लेखिका: अनुप्रिया पटेल
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ; भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के तौर पर अपनी पहचान और पुख्ता कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन के अनुरूप अब हम जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर नवाचार आधारित वैश्विक शक्ति बनने की दिशा की ओर अग्रसर हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतियां बनाना है, जिससे देश के सभी नागरिक को कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिल सकें। सरकार निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर देश के फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रयासरत है।
रोजगार के नए मौके
भारत की अब तक की सफलता उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और गुणवत्ता मानकों पर आधारित रही है। विश्व की लगभग 20% जेनेरिक दवाओं और 60% वैक्सीन आपूर्ति के साथ देश ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने 8 से 10 बरसों में देश को उच्च-मूल्य, नवाचार-आधारित बायोफार्मा और उन्नत चिकित्सकीय उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इसकी आधारशिला के रूप में बजट में घोषित 10,000 करोड़ रुपये की बायोफार्मा शक्ति पहल महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम देश में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार आधारित उद्योगों और अगली पीढ़ी की दवाओं के विकास को गति प्रदान करेगा।आंकड़े दर्शाते हैं कि फिलहाल, भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग 50 अरब डॉलर का है। जिस रफ्तार से हम आगे बढ़ रहे हैं 2030 तक इसके 130 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। फार्मास्युटिकल उद्योग 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। 2030 तक हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र में 20 से 25 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। बायोफार्मा, मेडटेक और क्लीनिकल रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों ने संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।
NIPER में रिसर्च-इनोवेशन को बढ़ावा
हमारी सरकार का मानना है कि युवाओं की सफलता की नींव एक मजबूत शैक्षणिक ढांचे पर टिकी होती है। इसलिए सरकार ने देश में तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, अभी कार्यरत सात NIPER को अपग्रेड किया जा रहा है। इन सात संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, जो अनुसंधान और विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, NIPER मोहाली में एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं की खोज एवं विकास, अहमदाबाद में मेडिकल डिवाइसेज, हैदराबाद में बल्क ड्रग्स, कोलकाता में फ्लो केमिस्ट्री और सतत विनिर्माण, रायबरेली में नोबल ड्रग डिलीवरी सिस्टम, गुवाहाटी में फाइटो फार्मास्युटिकल्स और हाजीपुर में बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इन संस्थानों का सीधा लाभ हमारे विद्यार्थियों को मिलेगा। NIPER केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं रह जाएंगे, बल्कि वे ऐसे केंद्र बनेंगे जहां छात्र उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करेंगे। इससे हमारे छात्र केवल जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर और इनोवेटर बनेंगे।
उद्योग-अकादमिक की मजबूत साझेदारी
बदलते दौर में काम करने के तरीके बदल रहे हैं। 2030 तक फार्मा सेक्टर के 30-35% कार्यबल को री-स्किलिंग यानी नए कौशल सीखने की जरूरत होगी। केयर डिलीवरी, रिसर्च ऐंड मैन्युफैक्चरिंग की परिभाषाएं बदल रही हैं। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ और नियामक मामलों में उच्च कौशल वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारी सरकार का ध्यान इसी स्किल गैप को भरने पर है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र क्लीनिकल रिसर्च और अनुसंधान और विकास में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें। शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। जब तक हमारे कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतें एक समान नहीं होंगी, तब तक हम जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसीलिए, हम उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बिठाने के लिए NIPER और उद्योग के बीच 356 MOU पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
युवाओं को सशक्त बनाने का मिशन
कौशल विकास मिशन के जरिये छात्रों को सीधे कंपनियों के साथ जुड़ने के मौके दिए जा रहे हैं। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनेगा। औषधि क्षेत्र का विकास सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ़ाने के साथ-साथ देश के युवाओं को सशक्त बनाने का भी एक मिशन है। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां एक छात्र अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सके। भारत के औषधि क्षेत्र का यह स्वर्णिम युग हमारे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, जो पीएम मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
