पुणे, 22 अगस्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ शनिवार को संवाद के दौरान छात्राओं ने बताया कि यौन उत्पीड़न, व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर चिंता, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की कमी और आर्थिक परेशानियां अब भी महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता में बाधा बनी हुई हैं।‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में पालघर के वसई की अर्थशास्त्र की छात्रा सुचित्रा पागी ने 13 साल की उम्र में स्कूल से घर लौटते समय और बाद में सार्वजनिक परिवहन से यात्रा के दौरान छेड़खानी की घटनाओं को याद किया।पागी ने कहा कि इन अनुभवों से उनके मन में पुरुषों को लेकर डर पैदा हो गया, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब वे किसी महिला को परेशान होते देखें तो उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए।

पुणे में मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रहीं मैत्री ने कहा कि सुरक्षा को लेकर चिंताएं शिक्षा में बाधा बन सकती हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए।उन्होंने कहा कि गांवों में माता-पिता अक्सर सुरक्षा कारणों से अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजने में हिचकिचाते हैं और इसके बजाय बेटों को पढ़ाना पसंद कर सकते हैं।साइबर और डिजिटल साइंस की बीएससी की दूसरे वर्ष की छात्रा प्रज्ञा गावंडे ने साइबर सुरक्षा जैसे विशेष पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने में आने वाली आर्थिक बाधाओं को रेखांकित किया।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने देश की महिलाओं से समाज में बराबरी और न्याय का हक पाने के लिए पिंजरा तोड़ने का आहृवान करते हुए कि हमारी पितृसात्मक व्यवस्था लड़कियों को डराती और दबाती है। लड़कियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सामाजिक और व्यवस्थागत पाबंदियों का हवाला देते हुए कहा कि इस पुरूषवादी मानसिकता को खत्म करने के लिए महिलाओं को सबसे पहले अपने दिल से डर को जल्द से जल्द निकालना चाहिए।देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, काम के असवरों से लेकर सामाजिक भेदभाव के खराब आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की महिलाओं के बारे में उनके पुरूषवादी सोच को लेकर उन पर हमला भी बोला।
मनुस्मृति को लेकर क्या बोले राहुल?
वहीं मनुस्मृति की महिलाओं के संदर्भ में संर्कीण दृष्टि को भी शर्मनाक बताते हुए इसे खारिज किया। राहुल गांधी ने पुणे में कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुटी छात्राओं से सीधा-संवाद करते हुए यह बात कही।विशेष रूप से केवल छात्राओं के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चले संवाद के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति सहित तमाम मसलों को अलग रखते हुए महिलाओं के मुद्दों तक ही चर्चा को सीमित रखा। इस दौरान महिलाओं से यौन और घरेलू हिंसा, नौकरी देने में अड़चनों से लेकर सामाजिक हिंसा के तमाम चिंताजनक आंकड़े देते हुए कहा कि हमारे समाज में सोच यही है कि लड़के को हर तरह की स्वतंत्रता हो और लड़की को पिंजरे में बंद रहना चाहिए।
जंतर-मंतर का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान लड़कियों के गाली देने को कलचरल शाॅक बताने संबंधी वीडियो दिखाते हुए इसे पुरूषवादी मानसिकता से ग्रस्त टिप्पणी बताते हुए कहा कि जंतर मंतर पर गालियां लड़कों ने भी दी और लड़कियों ने भी दी। लेकिन पीएम मोदी को सांस्कृतिक शॉक केवल लड़कियों की गाली से लगा, लड़कें गाली दें तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं।
मोहन भागवत और मनोहरलाल खट्टर के बयान का दिया उदाहरण
इस क्रम में मोहन भागवत की टिप्पणी कि भारत में दुष्कर्म नहीं होता बल्कि इंडिया में होता है और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर के बयान कि 80 प्रतिशत दुष्कर्म में महिला के कारण होता है को भी उन्होंने इसी का उदाहरण बताया।साथ ही कहा कि यह माइंडसेट है कि लड़की की जगह इतनी है कि उसे पिंजर में बंद होकर नियंत्रण में रहना चाहिए और लड़काें को पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते हैं बल्कि न्याय चाहते हैं जहां लड़के और लड़की दोनों की समान प्रतिष्ठा हो।राहुल ने कहा कि सबको मिलकर इसे पुरूषवादी सोच को खत्म करना होगा और इसके लिए लड़कियों को खुद पर गर्व करते हुए मुखर होकर अपनी जगह के लिए समाज में लड़ाई लड़नी पड़ेगी। इस संदर्भ में राहुल ने प्रांरभ में ही मनुस्मृति पर प्रहार करते हुए कहा कि इसमें साफ कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन , जवानी में पति और पति की मृत्यु के पश्चता बेटों के अधीन रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि ये शब्द शर्मनाक हैं और महिलाएं खुद के अलावा किसी और की नहीं हैं। पिता, भाई, पति या बेटे के साथ आपका रिश्ता तो है लेकिन ये उनकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकते। इस संवाद के दौरान महाराष्ट्र की एमपीएससी की बीते मार्च महीने में हुई परीक्षा का पेपर लीक होने का दावा करते हुए एक छात्रा ने अन्य प्रतियोगी छात्रों की तरफ से इस बारे में राहुल गांधी से दखल का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके लिए यह जीवन-मरण का प्रश्न है।इसी तरह आदिवासी समुदाय की एक छात्रा ने गर्ल्स हास्टल में रहने की उम्र सीमा 30 से बढ़ाकर 35 साल नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। तो कई छात्रों ने यौन उत्पीड़न से लेकर शिक्षा पाने में लड़कियों को आने वाली चुनौतियों का जिक्र कर इन मुद्दों पर सरकार, समाज और पारिवारिक चेतना जगाने के लिए राहुल गांधी से पहल करने की मांग की।
