सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर नोबेल कमेटी ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार मरिया कोरीना मचादो को “वेनेज़ुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण तरीक़े से तानाशाही के सामने लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने” के लिए दिया गया है.ग़ौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा का काफ़ी दिलचस्पी से इंतज़ार किया जा रहा था क्योंकि कई बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ख़ुद को इसका दावेदार घोषित कर चुके हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौक़ों पर कह चुके हैं कि उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में सैन्य संघर्षों को शांत करवाया है. हाल ही में ग़ज़ा में हमास और इसराइल के बीच पहले चरण के संघर्ष विराम की भी उन्होंने घोषणा की थी.मरिया कोरीना मचादो ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट करके इस पुरस्कार को वेनेज़ुएला की जनता और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया है.
उन्होंने लिखा, “सभी वेनेज़ुएला के लोगों के संघर्ष को यह मान्यता हमारे आज़ादी पाने के काम को पूरा करने के लिए प्रोत्साहन देगी.””हम आज पहले से कहीं अधिक विजय की दहलीज़ पर हैं. हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र हासिल करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिका के लोगों, लैटिन अमेरिका के लोगों और दुनिया के लोकतांत्रिक देशों पर अपने प्रमुख सहयोगियों के रूप में भरोसा करते हैं.”इसके साथ ही मरिया ने लिखा, “मैं यह पुरस्कार वेनेज़ुएला के पीड़ित लोगों और राष्ट्रपति ट्रंप को हमारे मुद्दे को लेकर उनके निर्णायक समर्थन के लिए समर्पित करती हूं.”मरिया कोरीना मचादो के इस पोस्ट को व्हाइट हाउस ने भी रीपोस्ट किया है.नोबेल कमिटी ने अपने बयान में कहा है कि 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार ऐसी “महिला को जा रहा है जिन्होंने गहराते अंधेरे के बीच लोकतंत्र की लौ को जलाए रखा है.”बयान में कहा गया है कि नोबेल शांति पुरस्कार हासिल कर रहीं मरिया कोरीना मचादो हालिया समय में लैटिन अमेरिका में साहस के सबसे “असाधारण उदाहरणों” में से एक हैं.कमिटी के चेयरमैन ने कहा कि मचादो एक महत्वपूर्ण शख़्सियत रही हैं.बयान में लिखा है, “भले ही हम असहमत हों लेकिन लोकप्रिय शासन के सिद्धांतों की रक्षा करने की हमारी इच्छा ही लोकतंत्र का मूल मंत्र है.””ऐसे समय में जब लोकतंत्र ख़तरे में हो हर किसी चीज़ से यह सबसे ज़रूरी हो जाता है कि उसकी रक्षा की जाए.”
कौन हैं मरिया?
मरिया कोरीना मचादो वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता हैं. बीते साल राष्ट्रपति चुनावों में उनके खड़े होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसकी दुनियाभर में निंदा हुई थी और कहा गया था कि यह चुनाव निष्पक्ष नहीं है.बीते साल काराकास में चुनाव में देखा था कि उनके उम्मीदवार एडमुंडो गोंज़ालिज़ की रैली में सड़कों पर भारी भीड़ थी.इसने निकोलस मादूरो की सरकार को चौंकन्ना कर दिया. मरिया देश के विपक्ष की ऐसी नेता हैं जिनमें सड़कों और मतदान केंद्रों पर पर हज़ारों लोगों की भीड़ इकट्ठा करने की क्षमता है.बीते साल के चुनाव के पोल्स बता रहे थे कि उनकी जीत तय है लेकिन निकोलस मादूरो ने तीसरी बार चुनाव जीत लिया. हालांकि कई पर्यवेक्षकों ने चुनावी अनियमितताओं को पाया था.एक मतदान केंद्र के बाहर जबरन लोगों को घंटों खड़ा रखा गया.चुनाव परिणामों के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन प्रशासन ने इन्हें कुचल दिया.मचादो इस समय कहां रह रही हैं, इसके बारे में किसी को पता नहीं है. जनवरी में मादूरो के शपथ ग्रहण समारोह के विरोध प्रदर्शन में वह नज़र आई थीं.उन्हें कुछ समय के लिए गिरफ़्तार किया गया था लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया.
लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की हस्ती
वेनेज़ुएला के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की एक हस्ती मचाडो, लैटिन अमेरिका में नागरिक साहस की एक सशक्त प्रतीक हैं। दशकों से उन्होंने निकोलस मादुरो के दमनकारी शासन का विरोध किया है, धमकियों, गिरफ्तारियों और राजनीतिक उत्पीड़न को सहन किया है।लगातार खतरे में रहने के बावजूद, वह वेनेज़ुएला में ही रहीं और शांतिपूर्ण प्रतिरोध और स्वतंत्र चुनावों पर अपने आग्रह के माध्यम से लाखों लोगों को प्रेरित किया। नोबेल समिति ने उन्हें एक समय में खंडित विपक्ष में एक एकीकृत शक्ति के रूप में वर्णित किया, जिनके नेतृत्व ने राजनीतिक विभाजनों के पार स्वयंसेवकों को संगठित करने में मदद की।
वेनेजुएला के चुनाव में निभाई अहम भूमिका
वेनेजुएला के विवादित 2024 के चुनाव के दौरान जब शासन ने उनकी उम्मीदवारी पर रोक लगा दी थी, मचाडो ने विपक्षी प्रतिनिधि एडमंडो गोंजालेज उरुतिया का समर्थन किया था। उन्होंने मतदान केंद्रों की निगरानी, मतगणना का दस्तावेजीकरण और चुनावी धोखाधड़ी का पर्दाफाश करने के लिए नागरिकों के नेतृत्व वाले प्रयासों की देखरेख की, जबकि सरकार असहमति को दबाने की कोशिश कर रही थी।समिति ने अपने बयान में कहा, “मारिया कोरिना मचाडो ने दिखाया है कि लोकतंत्र के साधन शांति के साधन भी हैं। वह एक अलग भविष्य की आशा का प्रतीक हैं, जहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाती है और उनकी आवाज सुनी जाती है।”मारिया वेंटे वेनेजुएला की राष्ट्रीय समन्वयक हैं, जिसकी उन्होंने 2013 में सह-स्थापना की थी। इसके साथ ही वह नेशनल असेंबली की पूर्व सदस्य भी रहीं। इसके साथ ही स्वतंत्र चुनावों को बढ़ावा देने वाले नागरिक समाज समूह सुमाते और लोकतांत्रिक परिवर्तन की वकालत करने वाले गठबंधन सोयवेनेज़ुएला की स्थापना में मदद की।अमेरिकी राज्यों के संगठन में मानवाधिकारों के हनन की निंदा करने के बाद 2014 में उन्हें संसद से निष्कासित कर दिया गया था। उन पर राजद्रोह और षड्यंत्र, यात्रा प्रतिबंध और राजनीतिक अयोग्यता के आरोप लगे हैं। मचाडो ने यूनिवर्सिडाड कैटोलिका आंद्रेस बेलो से औद्योगिक इंजीनियरिंग में डिग्री और IESA से वित्त विशेषज्ञता हासिल की है।
समाचार एजेंसी एएफ़पी को भेजे गए एक वीडियो में मचादो अपने उत्तराधिकारी एडमूंडो गोंज़ालेज़ से कहती दिख रही हैं, “मैं अचंभित हूं.!”गोंज़ालेज़ जवाब देते हैं, “हम खुशी से अचंभित हैं .”58 वर्षीय माचादो फ़िलहाल वेनेजुएला में छिपकर रह रही हैं.नोबेल कमिटी ने वह वीडियो जारी किया है जिसमें वो मचादो को सूचना दे रही है कि उन्होंने यह पुरस्कार जीता है.ये सूचना उन्हें इस ख़बर को सार्वजनिक करने से चंद मिनट पहले दी जा रही है.नोबेल इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टियन बर्ग हर्पविकेन ये ख़बर देते हुए भावुक हो जाते हैं. मचादो को ये ख़बर देते हुए उनकी आवाज़ भर्रा जाती है.मचादो का जवाब होता है, “ओह माय गॉड.” वह यह वाक्य पांच बार दोहराती हैं और फिर कहती हैं, “मेरे पास शब्द नहीं हैं.”मचादो कमिटी का धन्यवाद करती हैं और भावुक होकर कहती हैं कि यह “पूरे समाज की उपलब्धि” है.वह कहती हैं, “मैं तो बस एक व्यक्ति हूं. मैं निश्चित रूप से इस सम्मान की हकदार नहीं हूं.”मचादो कहती हैं कि उन्हें इस ख़बर पर यक़ीन करने में कुछ समय लगेगा और भावुक आवाज़ में एक बार फिर इस “सम्मान” के लिए धन्यवाद देती हैं.
नोबेल शांति कमिटी के चेयरमैन योर्गेन वाटने फ़्रीडनेस से डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा भी सवाल पूछा गया.उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप को पुरस्कार देने के लिए ख़ुद अमेरिकी राष्ट्रपति और दूसरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दबाव था और इस दबाव ने क्या कमिटी के विचार-विमर्श के काम को प्रभावित किया.इस सवाल पर फ़्रीडनेस ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार के ‘लंबे इतिहास’ के दौरान कमिटी ने अभियानों और ‘मीडिया टेंशन’ को देखा है और कमिटी को लोगों से हर साल हज़ारों पत्र मिलते हैं और वो बताते हैं कि ‘शांति के रास्ते के लिए उन्होंने क्या किया.’फ़्रीडनेस ने कहा, “हम अपना फ़ैसला काम पर और अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत के मुताबिक़ लेते हैं.”
