अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर सवाल उठाते हुए बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा है, “अगर सरकार 24 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो परिवार दोबारा धरना-प्रदर्शन करेगा.”उन्होंने मांग की है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच पूरी होने और उर्मिला सनावर के बयान दर्ज किए जाने तक गौतम की नियुक्ति रद्द की जाए.उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पूरे उत्तराखंड की जनता सड़कों पर उतर सकती है.वीरेंद्र भंडारी ने बताया कि दिल्ली धरने पर बैठने के दौरान पुलिस ने उन्हें जबरन वहां से उठा दिया था. उन्होंने कहा कि परिवार अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है.अंकिता भंडारी के मां-बाप गुरुवार, 15 अक्तूबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं, जिसमें इस मामले को लेकर अपनी मांगें और आगे की रणनीति सामने रखेंगे.वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई को सबसे पहले दुष्यंत कुमार गौतम का बयान दर्ज करना चाहिए.उन्होंने मांग की कि 18 और 19 तारीख़ को उनकी लोकेशन और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि इन तारीख़ों को वह कहां थे. वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि अगर जांच में गौतम निर्दोष पाए जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन अगर उनकी संलिप्तता सामने आती है, तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यह बात उत्तराखंड में 2022 में हुई अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में उसके माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के संदर्भ में कही। राहुल गांधी ने कहा कि इस सरकार की पहचान ही है कि यह पीड़ितों की आवाज दबा देती है। सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटा देती है।19 वर्षीय अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार सुबह रिहा कर दिया गया। इससे कुछ घंटे पहले, वे इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। उनका यह विरोध प्रदर्शन सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के खिलाफ था।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उनका गुनाह क्या था? वे इंडिया गेट पर शांति से बैठे थे भारी मन से, बिना किसी हंगामे के। उनकी बस यही मांग थी कि जब तक सीबीआई जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।’
उन्होंने कहा कि जब तक जांच से जुड़े सवालों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द रखी जानी चाहिए.वीरेंद्र भंडारी ने यह आशंका भी जताई कि राज्यपाल का संवैधानिक पद मिलने के बाद दुष्यंत कुमार गौतम के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करना बेहद मुश्किल हो सकता है. उनका आरोप है कि उन्हें क़ानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए यह पद दिया जा रहा है.अंकिता के पिता ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी पत्नी रह चुकीं उर्मिला सनावर से जुड़े प्रकरण का विस्तार से ज़िक्र किया.उन्होंने कहा कि उर्मिला सनावर एक दिन उस रिज़ॉर्ट में गई थीं, जहां अंकिता भंडारी काम करती थीं. उनके मुताबिक़, इसी दौरान उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के बीच बातचीत हुई, जिसमें कथित वीआईपी के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आया.वीरेंद्र भंडारी के अनुसार, उर्मिला सनावर ने इस बातचीत से जुड़ा एक वीडियो बनाया था. बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद उर्मिला ने वीडियो सार्वजनिक कर दिया.वीरेंद्र भंडारी ने दावा किया कि उर्मिला सनावर ने इस मामले में अपना बयान एसआईटी को दे दिया था और अपना फ़ोन भी जांच एजेंसी को सौंप दिया था.वीरेंद्र भंडारी की मांग है कि उर्मिला सनावर के बयान और वीडियो की जांच की जाए और सीबीआई उनका बयान दर्ज करे. उनका कहना है कि जब तक इस मामले में सामने आए दावों की जांच नहीं होती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति निरस्त रखी जानी चाहिए.हालांकि, उर्मिला सनावर के दावों और दुष्यंत कुमार गौतम की कथित भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी.
वीरेंद्र भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाक़ात का भी ज़िक्र किया. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में परिवार को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया था.उनके मुताबिक़, प्रियंका गांधी ने भी कहा था कि वह इस लड़ाई में परिवार के साथ हैं और अंकिता को न्याय मिलने तक समर्थन देंगी.वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि बेटी को खोने का दर्द कितना गहरा होता है, इसे मां-बाप या भाई ही समझ सकते हैं.उन्होंने बताया कि दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल बनाए जाने की ख़बर सुनकर उनका पूरा परिवार बेहद व्यथित था और रातभर सो नहीं सका.उन्होंने सरकार से अपील की कि परिवार की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए.वीरेंद्र भंडारी का कहना है कि परिवार की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और उन्हें अंकिता के मामले में न्याय की दिशा में ठोस क़दम उठते दिखाई नहीं देते.इससे पहले 15 अक्तूबर को कांग्रेस नेताओं ने कहा कि रातभर चले प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत कई लोगों को इंडिया गेट पर हिरासत में ले लिया था.कुछ देर हिरासत में रखे जाने के बाद उन्हें सुबह पांच बजे छोड़ दिया गया.अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को कांग्रेस ने ‘बेबस मां-बाप के साथ ‘बेरहमी से किया गया एक्शन’ बताया है.अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि बेटी की हत्या के मामले में चल रही सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए.उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी. भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर क्षेत्र स्थित वनंतरा टूरिस्ट रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं.इस मामले में अपना नाम सामने आने के बाद बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए एफ़आईआर दर्ज कराई थी.देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने आरोप लगाया था कि हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सुनियोजित आपराधिक साजिश रची थी.दुष्यंत गौतम को केंद्र सरकार ने 12 अक्तूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया था.
अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “क्या एक्शन है यह? एक बेरहमी से किया हुआ बेबस मां-बाप के साथ एक्शन जो चार साल से न्याय मांग रहे थे. उनको न्याय देने के बजाय जो मुख्य आरोपी है उसको राज्यपाल बना रहे हैं और उसके बाद मां-बाप के साथ बेरहमी कर रहे हैं… कायर की तरह आकर सुबह 6:00 बजे से पहले लड़कियों को उठा रहे हैं यहां से. क्या ढंग है यह दिल्ली पुलिस का?”
अंकिता भंडारी की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक वे विरोध करती रहेंगीं.उन्होंने कहा, “हम ऐसे बैठे रहेंगे. चाहे हम अपने घर में रहेंगे. अगर हमें नहीं बैठने देंगे तो हम अपने घर में भूख हड़ताल में बैठ जाएंगे. हम सरकार को दुष्यंत की नियुक्ति निरस्त करनी पड़ेगी. अगर निरस्त नहीं करेगी तो पूरे भारतवर्ष में जनता सड़कों पर उतर जाएगी. इसकी जवाबदेही सरकार की होगी.”इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की.लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना की निंदा की है.उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पीड़ितों की आवाज़ दबाती है और सवाल करने वालों को हटा देती है.राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “सुबह के 4 बजे. जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया. उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे – बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना मांग रहे थे कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए.””कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे. जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया. इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो.”राहुल गांधी ने लिखा, “न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी. कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी – जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता.”
अंकिता के पिता की पाँच मांगें
अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के फ़ैसले पर गहरा दुख और निराशा जताई थी.उन्होंने बताया था कि इस फैसले की खबर सुनकर उनका पूरा परिवार रातभर सो नहीं सका और बेहद व्यथित रहा.अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को मई 2025 में दोषी ठहराया गया और अब वे जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.हालांकि इस मामले की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शेखर सुयाल ने एक बार फिर से दावा किया है कि इस मामले में ‘किसी वीआईपी’ की कोई भूमिका नहीं थी.अंकिता हत्याकांड के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. सुयाल उस वक़्त पौड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और एसआईटी के सदस्य भी थे.अंकिता हत्याकांड के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. सुयाल उस वक़्त पौड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और एसआईटी के सदस्य भी थे.सुयाल ने जनवरी 2026 में मीडिया से बातचीत में कहा, “18 से 22 सितंबर, 2022 के बीच रिसॉर्ट में ठहरने या बुकिंग कराने वाले हर व्यक्ति की हर पहलू से जांच की गई, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली कि कोई व्यक्ति वास्तव में ‘वीआईपी’ था.अंकिता भंडारी हत्या के मामले को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच पांच जनवरी को बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए एफ़आईआर दर्ज कराई थी.देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने आरोप लगाया है कि हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उनके ख़िलाफ़ सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा है.याचिका में दुष्यंत गौतम ने अदालत से मांग की है कि उनके ख़िलाफ़ आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाई जाए और “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट हटाने के निर्देश दिए जाएँ और भविष्य में इस तरह के आरोपों पर स्थायी रोक लगाई जाए.”दुष्यंत गौतम ने यह भी कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की पूरी जांच, चार्जशीट और अदालत की कार्यवाही में कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आया है.उन्होंने अपनी एफ़आईआर में कांग्रेस पार्टी पर भी आरोप लगाए हैं.
