नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है, शहर के विभिन्न इलाकों में सक्रिय 25 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जूट बैग और हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का 35 दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं अपने हुनर को आय का साधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को केवल जूट बैग बनाना नहीं सिखा रहा, बल्कि उन्हें छोटे स्तर पर अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए भी तैयार कर रहा है. प्रशिक्षण में महिलाओं को जूट से बैग, फाइल फोल्डर, सजावटी सामान, घरेलू उपयोग के उत्पाद और अन्य हस्तशिल्प सामग्री बनाने की तकनीक बताई जा रही है. जूट से बने उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, इसलिए बाजार में इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है.
कोलकाता के विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम को राजकीय जूट बोर्ड के निदेशक की पहल पर संचालित किया जा रहा है. दीनदयाल राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत सूडा अनुभाग की ओर से महिलाओं को इस प्रशिक्षण से जोड़ा गया है. सिटी मिशन मैनेजर सीमा पांडे ने बताया कि निर्मला सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य महिलाओं को कौशल विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है.प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कोलकाता से जूट हस्तशिल्प विशेषज्ञ पुष्पजीत मजूमदार को नैनीताल बुलाया गया है. वे महिलाओं को जूट उत्पादों की डिजाइनिंग, कटिंग, सिलाई, फिनिशिंग और गुणवत्ता बनाए रखने की बारीकियां सिखा रहे है. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को यह भी बताया जा रहा है कि कम लागत में बेहतर उत्पाद कैसे तैयार किए जाएं और उन्हें स्थानीय बाजार के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचाया जा सकता है.
70 फीसदी सब्सिडी भी देगी सरकार
महिलाओं को उत्पाद की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ग्राहक की पसंद के अनुसार डिजाइन तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है. प्रशिक्षक महिलाओं को समझा रहे हैं कि आज के समय में केवल उत्पाद बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी प्रस्तुति, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है. यही कारण है कि प्रशिक्षण में व्यावसायिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.सिटी मिशन मैनेजर सीमा पांडे ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जो महिलाएं जूट उत्पादों का स्वरोजगार शुरू करना चाहेंगी, उन्हें मशीन खरीदने के लिए 70 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है. इससे महिलाओं को शुरुआती निवेश का बोझ कम होगा और वे घर से ही छोटे उद्योग की शुरुआत कर सकेंगी. कई महिलाएं समूह के रूप में भी काम कर सकती हैं, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे.
महिलाएं बन रहीं हैं आत्मनिर्भर
इस पहल से नैनीताल में स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. पर्यटन नगरी होने के कारण नैनीताल में जूट बैग, सजावटी सामान और स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री की अच्छी संभावनाएं हैं. पर्यटक अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों से स्थानीय उत्पाद स्मृति के रूप में खरीदकर ले जाते हैं. ऐसे में महिलाएं अपने उत्पादों को बाजार, मेलों, प्रदर्शनियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंचाकर बेहतर आमदनी हासिल कर सकती हैं. प्रशिक्षण प्राप्त कर रही
महिलाएं भी इस पहल को लेकर उत्साहित हैं.
नैनीताल निवासी रेनू ने बताया कि जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण लेकर उन्हें काफी अच्छा लग रहा है. उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए स्वरोजगार का नया अवसर लेकर आया है. अब वे घर के कामकाज के साथ-साथ जूट से उत्पाद तैयार कर आय का साधन बना सकती हैं. रेनू ने कहा कि महिलाओं के लिए इस तरह के प्रशिक्षण बेहद उपयोगी हैं, क्योंकि इससे वे आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं और परिवार की आय में भी सहयोग कर सकती हैं. उन्होंने नगरपालिका और प्रशिक्षण से जुड़े सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा कि इस पहल से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिल रहा है.
