संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज तीसरा दिन है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा समाप्त. अविश्वास प्रस्ताव गिरा. संसद में कई सदस्यों ने सिलेंडर की किल्लत को लेकर भी सवाल उठाए.गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है. उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है. शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दावा करते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि ‘‘वह खुद बोलना नहीं चाहते.’’उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने विधेयकों पर चर्चा में भाग नहीं लिया. उन्होंने दावा किया कि वह (राहुल) पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान जर्मनी की यात्रा पर थे. शाह ने कहा, ‘‘जब-जब महत्वपूर्ण सत्र होता है, उनका विदेश दौरा होता है. जब आप विदेश में हैं तो आप कैसे बोलेंगे। यहां वीडियो कांफ्रेंस का प्रावधान नहीं है. अगर ऐसा प्रावधान होता तो उन्हें बोलने का मौका दे देते.’’
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष जब अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है. यह हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं के निर्वहन में बहुत अफसोसजनक घटना है.’’ शाह ने कहा, ‘‘लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है.’’उन्होंने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाया है. गृह मंत्री ने कहा, ‘‘जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं.’’
शाह ने कहा कि बजट सत्र के पिछले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैम्बर में ऐसा माहौल खड़ा किया गया कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई थी. उन्होंने कहा कि अगर सदन के नियमों के खिलाफ कोई बोलता है तो लोकसभा अध्यक्ष को उसे रोकने और बाहर निकालने का अधिकार है.उन्होंने कहा, ‘‘75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है. पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए सदन के अध्यक्ष संरक्षक होते हैं। इसलिए नियम बनाये गए हैं. यह सदन कोई मेला नहीं है. यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है.’’
गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जिन तौर-तरीके को सदन के नियम अनुमति नहीं देते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो.शाह ने कहा, ‘‘हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और राजग ने विपक्ष में रहते हुए कभी भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया. हमने अध्यक्ष पद की गरिमा को संरक्षित करने का काम किया है.’’उनका कहना था, ‘‘किसी के सलहाकार सामाजिक कार्यकर्ता हो सकते हैं, किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और कार्यकर्ता को सदन में इसके नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं.’’शाह ने कहा, ‘‘विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती… इसलिए वे छोटे होते जा रहे हैं.’’
जब बोलने का मौका मिलता है, तो राहुल जर्मनी, इंग्लैंड में नजर आते हैं’
“विपक्ष के नेता को शिकायत है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, उनकी आवाज़ दबाई जाती है. मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि कौन तय करेगा कि किसे बोलना है ? स्पीकर? नहीं, यह आपको तय करना है. लेकिन जब बोलने का मौका मिलता है, तो आप जर्मनी, इंग्लैंड में नज़र आते हैं. फिर वे शिकायत करते हैं… कांग्रेस सांसदों ने 18वीं लोकसभा में 157 घंटे और 55 मिनट तक बात की. विपक्ष के नेता ने कितना बोला? आप क्यों नहीं बोले? किस स्पीकर ने आपको रोका? कोई नहीं रोक सकता. लोकसभा को बदनाम करने के लिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है.”
पूरे शीतकालीन सत्र में उपस्थित नहीं रहे राहुल’
अमित शाह ने कहा, ”विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने अधिकारों की बात करते हैं। वे तो आरोप भी लगाते हैं। जो स्वयं उनके हाथ में है, उसका मैं परफॉर्मेंस बताना चाहता हूं। 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 51 प्रतिशत रही। राष्ट्रीय औसत 67 प्रतिशत था। 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52% और 15वीं लोकसभा में उपस्थिति 43% रही। यह सब ऑन रिकॉर्ड है। वो कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते, लेकिन मेरा कहना है कि वो बोलना नहीं चाहते। कई सारे महत्वपूर्ण-युगांतकारी विधेयक आए। जैसे- भूमि अधिग्रहण विधेयक- हिस्सा नहीं। संविधान का 122वां संशोधन विधेयक- हिस्सा नहीं। आधार प्रणाली विधेयक- हिस्सा नहीं। इसी तरह मुस्लिम महिला तलाक विधेयक, जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, अनुच्छेद 370 रद्द करने से जुड़ा विधेयक, सीएए विधेयक, महामारी रोग संशोधन विधेयक, भारतीय न्याय संहिता से जुड़े विधेयक, आयकर सुधार विधेयक, वित्त विधेयक 2024 और वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। इसी तरह पूरे शीतकालीन सत्र में उपस्थित नहीं रहे।”
शाह ने कहा- यह ‘रहस्यप्रद’ है…
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष पर चर्चा हो या और कैप्टन शुभ्रांशु शुक्ला का अभिनंदन प्रस्ताव हो, राहुल गांधी ने इनमें हिस्सा नहीं लिया। राहुल गांधी जी विपक्ष के माननीय नेता हैं। वे कांग्रेस के भी बड़े नेता हैं। हो सकता है कि अपनी पार्टी के प्रचार के लिए उन्हें देशभर में कहीं भी जाना पड़ता हो। कई बार सार्वजनिक जीवन में देखा जाता है कि लोकसभा के वक्त ही पार्टी के बड़े कार्यक्रम आ जाते हैं या चुनाव आ जाते हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को अपने पार्टी के विचार जनता को बताने और प्रचार करने के लिए जाना पड़ता है। यह स्वाभाविक है। सिर्फ राहुल जी के साथ ऐसा नहीं होता। अनेक नेताओं के साथ ऐसा होता है, लेकिन इसमें ‘रहस्यप्रद’ यह है कि (राहुल गांधी) यहां नहीं थे तो कहां थे?’
हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया’, बोले गृह मंत्री अमित शाह
“हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए. हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी करी है. किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं. मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है… इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं.” “पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए. तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे. लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं.”
हर बार हमें बोलने से रोक दिया जाता है: राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में बोलते कहा, “यहां चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्पीकर की भूमिका के बारे में है. कई बार मेरा नाम लिया गया है, और मेरे बारे में अजीब बातें कही गई हैं. यह सदन भारत के लोगों की अभिव्यक्ति है. यह किसी एक पार्टी को नहीं, बल्कि पूरे देश को रिप्रेजेंट करता है. हर बार जब हम बोलने के लिए उठते हैं, तो हमें बोलने से रोक दिया जाता है. पिछली बार जब मैंने बात की थी, तो मैंने हमारे प्रधानमंत्री द्वारा किए गए समझौतों के बारे में एक बुनियादी सवाल उठाया था…”
