पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अब दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके में स्थित अभय चौटाला के फार्महाउस में रहेंगे। सोमवार शाम 6 बजे उन्होंने इस्तीफे के 42 दिन बाद उपराष्ट्रपति आवास छोड़ा।इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख अभय चौटाला ने दैनिक भास्कर को बताया कि हमारे परिवार के घनखड़ जी से पुराने रिश्ते हैं। हमने उनसे हमारे घर में रहने की अपील की, जो उन्होंने मान ली।धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मानसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से वे सार्वजनिक कहीं नजर नहीं आए। इस दौरान विपक्ष ने हाउस अरेस्ट जैसे कई आरोप लगाए।हालांकि सरकार ने इनसे इनकार किया। धनखड़ अब तक संसद भवन के पास उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रह रहे थे। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।
टाइप-8 बंगला मिलने तक फार्महाउस में रहेंगे
धनखड़ अभय चौटाला के फार्महाउस में तब तक रहेंगे, जब तक उन्हें टाइप-8 सरकारी बंगला आवंटित नहीं कर दिया जाता, जिसके वे पूर्व उपराष्ट्रपति होने के नाते हकदार हैं। धनखड़ के करीबी सूत्रों ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं, टेबल टेनिस खेल रहे हैं और योग का अभ्यास कर रहे हैं।नए उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर को होना है। इसमें एनडीए के महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन का मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी से है।
धनखड़ और चौटाला परिवार के बीच करीब 40 साल पुराना रिश्ता
धनखड़ और चौटाला परिवार के बीच करीब 40 साल पुराना रिश्ता है। 1989 में हरियाणा के बड़े जाट नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने राजस्थान के युवा वकील धनखड़ को फ्यूचर का लीडर कहा था। धनखड़ देवीलाल को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं।उसी दौर में दिल्ली के बोट क्लब पर देवीलाल के जन्मदिन पर विपक्षी रैली में धनखड़ ने 500 गाड़ियां राजस्थान से जुटाई थीं। इसके बाद 1989 लोकसभा चुनाव में देवीलाल ने धनखड़ को झुंझुनूं सीट से टिकट दिया। खुद प्रचार भी किया।चुनाव जीतने पर जब देवीलाल उपप्रधानमंत्री बने तो धनखड़ को भी सरकार में मंत्री पद मिला। हालांकि जब वीपी सिंह ने देवीलाल को मंत्रिमंडल से बाहर किया तो धनखड़ अकेले मंत्री थे जिन्होंने विरोध में इस्तीफा दिया।
पेंशन के लिए आवेदन
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 30 अगस्त को पूर्व विधायक के नाते मिलने वाली पेंशन के लिए राजस्थान विधानसभा सचिवालय में फिर से आवेदन किया है। धनखड़ 1993 से 1998 तक किशनगढ़ सीट से कांग्रेस के विधायक रहे थे। पूर्व विधायक के तौर पर उन्हें जुलाई 2019 तक पेंशन मिल रही थी। जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनने के बाद पेंशन बंद हो गई थी।जगदीप धनखड़ 1989 से 1991 तक झुंझुनू से जनता दल के सांसद रहे. इसके बाद 1993 से 1998 तक राजस्थान के किशनगढ़ से कांग्रेस के विधायक रहे. 2019 से 2022 तक वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे और 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति के पद पर कार्य किया. 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. बता दें कि राजस्थान में दोहरी और तिहरी पेंशन की व्यवस्था है यानी अगर कोई नेता सांसद और विधायक दोनों रह चुका हो तो उन्हें दोनों पदों की पेंशन पाने का अधिकार है. जगदीप धनखड़ को तीन अलग-अलग पदों के लिए पेंशन मिलेगी. राजस्थान में पूर्व विधायकों को 35,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है. लेकिन 70 साल से ज्यादा उम्र के विधायकों को 20% अतिरिक्त पेंशन दी जाती है. जगदीप धनखड़ की उम्र 74 साल है, इसलिए उन्हें 35,000 रुपये की बजाय 42,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी. पूर्व सांसद पेंशन के तौर पर उन्हें 45,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी. वहीं उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ को इस पद के लिए लगभग 2 लाख रुपये मासिक पेंशन मिलेगी. इस प्रकार उन्हें कुल 2,87,000 रुपये प्रति माह पेंशन के रूप में मिलेगा. इसके अलावा उन्हें अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी.
देश के पहले उपराष्ट्रपति जिनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था
देश में 72 साल के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में धनखड़ पहले ऐसे राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति रहे, जिनके खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। जो बाद में तकनीकी कारणों से खारिज हो गया था।विपक्ष धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाता रहा है। विपक्ष का दावा था कि वह सिर्फ विपक्ष की आवाज व उनके सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों को दबाते हैं।
उपराष्ट्रपति रहते धनखड़ के चर्चित बयान
- ममता बनर्जी पर: 2022 में कहा था- ममता सरकार एक खास वर्ग को ही मदद देती है, जबकि संविधान सबके साथ समान व्यवहार की बात करता है। जनवरी 2022 में बंगाल को लोकतंत्र का गैस चैंबर बताया था।
- कोर्ट पर: संविधान का ‘अनुच्छेद 142’ ऐसा परमाणु मिसाइल बन गया है जो लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ न्यायपालिका के पास 24 घंटे मौजूद रहता है।
- जज के घर कैश मिलने पर पर: अब समय आ गया है कि ‘कीड़ों से भरे डब्बे’ और ‘कंकालों से भरी अलमारी’ को सार्वजनिक किया जाए।
- ट्रम्प के दावे पर: दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो भारत को यह निर्देश दे सके कि उसे अपने मामलों को कैसे संभालना है।
- धर्मांतरण पर: देश में शुगर-कोटेड फिलॉसफी बेची जा रही है। सनातन विष नहीं फैलाता, सनातन स्व शक्तियों का संचार करता है।
- संविधान पर: किसी भी संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है। भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश की संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं हुआ। लेकिन भारत की प्रस्तावना को 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत बदल दिया गया, उसमें ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द जोड़ दिए गए। ये जोड़े गए शब्द नासूर हैं। ये उथल-पुथल पैदा करेंगे।
- कोचिंग सेंटर्स पर: कोचिंग सेंटर अब पोचिंग सेंटर बन चुके हैं। देशभर में अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो युवाओं के लिए गंभीर संकट बनते जा रहे हैं। इस बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित व दूषित नहीं होने दे सकते।
