पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने पेपर लीक की अफवाहों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. संसद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद सीएम मान ने मीडिया से बात की. उन्होंने साफ किया कि उनके साढे चार साल के कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ. मान ने पंजाबियों की मेहनत को बदनाम करने का आरोप सीधे तौर पर भाजपा पर लगाया. उनका कहना था कि राज्य में बिना किसी फरमाइश और रिश्वत के उनहत्तर हजार सरकारी नौकरियां दी गई हैं. सभी नौकरियां पूरी तरह से मेरिट के आधार पर बांटी गई हैं. उन्होंने राजनीतिक विरोधियों को पंजाब के युवाओं के भविष्य के साथ न खेलने की कड़ी चेतावनी दी है. यह मामला राजनीति में अब काफी तूल पकड़ रहा है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी उनकी इस दौरान खास मुलाकात हुई.
भगवंत मान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना चाहती है. इसी वजह से वह पंजाबियों की मेहनत पर लगातार सवाल उठा रही है. मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में कहा कि राजनीतिक लड़ाई सीधे तौर पर उनसे लड़ी जानी चाहिए. पंजाब के युवाओं की लगन को बदनाम करना किसी भी लिहाज से सही नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब में युवाओं को सिर्फ मेरिट पर नौकरी मिल रही है. इसके लिए ‘नो कैश और नो फरमाइश’ का नियम सख्ती से लागू किया गया है. राज्य सरकार ने अभी तक अड़सठ हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिया है. यह आंकड़ा अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है.
चीटिंग का मामला था, पेपर लीक नहीं
मुख्यमंत्री के मुताबिक बाहर मौजूद लोग हेडफोन के जरिए परीक्षार्थियों तक जवाब पहुंचा रहे थे. उन्होंने कहा कि यह संगठित नकल का मामला था, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया और रोक दिया गया. पेपर सफलता पूर्वक संपन्न हुआ, इसलिए इसे पेपर लीक नहीं कहा जाएगा. यह केवल चीटिंग का मामला था. पंजाब में पेपर लीक नहीं होता है.
68,855 दी गई नौकरी;भगवमत मान
मान ने कहा कि पंजाब में अब “नो कैश, नो फॉर मैश” पर काम होता है. यहां पर मेरिट के आधार पर काम किया जाता है. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अब तक 68,855 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं और एक भी भर्ती में किसी तरह की सिफारिश पर नहीं हुई है. एक रुपया किसी ने नहीं दिया है.भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार नकल और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ बिल्कुल सख्त है. उनका दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में अब भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिल रहे हैं.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर मुख्यमंत्री ने क्या जवाब दिया?
अकाली दल और कांग्रेस की तरफ से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जोर शोर से उठ रही थी. भगवंत मान ने इस मांग को पूरी तरह से बेतुका और निराधार करार दिया. उन्होंने बताया कि फार्मेसी का एग्जाम स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आता है. शिक्षा विभाग का इस परीक्षा से कोई सीधा लेना देना नहीं है. स्वास्थ्य मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी. मुख्यमंत्री ने अकाली दल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी कड़ा तंज कसा. उन्होंने कहा कि पंजाब में अब अकाली दल का कोई जनाधार नहीं बचा है. संसद के बाहर प्रदर्शन कर रही भाजपा को उन्होंने पहले दिल्ली का जंतर मंतर संभालने की नसीहत दी. विपक्ष को आम आदमी पार्टी की फिक्र छोड़कर पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.
