पटना. बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार को जातीय और सामाजिक संतुलन के नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है. एनडीए ने इस बार कैबिनेट गठन में सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदायों को साधने की कोशिश की है. बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों की संभावित सूची पर नजर डालें तो जातीय समीकरण पूरी तरह से संतुलित दिखाने की रणनीति साफ नजर आती है. सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इस बार राजपूत और भूमिहार समाज को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं अति पिछड़ा और दलित वर्ग को भी बड़ी हिस्सेदारी मिली है.बिहार में नीतीश कुमार के समय से ही लव-कुश (कुर्मी-कोयरी) समीकरण एनडीए की मजबूती का आधार रहा है. मौजूदा कैबिनेट में भी इस पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद कोयरी-कुशवाहा समाज से आते हैं.महादलित और पासवान वोट बैंक का भी खास ख्याल रखा गया है. अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और संतोष मांझी (HAM) जैसे नाम दलित समाज के बड़े चेहरे हैं. वहीं चिराग पासवान की पार्टी से लखेन्द्र पासवान और संजय पासवान को शामिल कर पासवान वोटर्स को भी साधा गया है. इसके साथ ही बीजेपी ने अपने पारंपरिक फॉरवर्ड वोट बैंक को भी नाराज नहीं होने दिया है.
विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा के जरिए भूमिहार और ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व मिला है. राजपूत समाज से संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाकर एनडीए ने सवर्णों के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखने का संकेत दिया है.
- बिहार की आबादी में लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का है. सम्राट चौधरी ने भी इन साइलेंट वोटर्स को अपने पाले में रखने का पूरा प्रयास किया है.
- कैबिनेट में केदार गुप्ता (कानू), रामा निषाद (मल्लाह) और दिलीप जायसवाल जैसे चेहरों को जगह देकर ईबीसी समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश की गई है.
- शीला मंडल के जरिए धानुक समाज को भी प्रतिनिधित्व मिला है. यह वर्ग चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाता है. बीजेपी और जेडीयू को पता है कि सत्ता की चाबी इसी बड़े वोट बैंक के पास है.
राजपूत समाज से 4 चेहरे
सम्राट कैबिनेट में राजपूत समाज से सबसे ज्यादा 4 नेताओं को जगह मिलने जा रही है. इनमें बीजेपी से संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह शामिल हैं, जबकि जेडीयू से लेसी सिंह और एलजेपीआर से संजय सिंह को मौका मिल रहा है.सवर्ण राजनीति में अहम माने जाने वाले भूमिहार समाज से बीजेपी ने तीन नेताओं पर भरोसा जताया है. इनमें विजय कुमार सिन्हा, ई कुमार शैलेन्द्र और एक अन्य सवर्ण चेहरा प्रमुख रूप से शामिल हैं. इससे बीजेपी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है.
ब्राह्मण और वैश्य वोट बैंक पर भी फोकस
ब्राह्मण समाज से बीजेपी ने मिथिलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा को मौका दिया है. वहीं वैश्य समाज से दिलीप जायसवाल, केदार गुप्ता, अरुण शंकर प्रसाद और जेडीयू से श्वेता गुप्ता को जगह मिलने जा रही है.
अति पिछड़ा वर्ग को बड़ी हिस्सेदारी
एनडीए ने बिहार के सबसे बड़े वोट बैंक माने जाने वाले अति पिछड़ा वर्ग को साधने पर विशेष जोर दिया है. बीजेपी से रमा निषाद, प्रमोद चंद्रवंशी और रामचंद्र प्रसाद को मौका दिया गया है. वहीं जेडीयू से मदन सहनी, दामोदर रावत, बुलो मंडल और शीला मंडल को शामिल किया गया है.
दलित समुदाय को भी मजबूत प्रतिनिधित्व
दलित समुदाय से भी कई नेताओं को कैबिनेट में जगह दी गई है. बीजेपी से लखेंद्र पासवान और नंद किशोर राम शामिल हैं. जेडीयू से सुनील कुमार, रत्नेश सदा और अशोक चौधरी को जगह मिल रही है. एलजेपीआर से संजय पासवान और हम पार्टी से संतोष कुमार सुमन भी दलित चेहरे के रूप में शामिल होंगे.
मुस्लिम और यादव समीकरण का भी ध्यान
जेडीयू ने मुस्लिम समाज से जमा खान को शामिल कर अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व बनाए रखा है. वहीं बीजेपी ने यादव समाज से राम कृपाल यादव को मौका देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. वहीं जेडीयू कोटे से बिजेन्द्र प्रसाद यादव पहले से डिप्टी सीएम हैं.
जातीय संतुलन के जरिए चुनावी तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट कैबिनेट का यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी भी है. एनडीए ने इस बार लगभग हर बड़े सामाजिक समूह को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. खासकर अति पिछड़ा, दलित और सवर्ण समीकरण को संतुलित रखने पर सबसे ज्यादा जोर दिखाई दे रहा है.
कौन मंत्री किस जाति से देखें लिस्ट?
बीजेपी
1 विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार, सवर्ण)
2 दिलीप जायसवाल (कलवार, वैश्य, पिछड़ा)
3 रामकृपाल यादव (यादव, पिछड़ा)
4 मिथलेश तिवारी (ब्राह्मण, सवर्ण)
5 रमा निषाद (मल्लाह, अति पिछड़ा)
6 केदार गुप्ता (कानू, वैश्य, अतिपिछड़ा)
7 नीतीश मिश्रा (ब्राह्मण, सवर्ण)
8 प्रमोद चंद्रवंशी (चंद्रवंशी, अति पिछड़ा)
9 लखेंद्र पासवान (पासवान, दलित)
10 संजय टाइगर (राजपूत, सवर्ण)
11 ई कुमार शैलेन्द्र (भूमिहार, सवर्ण)
12 अरुण शंकर प्रसाद (सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा)
13 रामचंद्र प्रसाद (तेली, अति पिछड़ा)
14 नंद किशोर राम (रविदास, दलित)
15 श्रेयसी सिंह (राजपूत, सवर्ण)
जेडीयू
1 श्रवण कुमार (कुर्मी, पिछड़ा)
2 निशांत कुमार (कुर्मी, पिछड़ा)
3 मदन सहनी (मल्लाह, अति पिछड़ा)
4 लेसी सिंह (राजपूत, सवर्ण)
5 दामोदर रावत (धानुक, अति पिछड़ा)
6 श्रीभगवान सिंह कुशवाहा (कुशवाहा, पिछड़ा)
7 बुलो मंडल (गंगोता, अति पिछड़ा)
8 श्वेता गुप्ता (सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा)
9 सुनील कुमार (रविदास, दलित)
10 शीला मंडल (धानुक, अति पिछड़ा)
11 रत्नेश सदा (मुसहर, दलित)
12 जमा खान (मुस्लिम)
13 अशोक चौधरी (पासी, दलित)
एलजेपीआर
1 संजय पासवान (पासवान, दलित)
2 संजय सिंह (राजपूत, सवर्ण)
हम
1 संतोष कुमार सुमन (मुसहर, दलित)
आरएलएम
1 दीपक प्रकाश (कुशवाहा, पिछड़ा)
