पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद 6:30 बजे से एग्जिट पोल आने लगेंगे. इसमें यह बताया जायेगा कि बंगाल में अगली सरकार किसकी बन सकती है. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस जीतकर लगातार चौथी बार सरकार बनायेगी कि वर्ष 2011 की तरह राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनेगी.
एग्जिट पोल 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान संपन्न होने के एक दिन बाद टुडेज चाणक्य ने एग्जिट पोल के नतीजे जारी कर दिए हैं। इसके अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा का दबदबा रहने का अनुमान है और 48% (±3%) वोट शेयर के साथ 192 सीटें (±11) मिल सकती हैं।वहीं, तृणमूल के पीछे रहने की उम्मीद है, जिसे 38% (±3%) वोट शेयर और लगभग 100 सीटें (±11) मिल सकती हैं। अन्य पार्टियों के हाशिए पर रहने की संभावना है, जिन्हें 14% (±3%) वोट शेयर और लगभग 2 सीटें (±2) मिल सकती हैं।अब तक आए एग्जिट पोल के नतीजों में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए मिले-जुले परिणाम सामने आए हैं। छह में से चार में भारतीय जनता पार्टी को मामूली बढ़त के साथ जीत दिला रहे हैं, जबकि दो में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की बड़ी जीत का अनुमान लगा रहे हैं। 294 सदस्यों वाली बंगाल विधानसभा में 148 का आंकड़ा जादुई आंकड़ा माना जाता है।पुडुेचरी में एनडीए सरकार का अनुमानएक्सिस माय इंडिया ने केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एनडीए सरकार बरकरार रहने का अनुमान व्यक्त किया है। एक्सिस माय इंडिया ने बीजेपी के अगुवाई वाले गठबंधन को 16 से 20 और कांग्रेस के अगुवाई वाले अलायंस को 6 से 8 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया है। टीवीके समेत अन्य पार्टियों को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं।
असम में हिमंता की वापसी असम में फिर एक बार बीजेपी के अगुवाई में एनडीए सरकार का अनुमान व्यक्त किया गया है। Chanakya Strategies के एग्जिट पोल ने अपने नतीजों में कहा है कि बीजेपी को 88 से 98 और कांग्रेस को 22 से 32 सीटें मिल सकती हैं, जब अन्य के खाते में 03 से 5 सीटें जा सकती हैं।केरल के एक और एक्जिट पोल में कांग्रेस की सरकारी P-MARQ के एग्जिट पोल के अनुसार केरलम में कांग्रेस के अगुवाई वाले गठबंधन UDF की बन सकती है सरकार. एग्जिट पोल के मुताबिक UDF को 72-79 सीटें जबकि LDF को 62-69 सीटें मिल सकती हैं।तमिलनाडु में फिर से डीएमके की सरकार तमिलनाडु के लिए MATRIZE का एग्जिट पोल सामने आया है। इसमें डीएमके के गठबंधन को 122 से 132 सीटें और एआईएडीएमके को 87 से 100 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। अन्य के खाते में 10 से 18 सीटें जाने का अनुामन है। मैटराइज के अनुमान अगर सच होते हैं तो तो सीएम एम के स्टालिन की कुर्सी बरकरार रह सकती है।
2016 और 2011 में सही साबित हुए थे एग्जिट पोल
इससे पहले जानना दिलचस्प होगा कि एग्जिट पोल में अब तक किन एजेंसियों ने सबसे सटीक भविष्यवाणी की है. पिछले 3 चुनावों की बात करें, तो वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में सभी एजेंसियों के एग्जिट पोल फेल हो गये थे. हालांकि, इसके पहले वर्ष 2016 और वर्ष 2011 के चुनावों में एग्जिट पोल के नतीजे सबसे सही साबित हुए थे.
2021 में दिग्गज एजेंसियों के डाटा गड़बड़ाये
सबसे पहले बात करते हैं वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद आये एग्जिट पोल की. इस बहुचर्चित चुनाव में 5 एजेंसियों ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बहुमत या उसके करीब सीटें दी थीं. 5 एजेंसियों ने बहुमत से कम सीटें दीं थीं. 3 एजेंसियों ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने की भविष्यवाणी की थी.
इन एजेंसियों ने ममता को बताया था बहुमत के करीब
एबीपी-सी वोटर ने टीएमसी को 152-164, पी-मार्क ने 152-172, ईटीजी रिसर्च ने 164-176, इंडिया टुडे- एक्सिस माई इंडिया ने 130-156 और पोल स्ट्रैट ने 142-152 सीटें मिलने का अनुमान जताया था.
West Bengal Exit Poll: इन एजेंसियों ने बना दी थी भाजपा की सरकार
भारतीय जनता पार्टी को जिन सर्वे एजेंसियों ने बहुमत के करीब दिखाया था, उनके नाम रिपब्लिक-जन की बात, इंडिया टीवी-पीपुल्स पल्स और इंडिया न्यूज-जन की बात शामिल हैं. रिपब्लिक-जन की बात ने भाजपा को 162-185 सीटें मिलने का अनुमान जताया था. इंडिया टीवी-पीपुल्स पल्स ने 173-192 और इंडिया न्यूज-जन की बात ने 162-185 सीटें भाजपा को मिलने की बात कही थी.
चुनाव परिणाम में धराशायी हो गये सारे Exit Polls
चुनाव के परिणाम आये, तो तृणमूल कांग्रेस को जितनी सीटें मिलने का अनुमान सर्वे में जताया गया था, उससे कहीं ज्यादा सीटें मिलीं और 215 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ पार्टी ने सत्ता में वापसी की. ममता बनर्जी चुनाव हारने के बावजूद लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं. भारतीय जनता पार्टी 77 सीटों पर सिमट गयी. संयुक्त मोर्चा (वामदल, कांग्रेस और आईएसएफ के गठबंधन) को सिर्फ 1 सीट से संतोष करना पड़ा. यह सीट आईएसएफ के खाते में गयी. कांग्रेस और वामदलों का सूपड़ा साफ हो गया. टीएमसी-बीजेपी की जंग ने इन्हें शून्य पर समेट दिया.
2011 में सी-वोटर-रिडीफ का सर्वे सबसे सटीक
अब बात करें उन सर्वे एजेंसियों की, जिनका एग्जिट पोल सटीक साबित हुआ. वर्ष 2011 में सी-वोटर-रिडीफ के सर्वे में ममता बनर्जी की सरकार बनने की बात कही गयी थी. तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के गठबंधन को इस एजेंसी ने 184 से 192 के बीच सीटें मिलने का अनुमान जताया था. गठंधन को 184 सीटें मिलीं थीं.
2016 में न्यूज24-चाणक्या ने गाड़ा था झंडा
वर्ष 2016 के चुनाव में सबसे सटीक भविष्यवाणी न्यूज24-चाणक्या ने की थी. उस साल के चुनाव के बाद एग्जिट पोल में कहा गया था कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 210 सीटें जीत सकतीं हैं. पार्टी ने 211 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, भाजपा के लिए न्यूज24-चाणक्या ने 14 सीटें मिलने का अनुमान जताया था, लेकिन पार्टी को सिर्फ 3 सीट पर ही जीत मिल पायी. इस चुनाव में कांग्रेस को 44 और वामदलों को 32 सीटें ही मिल पायीं थीं.
एग्जिट पोल से जुड़े 5 सवाल और उनके जवाब
1. एग्जिट पोल क्या होता है?
जवाब: चुनाव के दौरान दो तरह के सर्वे किए जाते हैं। इसमें ओपिनियन पोल में उस चुनाव क्षेत्र के किसी भी व्यक्ति से अलग-अलग सवालों के जरिए सर्वे किया जाता है। ओपिनियल पोल वोटिंग से पहले किया जाता है।
जबकि एग्जिट पोल में स्पेसिफिकली वोट देकर बाहर निकले व्यक्ति से ये जाना जाता है कि उसने किसे वोट दिया है। इसमें शामिल शख्स का मतदाता होना जरूरी है। आम तौर पर एग्जिट पोल के नतीजे आखिरी फेज की वोटिंग खत्म होने के एक घंटे बाद जारी किए जाते हैं।
2. एग्जिट पोल की शुरुआत कब और कैसे हुई?
जवाब: चुनावी सर्वे की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई। 1930 में जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए ये सर्वे किया था।
एग्जिट पोल की शुरुआत काफी बाद में हुई। टाइम मैगजीन के मुताबिक 1967 में पहली बार दुनिया में बड़े स्तर पर कोई एग्जिट पोल किया गया था। अमेरिका के पॉलिटिकल रिसर्चर वॉरेन मिटोफस्की ने केंटुकी राज्य में होने वाले गवर्नर चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया था। दुनिया में पहली बार किस मीडिया कंपनी ने ये तरीका अपनाया, इसकी सटीक जानकारी नहीं है।
3. भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत कब हुई?
जवाब: भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन (IIPU) के तत्कालीन प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की थी।
1980 के दशक में भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर एग्जिट पोल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रणय रॉय और यूके के पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेविड बटलर ने मिलकर काम किया। 1996 में सरकारी चैनल दूरदर्शन ने CSDS के साथ मिलकर पहली बार एग्जिट पोल जारी किए।
4. भारत में एग्जिट पोल को लेकर क्या कानून और नियम हैं?
जवाब: एग्जिट पोल का मामला अलग-अलग वजहों से तीन बार सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट- 1951 के सेक्शन 126A के मुताबिक मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल जारी किया जा सकता है।
अगर कोई कंपनी या व्यक्ति मतदान खत्म होने से पहले एग्जिट पोल जारी करता है तो उसे अपराध माना जाएगा। ऐसा करने वाले को दो साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों हो सकता है।
5. कौन-से फैक्टर्स तय करते हैं कि एग्जिट पोल कितना सटीक होगा?
जवाब: एग्जिट पोल कितना स्टीक है, ये 3 मुख्य फैक्टर पर निर्भर करता है…
1. सैंपल साइज: जिस एग्जिट पोल का सैंपल साइज जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही ज्यादा एक्यूरेट माना जाता है। मतलब ये हुआ कि सर्वे में जितना ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क किया जाए, उतना ज्यादा अच्छा है।
2. सर्वे में पूछे जाने वाले सवाल: सैंपल सर्वे में पूछा गए सवाल जितना न्यूट्रल होगा, एग्जिट पोल का रिजल्ट भी उतना ही सटीक होगा।
3. सर्वे का रेंज: सर्वे का दायरा जितना बड़ा होगा, रिजल्ट एक्यूरेट होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। मान लीजिए किसी विधानसभा में सिर्फ दो या तीन पोलिंग बूथ से सैंपल लिए जाते हैं, जहां किसी एक पार्टी के उम्मीदवार की पकड़ है। इससे एग्जिट पोल के रिजल्ट पर असर पड़ सकता है।
