Parliament 12 August LIVE:नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में FCRA संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. 2बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी. विपक्ष की ओर से कथित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भी सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया गया. इस बीच केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में FCRA बिल पेश किया.सरकार की ओर से विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया. समिति अपनी रिपोर्ट आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में सौंपेगी. इस दौरान कांग्रेस और विपक्षी सांसदों ने बिल को वापस लेने की मांग की।
नित्यानंद राय ने लोकसभा में पेश किया FCRA बिल
विपक्ष के भारी हंगामे और ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के नारों के बीच केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने FCRA संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया. सरकार ने इस विधेयक को आगे की जांच और विचार-विमर्श के लिए JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा. वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयक को वापस लेने की मांग की. विपक्ष का कहना है कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की राय ली जानी चाहिए.
JPC को भेजा गया FCRA बिल
लोकसभा में पेश किए जाने के बाद FCRA बिल को संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है. समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करेगी.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के कुछ सांसदों ने ही विधेयक को JPC के पास भेजने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि अब समिति में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा.
रिजिजू ने कहा कि अगर किसी सांसद या पक्ष को विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह JPC के सामने अपना पक्ष रख सकता है
विपक्ष ने लोकसभा में की जोरदार नारेबाजी
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की.विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की. हंगामा बढ़ने के बाद लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दिया गया.इससे संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला.
विपक्ष की मांग- बिल वापस ले सरकार
हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने कहा, ‘सरकार अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। हमारी मांग है कि सरकार इस बिल को वापस ले।’ विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘केसी वेणुगोपाल ने गलत बोला है। कई दिनों से कांग्रेस और अन्य दलों ने मांग की कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी में भेजा जाए। जब इस महत्वपूर्ण बिल को जेपीसी में भेज रहे हैं तो विपक्ष को इस पर आपत्ति हो रही है।’
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने विपक्ष की मांग ठुकराई
रिजिजू ने कहा कि केसी वेणुगोपाल या अन्य सदस्य को इस बिल में आपत्तिजनक कुछ बिंदु लगते हैं तो जेपीसी में मत रख सकते हैं। इसमें उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इस विधेयक से किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट नहीं किया जा रहा है। पूरे देश को सुरक्षित रखने के लिए नियम बना रहे हैं।’
अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव ने भी एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘सरकार जो एफसीआरए ला रही है, इसके खिलाफ पूरा विपक्ष है। मंत्री (किरेन रिजिजू) ने बोला कि विधेयक अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नहीं है। मंत्री बताएं कि आज तक सरकार जो बिल लाई है, बिना अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ वे कौन सा बिल लेकर आए?’
अखिलेश के आरोपों का रिजिजू ने क्या दिया जवाब?
इस पर जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा, ‘मैं जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि इस विधेयक में एक भी प्रावधान ऐसा नहीं है, जो अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ है।’ अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए रिजिजू ने कहा, ‘देश में झूठ फैलाया जा रहा है। किसी अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट करने का सवाल ही नहीं है। आप (विपक्ष) चाहते हैं कि विदेश का धन बिना कानून के ऐसे ही देश में लाकर खर्चा किया जाए, इसका कोई मतलब नहीं है।’
इसके बाद लोकसभा ने ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव पास किया।
जेपीसी संसद के शीतकालीन सत्र तक देगी अपनी रिपोर्ट
प्रस्ताव में कहा गया कि विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजा जाए, जिसमें लोकसभा के माननीय अध्यक्ष द्वारा मनोनीत इस सदन के 21 सदस्य और राज्यसभा के माननीय सभापति द्वारा मनोनीत 10 सदस्य होंगे। समिति को विधायी प्रावधानों की गहन जांच करने का काम सौंपा गया है और समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक संसद को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
