध के बीच संसद का मानसून सत्र 2026 समाप्त हो गया. अब नजरें सर्दियों के सत्र पर हैं, जहां विपक्ष अपनी मांगों को लेकर फिर से सक्रिय रहने वाला है.
लोकसभा में 114 घंटे में से 96 घंटे काम नहीं हुआ
मानसून सत्र में लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। सदन की सामान्य बैठक सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होती है। दोपहर 1 से 2 बजे तक लंच ब्रेक रहता है। यानी एक दिन में करीब 6 घंटे कार्यवाही का समय होता है।इस हिसाब से 19 बैठकों में करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन यह करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चली। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट कम कार्यवाही हुई।वहीं, 2025 का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक चला था। इसमें लोकसभा और राज्यसभा की 21-21 बैठकें हुईं। लोकसभा में सिर्फ 37 घंटे काम हुआ था।
राज्यसभा में 114 घंटे में से 76 घंटे 34 मिनट काम नहीं हुआ
मानसून सत्र में राज्यसभा की बैठकें भी लोकसभा के बराबर रहीं और 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन राज्यसभा में लगभग 37 घंटे 24 मिनट काम हुआ। यानी करीब 76 घंटे 36 मिनट कम कार्यवाही हुई।
मानसून सत्र में 12 नए बिल पेश, 11 दोनों सदनों में पास
2026 के मानसून सत्र में कुल 12 नए बिल पेश किए गए। इनमें 10 लोकसभा और 2 राज्यसभा में पेश हुए। लोकसभा में आए बिल टैक्स, बैंकिंग, खनन, ट्रिब्यूनल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, परीक्षा में नकल रोकने, केरल का नाम बदलने और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या जैसे मुद्दों से जुड़े हैं।माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल के राज्यसभा से पास होने के बाद अब 12 में से 11 बिल दोनों सदनों से पास हो चुके हैं। केवल भारतीय सांख्यिकी संस्थान बिल अभी दोनों सदनों से पास नहीं हुआ है। राज्यसभा में पेश किए गए दोनों बिल भी लोकसभा से पास हो चुके हैं।
संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया. इस दौरान लोकसभा में मात्र एक बिल पर ठीक से चर्चा हुई. अन्य बिलों पर बहस नहीं हो सकी और इसे हंगामे के बीच पारित कर दिया गया. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में “अनुचित तरीके से बाधा डालने” के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब सरकार चर्चा करना चाहती थी, तो विपक्ष बहस से “भाग” रहा था.संसद के दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद में चर्चा के स्तर से खुश नहीं है क्योंकि उत्पादकता बहुत कम रही है. उन्होंने कहा कि लोकसभा में उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत रही.उन्होंने कहा, “पहली बार हमने देखा है कि जब सरकार चर्चा करना चाहती थी, तो विपक्ष संसद में बहस से भाग रहा था. कार्यवाही में अनुचित तरीके से बाधा डालने के लिए पूरी तरह से कांग्रेस जिम्मेदार है.” मंत्री ने कहा कि सत्र के दौरान 12 बिल पास किए गए, लेकिन दुख की बात है कि केवल एक बिल पर ही दोनों सदनों में चर्चा हुई.कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, “सरकार शुरू से ही जरूरी कदम उठाने में नाकाम रही और न ही उसने विपक्ष को भरोसे में लिया. सदन तभी चल सकता है जब सत्ता पक्ष और विपक्ष बातचीत करें और मिलकर आगे बढ़ने का रास्ता निकालें. लेकिन, इस सत्र के दौरान सरकार ने बहुत ज़्यादा अड़ियल रवैया दिखाया. हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे सत्र के दौरान सदन में बिल्कुल नहीं आए. वे कहीं नजर नहीं आए. इससे क्या पता चलता है? इससे पता चलता है कि सदन उनके लिए कोई मायने नहीं रखता, और इसीलिए उन्होंने लगातार इसे नजरअंदाज किया.”
गतिरोध खत्म करने के लिए, सरकार ने सोमवार को नीट पेपर लीक और उससे जुड़े मुद्दों पर बहस और शाह के जवाब का प्रस्ताव रखा, लेकिन कांग्रेस ने इसे ठुकरा दिया. बुधवार को भी ऐसी ही कोशिश की गई, लेकिन वह नाकाम रही क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी ने फिर से प्रस्ताव को खारिज कर दिया.विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि युवा यह जानना चाहते हैं कि “प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन से गोली चलाने” का आदेश किसने दिया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में शाह की “कल्पनाओं और भाषण” को सुनने में दिलचस्पी नहीं रखता. गांधी ने कहा कि अगर शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था, तो वे दोषी हैं, और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो वे अक्षम हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, “दोनों ही मामलों में, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.”केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “मानसून सत्र के दौरान राहुल गांधी के बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की वजह से, उन बिलों के अलावा जो आखिरकार पास हुए, बाकी चर्चाएं और काम-काज नहीं हो पाए. सिर्फ एक व्यक्ति के अहंकार की वजह से पूरा सत्र पटरी से उतर गया. इसके पीछे घमंड के अलावा कोई और वजह नहीं थी. वे मांगें रखते हैं और जब वे मांगें मान ली जाती हैं, तो वे भाग जाते हैं. एक हफ़्ते पहले किरेन रिजिजू ने संसद में कहा था कि गृह मंत्री जवाब देंगे. फिर भी, उस भरोसे के बाद भी, उन्होंने इसे नहीं माना. कल जब खुद गृह मंत्री ने बात की, तब भी उन्होंने अपनी बात बदल दी और उनके इस्तीफे की मांग करने लगे. वे झारखंड क्यों नहीं जा रहे हैं?… आप अपने मंत्रियों को चेतावनी क्यों नहीं दे रहे हैं? राहुल गांधी चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देते हैं और अहंकारी हैं. वे चाहते हैं कि संसद ठीक उनकी मर्जी के मुताबिक चले और सरकार के संवैधानिक ढांचे की परवाह न करे.”
