नई दिल्ली. तमिलनाडु की राजनीति में इस बार की कहानी किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की स्क्रिप्ट से भी ज्यादा रोमांचक हो गई है. वहां चुनाव सिर्फ ईवीएम की बटन दबाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी लहर में बदल गया जिसने दशकों पुराने किलों को ढहा दिया है. पर्दे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी नौजवानों के सुपरस्टार ‘थलापति विजय’ ने असल जिंदगी के चुनावी अखाड़े में वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना शायद बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों ने भी नहीं की थी.उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने चुनावी नतीजों में ऐसा धमाका किया है कि पूरा देश दंग है. शुरुआती आंकड़ों और रुझानों में TVK 110 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. यह सिर्फ एक अभिनेता की राजनीति में एंट्री नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की उस ‘द्रविड़ियन पॉलिटिक्स’ में एक नए युग की शुरुआत है, जो पिछले 50 सालों से सिर्फ दो नामों- DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती थी. विजय ने न सिर्फ इन दो दिग्गजों के बीच जगह बनाई है, बल्कि उन्हें पीछे छोड़कर रेस में सबसे आगे निकल गए हैं.ये कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है. विजय ने इसके लिए बड़ी खामोशी से जमीन तैयार की थी. उन्होंने सालों पहले अपना फैन क्लब ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) बनाया था. ये संगठन सिर्फ फिल्में प्रमोट नहीं करता था, बल्कि जमीन पर सामाजिक काम करता था. कोरोना काल में राशन बांटना हो, मेधावी छात्रों को सम्मानित करना हो या ब्लड डोनेशन कैंप लगाना हो- विजय के फैंस हर गांव और गली में सक्रिय थे. 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में जब विजय ने अपने फैंस को निर्दलीय लड़ने की इजाजत दी, तब उन्होंने कई सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. वो एक ‘ट्रायल रन’ था. आज जब TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी है, तो उसके पीछे वही कैडर है जो पिछले एक दशक से समाज सेवा के नाम पर राजनीतिक जमीन सींच रहा था.
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से दो ध्रुवों के बीच बंटी रही है. एक तरफ एमके स्टालिन की DMK है, जिसके पास सत्ता और मजबूत संगठन है. दूसरी तरफ जयललिता की विरासत वाली AIADMK है, जो फिलहाल नेतृत्व के संकट से जूझ रही है. विजय ने इसी खाली जगह को पहचाना. उन्होंने देखा कि राज्य का युवा अब ‘परिवारवाद’ और ‘पुरानी घिसी-पिटी राजनीति’ से ऊब चुका है.विजय ने खुद को ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में पेश किया. उन्होंने न तो द्रविड़ विचारधारा को पूरी तरह नकारा और न ही उसे पुराने ढर्रे पर अपनाया. उन्होंने इसे ‘अपडेटेड द्रविड़ियन मॉडल’ कहा. नतीजों से साफ है कि उन्होंने AIADMK के पारंपरिक वोट बैंक और DMK के युवा समर्थकों में बड़ी सेंध लगाई है. 110 सीटों का मतलब है कि अब तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसी परिवार के हाथ में नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स के हाथ में है जिसे जनता ने अपना ‘थलापति’ चुना है.
वोट बैंक की ‘सर्जरी’: विजय ने किसका गणित बिगाड़ा?
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा ‘वोट बैंक की सर्जरी’ की हो रही है. विजय ने किसी एक खास जाति या धर्म को नहीं साधा, बल्कि उन्होंने ‘प्रोफाइल बेस्ड’ वोटिंग करवाई है.युवा वोटर: 18 से 30 साल के मतदाता, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, उन्होंने विजय को एक ‘कूल’ और ‘ईमानदार’ विकल्प माना.
महिला वोटर: शराबबंदी के वादे और अपनी साफ-सुथरी निजी छवि की वजह से विजय ने महिलाओं का बड़ा वोट हासिल किया.
शहरी मिडिल क्लास: भ्रष्टाचार से परेशान शहरी वर्ग को लगा कि एक नया आदमी शायद सिस्टम बदल दे.
इन तीनों वर्गों के मिलने से जो कॉकटेल तैयार हुआ, उसने पुराने दलों के जातीय समीकरणों को ध्वस्त कर दिया. यह पहली बार है जब तमिलनाडु में ‘करिश्मा’ ने ‘कैडर’ को इतनी बुरी तरह मात दी है.
उदयनिधि बनाम विजय: विरासत और खुद की बनाई पहचान की टक्कर
तमिलनाडु की सियासत में ये लड़ाई ‘विरासत’ बनाम ‘संघर्ष’ की भी थी. एक तरफ मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन थे, जो सत्ता का चेहरा थे. दूसरी तरफ विजय थे, जिन्होंने जीरो से अपना साम्राज्य खड़ा किया था. उदयनिधि को जहां सत्ता का फायदा मिला, वहीं उन्हें ‘परिवारवाद’ के आरोपों का बोझ भी ढोना पड़ा.विजय ने अपनी रैलियों में बार-बार ये कहा कि वह किसी के बेटे या पोते होने की वजह से राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि जनता के प्यार की वजह से आए हैं. ये बात युवाओं को क्लिक कर गई. ‘सेल्फ-मेड सुपरस्टार’ की ये इमेज ‘पॉलिटिकल वारिस’ की छवि पर भारी पड़ गई.
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय अब राजनीति में भी इतिहास रचते नजर आ रहे हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों में उनकी पार्टी टीवीके लगातार बढ़त बनाए हुए है और राज्य की सत्ता तक पहुंच लगभग तय मानी जा रही है. बड़े पर्दे पर सालों तक जनता के दिलों पर राज करने वाले थलापति विजय अब असली राजनीति में भी लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुके हैं. यही वजह है कि विजय के घर से लेकर उनके समर्थकों तक जश्न का माहौल है. परिवार की खुशी, फैंस का जुनून और समर्थकों की भीड़ बता रही है कि यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक भावनात्मक लहर है. निर्देशक पिता की फिल्मी विरासत से शुरू हुआ यह सफर अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचता दिखाई दे रहा है और पूरा तमिलनाडु इस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा है.
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) के संस्थापक थलापति विजय की फैमिली ट्री न सिर्फ फिल्मी विरासत की मिसाल है, बल्कि सादगी, संघर्ष और पारिवारिक मूल्यों की भी. 22 जून 1974 को जोसेफ विजय चंद्रशेखर के रूप में जन्मे विजय आज एक्टर, सिंगर, प्रोड्यूसर और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं. उनका पूरा परिवार सिनेमा से गहरा जुड़ा रहा है, जो उनकी सफलता की नींव बना.विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर एक प्रसिद्ध तमिल फिल्म डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर हैं. उन्होंने 1970-80 के दशक में कई हिट फिल्में दीं. उन्होंने ही विजय को बाल कलाकार के रूप में इंट्रोड्यूस किया और बाद में 1992 की फिल्म ‘नालैया थीरपू’ से हीरो के रूप में लॉन्च किया. चंद्रशेखर ईसाई परिवार से हैं.विजय की मां शोभा चंद्रशेखर भी एक प्रतिभाशाली प्लेबैक सिंगर, म्यूजिक डायरेक्टर, स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर हैं. उन्होंने कई तमिल फिल्मों में गाने गाए और विजय की कई फिल्मों में खास भूमिका निभाई. शोभा हिंदू परिवार से हैं. इस अंतरधार्मिक विवाह ने परिवार को एक अनोखी पहचान दी. शोभा विजय की सबसे बड़ी समर्थक रहीं और आज भी उनके राजनीतिक सफर में सक्रिय हैं.विजय की एक छोटी बहन विद्या चंद्रशेखर थी, जो मात्र दो साल की उम्र में चल बसी. बहन की मौत ने छोटे विजय को गहरा सदमा पहुंचाया. पहले बातूनी और शरारती बच्चे विजय इस घटना के बाद शांत और अंतर्मुखी हो गए. विजय अपनी बहन की याद में अपनी प्रोडक्शन कंपनी का नाम वी.वी. प्रोडक्शंस (विद्या-विजय) रखा. उन्होंने बहन की स्मृति में कई सामाजिक कार्य भी किए.विजय का एक बड़ा भाई भी है, जिसका नाम वीएएस राघवेंद्र है. भाई राघवेंद्र ने फिल्मों से दूरी बनाते हुए प्राइवेट बिजनेस सेक्टर में बेहतर कैरियर बनाना पसंद किया और वह चर्चा से दूर जिंदगी बिताते हैं.
विजय ने 25 अगस्त 1999 को संगीता सोर्नलिंगम से शादी की. संगीता श्रीलंकाई तमिल मूल की हैं, जो लंदन में पली-बढ़ीं. वे एक व्यवसायी परिवार से हैं. दोनों की मुलाकात विजय की फिल्म ‘पूवे उनक्कागा’ देखने के बाद हुई थी. संगीता विजय की बड़ी फैन थीं. दोनों की शादी ईसाई और हिंदू रीति-रिवाजों से हुई. करीब 27 साल चली इस शादी में हाल ही में 2026 में तलाक के लिए अर्जी दी गई है.विजय-संगीता के दो बच्चे हैं. उनका बेटा जेसन संजय साल 2000 में पैदा हुआ. जेसन संजय ने फिल्म ‘सिग्मा’ से पहली बार डायरेक्टर बनने की तैयारी की है. मां- पिता के वीच हुए विवाद के बाद जेसन ने हाल ही में अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर मां के सरनेम का सपोर्ट करने का तरीका दिखाया है और उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने फेमस पिता को भी अनफॉलो कर दिया है.विजय-संगीता के बेटे के जन्म के 5 साल बाद घर में फिर किलकारियां गूंजी और साल 2005 में उनकी बेटी दिव्या शाशा का हुआ. उन्होंने फिल्म ‘थेरी’ (2016) में विजय की बेटी का किरदार निभाया था. वह आज बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और मीडिया की सुर्खियों से दूर रहती हैं.
फिल्मों में ब्लॉकबस्टर सफलता हासिल करने के बाद विजय ने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी TVK की शुरुआत की. इसके बाद से उनका परिवार भी लगातार चर्चा में रहने लगा. फैंस अब सिर्फ उनकी फिल्मों के साथ उनके निजी जीवन और परिवार से जुड़ी हर खबर में दिलचस्पी दिखाते हैं. एक तरफ विजय का परिवार फिल्म, संगीत और कला से जुड़ा रहा तो दूसरी तरफ अब राजनीति की नई पारी ने इस परिवार को नई पहचान दी है. यही वजह है कि थलापति विजय का फैमिली ट्री आज साउथ इंडिया ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.
