उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने बड़ा कदम उठाया है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले के बाद भी मायावती आकाश से नाराज बताई जा रही हैं। मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर करने के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए 10 प्वाइंट्स का एक नोट शेयर किया है। इसमें उन्होंने आकाश को पार्टी से बाहर करने के कारण को भी बताया है और कई बड़े आरोप लगाए हैं।
क्या बोलीं मायावती?मायावती ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर किए गए पोस्ट में आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ पर कई बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने दोनों पर पार्टी के बजाय निजी व पारिवारिक स्वार्थ से ज्यादा मोह रखने का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा-:
- आज अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही कदम है।
- वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बीएसपी, बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद आकाश आनंद को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आम चुनाव एवं खासकर यूपी में पांचवीं बार सरकार बनाने की जबरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनजर इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की जरूरत पड़ती।
- वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली जबरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूं और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक सीखकर बीएसपी में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहां सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी जरूरत होती है।
- कुल मिलाकर, अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।
- किन्तु अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद आकाश आनंद के उज्जवल भविष्य के साथ ही बीएसपी पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिंता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरकरार है।
- इतना ही नहीं बल्कि आकाश आनंद द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव कायम है कि उन्होंने बीएसपी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा। हालांकि यह पोस्ट उनके ही सकारात्मक व भलाई के लिये था।
- जबकि इससे पहले वे बीएसपी प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ व आकाश आनंद दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बीएसपी ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (जमीन) से अर्श (आसमान) की बुलंदी पर पहुंचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बीएसपी व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुजार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।
- ऐसे हालात में आकाश आनंद को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनन्द डबल माइंड होकर फिर बीएसपी पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?
- इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐसे में अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है।
- अंत में यही कहना है कि बीएसपी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त कानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
मायावती ने रखी थी बड़ी शर्त
आपको बता दें कि इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी। मायावती ने कहा था- “बसपा और मूवमेन्ट के हित के साथ-साथ खुद उनके परिवार एवं अपने दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें।” इसके बाद बुधवार को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था।
सियासत से संन्यास पर अशोक सिद्धार्थ का बयान
अशोक सिद्धार्थ ने X पर लिखा, ‘बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी, मान्यवर कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है।’
मायावती का ऋण कभी नहीं चुका सकता- अशोक सिद्धार्थ
अपने X पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ ने आगे लिखा, ‘आप मेरी राजनीतिक गुरु हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूं। आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।’
मैंने कभी BSP के खिलाफ काम नहीं किया
अशोक सिद्धार्थ ने ये भी लिखा, ‘कांशीराम की कसम खाता हूं कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।’
अशोक सिद्धार्थ के आगे मायावती की शर्त
मायावती ने X पोस्ट में लिखा था कि बीएसपी पार्टी और मूवमेंट के हित के साथ-साथ खुद उनके परिवार एवं अपने दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में आकाश आनंद का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम राय है।
कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?
अशोक सिद्धार्थ, मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं, तो वह नाते में उनके समधी हैं। आकाश आनंद की शादी अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से हुई है। अशोक सिद्धार्थ भी पेशे से डॉक्टर थे। 2008 में मायावती के कहने पर अशोक सिद्धार्थ, सरकारी नौकरी छोड़कर बीएसपी में शामिल हो गए थे। 2009 में मायावती ने उन्हें एमएलसी बनाया था। इसके बाद, मायावती ने 2016 में अशोक सिद्धार्थ को राज्यसभा भी भेजा था।
