अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में श्री राम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट परिसर के मंदिरों के चढ़ावा चोरी में नामजद रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने बाद कार्रवाई के क्रम में गुरुवार को आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया और शुक्रवार को गिरफ्तारी की गई। मेडिकल जांच के बाद टिन्नू यादव को जेल भेज दिया गया। राम मंदिर के चढावा में कथित हेराफेरी मामले में रमाशंकर यादव टिन्नू को गिरफ्तार किया गया है। सबसे पहले पूछताछ के बाद टिन्नू को जेल भेज दिया गया। चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।जांच एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग लेवल पर जांच की जा रही है। इनमें टिन्नू यादव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि वह ट्रस्ट से जुड़े असरदार लोगों का करीबी बताया जाता है।
नामजद आरोपितों में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के अलावा ट्रस्ट कर्मी अनुकल्प मिश्र, उसका बहनोई लवकुश मिश्र, टिन्नू का भतीजा मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल व रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। संज्ञेय अपराध की धाराओं में दर्ज प्राथमिकी में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी चंपतराय, डा. अनिल मिश्र, गोपाल राव आदि के नाम नहीं हैं।FIR में गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें चोरी, क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट, चोरी की प्रॉपर्टी पर कब्जा और क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी शामिल हैं। लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आरोप साबित हो जाते हैं, तो अपराधियों को कड़ी सजा लो हो सकती है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब सिर्फ एक क्रिमिनल जांच नहीं बल्कि देश भर में एक विवादित मुद्दा बन गया है।राम मंदिर चढावा विवाद धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों लेवल पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में, SIT की अंतिम रिपोर्ट और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह तय होगा कि मामला सिर्फ कर्मचारियों तक ही सीमित रहेगा या जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचेगी।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद चर्चा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, कौन-कौन हैं इसके पदाधिकारी
राम नगरी अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के प्रकरण ने शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय के साथ सदस्य अनिल मिश्रा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। आइए जानते हैं क्या है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और कौन-कौन हैं इसके सदस्य।अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं। जिनमें संत, प्रतिष्ठित नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
15 सदस्यों की पूरी सूची
मुख्य और स्थायी सदस्य (संत व नागरिक)
- महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज (अध्यक्ष)- अयोध्या के प्रतिष्ठित संत और राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख, जिन्हें ट्रस्ट की पहली बैठक में अध्यक्ष चुना गया।
- चंपत राय (महासचिव): विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े प्रमुख रणनीतिकार।
- के. परासरन (संस्थापक ट्रस्टी): सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील जिन्होंने अदालत में रामलला विराजमान का पक्ष बेहद मजबूती से रखा। वे भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल भी रह चुके हैं।
- स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज (कोषाध्यक्ष): महाराष्ट्र के विख्यात आध्यात्मिक गुरु जो ट्रस्ट के वित्तीय और आर्थिक कार्यों की देखरेख करते हैं।
- जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज: प्रयागराज के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य।
- जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी स्थित प्रसिद्ध पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर।
- युगपुरुष परमानंद गिरी जी महाराज: हरिद्वार के अखंड आश्रम के प्रमुख और वेदांत के जाने-माने विद्वान।
- विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र: अयोध्या राजपरिवार के वंशज और रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य।
- डॉ. अनिल कुमार मिश्र: अयोध्या के रहने वाले होम्योपैथिक चिकित्सक, जो संघ (RSS) और मंदिर आंदोलन से दशकों से जुड़े हैं।
- कामेश्वर चौपाल: पटना के रहने वाले दलित समुदाय के सदस्य। इन्होंने ही 1989 के मंदिर शिलान्यास के दौरान पहली ईंट रखी थी।
- महंत दिनेंद्र दास जी: निर्मोही अखाड़े के प्रमुख प्रतिनिधि, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रस्ट में स्थान दिया गया।
- श्री कृष्णगोपाल जी / न्यासी बोर्ड से नामित सदस्य: ट्रस्ट के नियमों के अनुसार हिंदू आस्था से जुड़े विशिष्ट व्यक्ति।
पदेन प्रशासनिक सदस्य (Ex-Officio Members)
- नृपेंद्र मिश्र (भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष): प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव और वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, जिनके जिम्मे मंदिर निर्माण का तकनीकी और ढांचागत काम है।
- केंद्र सरकार के प्रतिनिधि: केंद्र सरकार से नामित एक आईएएस (IAS) अधिकारी (कम से कम संयुक्त सचिव स्तर के)।
- उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि: राज्य सरकार से नामित एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी (कम से कम सचिव स्तर के)।
अयोध्या के जिलाधिकारी (DM): पदेन सदस्य के रूप में अयोध्या के जिलाधिकारी भी इसमें शामिल होते हैं (यदि वे हिंदू हों, अन्यथा अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट)।
