हिंदूवादी नेता संतोष दुबे ने राम जन्म भूमि ट्रस्ट के सचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और चंपत के सहयोगी टिन्नू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए अयोध्या के थाने में तहरीर दी। इन सभी पर मंदिर में आने वाले चंदे के गबन का आरोप है।अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी अब पैसे से लेकर सोने–चांदी और अष्टधातु तक पहुंच गई है !! धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव, शहर, देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य, अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हैं। जबकि मिट्टी की ेवक पुरम में रखी हैं। सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था।संतोष दुबे वर्ष 1989 में इन शिलाओं की गणना करते थे। बाबरी तोड़ने के वक्त मलबे में दब गए थे। इसमें इनकी कई हड्डियां टूट गई थीं। लंबे वक्त तक VHP से जुड़े रहे।
आचार्य बोले- रामलला को चढ़ाया गया करोड़ों का हार और चरण पादुका कहां गायब हैं?
Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर कथित दान गबन मामले में आचार्य का बड़ा बयान। आरोप है कि करोड़ों का हार और कचरण पादुका मंदिर से गायब। जानें क्या है मामला…श्री राम मंदिर चढ़ावा मामले में आचार्य बोले- रामलला को चढ़ाया गया करोड़ों का हार और चरण पादुका कहां गायब हैं? Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या राम मंदिर कथित दान गबन मामले में आचार्य का बड़ा बयान। आरोप है कि करोड़ों का हार और कचरण पादुका मंदिर से गायब। जानें क्या है मामला…
Ayodhya Ram Mandir Case: अयोध्या राम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे में कथित गबन का मामला गहराता जा रहा है। मामले की जांच के लिए बनाई गईलगातार दूसरे दिन भी मंदिर पहुंची और करीब 7 घंटे तक जांच-पड़ताल की। जांच में अब तक ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों, पुजारियों और बैंक अधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इस बीच, आचार्य विनोद मिश्र के एक चौंकाने वाले बयान ने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।आचार्य विनोद मिश्र का दावा है कि उनके एक शिष्य ने जो जौनपुर के बड़े व्यापारी हैं, राम मंदिर बनने के बाद रामलला के लिए करोड़ों रुपये का एक हार और चरण पादुकाएं भेंट की थी। आचार्य का आरोप है कि यह कीमती सामान मंदिर के ही ‘टिन्नू’ नाम के एक आदमी ने बकायदा रसीद देकर लिया था, लेकिन इसे आज तक भगवान रामलला को नहीं चढ़ाया गया। जब आचार्य ने इस बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि चढ़ावे में मिलने वाले जेवर को बेंगलुरु भेजकर गला दिया जाता है और उसकी ईंट बनाकर रख ली जाती है। हालांकि, इस दावे में कितनी सच्चाई है, इसकी अभी जांच की जा रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के बड़े अधिकारी खुद अयोध्या पहुंचे हैं। टीम नेट्रस्ट के दफ्तर जाकर पूरी जांच की। इस दौरान जांच टीम ने ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से पूछताछ की और यह समझने की कोशिश की कि मंदिर में दान कैसे लिया जाता है और उसकी गिनती कैसे होती है। जांच को सही तरीके से करने के लिए पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। वहीं, जिन लोगों पर शक है, उन्हें ट्रस्ट के दफ्तर के बेसमेंट में रखकर पूछताछ की जा रही है और उनसे बरामद पैसों का हिसाब मांगा जा रहा है।
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ट्रस्ट के पूर्व अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पिछले 8 महीनों के सीसीटीवी फुटेज सिस्टम से डिलीट कर दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम सबूत CCTV फुटेज ही माना जा रहा है।यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर के खजाने पर विवाद हुआ है। इस ताजा विवाद ने दो साल पुराने एक और दबे हुए मामले को हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार, सावन के प्रसिद्ध झूला मेले के दौरान भगवान राम और उनके तीनों भाइयों को पहनाए जाने वाले पारंपरिक सोने के मुकुट अचानक गायब हो गए थे। जब त्योहार की तैयारी के समय पुजारियों ने वो मुकुट ढूंढे, तो वे नहीं मिले। कई महीनों की खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला था। अयोध्या राम मंदिर दान मामले में SIT गठन पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, कहा- संतों की जांच होगी, अफसरों की नहीं? श्री राम मंदिर चढ़ावा मामले में आचार्य बोले- रामलला को चढ़ाया गया करोड़ों का हार और चरण पादुका कहां गायब हैं?
सवालों के घेरे में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी
इस पूरे मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। मंदिर की व्यवस्थाओं, दानपात्रों की निगरानी और चढ़ावे की गिनती की जिम्मेदारी ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों पर थी। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियों का सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने के बाद अब तक ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारी करते थे चढ़ावे की गिनती
जांच में यह भी सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा था। आरोप है कि कर्मचारियों के चयन में ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका रही और कई कर्मचारी परिचितों या रिश्तेदारों के माध्यम से नियुक्त किए गए। सबसे बड़ी चूक यह रही कि चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियमित तलाशी, सत्यापन और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
12 से 18 हजार रुपए वेतन पर काम कर रहे कर्मचारी
सूत्रों का दावा है कि मंदिर में तैनात कई कर्मचारी मात्र 12 से 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रहे थे। इसके बावजूद वे दिन-रात मंदिर परिसर में मौजूद रहते थे। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस पूरे खेल में कुछ बैंककर्मियों या अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका तो नहीं रही।
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने चढ़ावे में चोरी और जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और यदि चढ़ावे में चोरी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल एसआईटी जांच जारी है। करोड़ों रुपये की नकदी, सोना-चांदी और बहुमूल्य आभूषणों के वास्तविक हिसाब-किताब का सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
