नई दिल्ली: देश में आर्थिक बोझ बढ़ रहा..! लोग जरूरतों से ज्यादा दिखावे के लिए कर्ज ले रहे है. महंगे मोबाइल, विदेश यात्रा,लग्जरी सामान के लिए पर्सनल लोन का चलन बढ़ा. RBI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में घरेलू कर्ज बढ़कर देश की GDP का 45.5% हो चुका. जबकि कुल ऋण में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 58.4 फीसदी तक पहुंची.हर साल नया कर्ज, हर साल बढ़ता ब्याज… और इसकी कीमत आखिरकार आम जनता ही चुकाती है। क्या भारत विकास की राह पर है… या कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है ?
EMI Burden on Middle Class: EMI ने देश के मिडिल और लोअर मिडिल क्लास को अपने मकड़जाल में फंसा रखा है. वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में पेश किए गए TransUnion CIBIL के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक देश में 28 करोड़ से अधिक यूनिक व्यक्तिगत उधारकर्ता (Unique Individual Borrowers) थे. यानी 28 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने किसी ना किसी तरह का कर्ज लिया हुआ है.
यही नहीं, देश में प्रति व्यक्ति औसत कर्ज बढ़कर 4,77,583 यानी 4.77 लाख रुपए हो गया है. मार्च 2026 तक कुल व्यक्तिगत बैंक ऋण बढ़कर 69.39 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लोन लेने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है. RBI की Financial Stability Report 2026 के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारत का Household Debt, GDP के 45.5% तक पहुंच गया. जो बताता है कि घरेलू उधारी बढ़ रही है.
क्या EMI नई लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रही है? किस तरह के लोन सबसे ज्यादा बढ़े? सबसे ज्यादा लोन किस चीज के लिए लिए जा रहे? घर, गाड़ी, मोबाइल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोन लेने की बढ़ती प्रवृत्ति क्या भारतीयों की आर्थिक आदतों को बदल रहे हैं?
देश में 28.3 करोड़ लोग कर्जदार: लोकसभा के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक रिपोर्ट पेश की, जिसके अनुसार कर्जदार भारतीयों की संख्या 2017-18 में जो 12.8 करोड़ थी वह 2024-25 में बढ़कर 28.3 करोड़ हो गई है, जो दोगुने से भी ज्यादा है. इसके साथ ही 30 जून, 2026 को जारी RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (FSR) के अनुसार, भारत के घरेलू क्षेत्र का कर्ज लगातार बढ़ रहा है. अब यह GDP का 45.5% हो गया है. इसमें मुख्य रूप से गैर-आवास खुदरा ऋणों (Non Housing Retail Loans) में बढ़ोतरी का योगदान है. अब ये कुल घरेलू कर्ज का 58.4% हैं, जो आवास, कृषि और व्यावसायिक ऋणों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है.
देश के हर व्यक्ति पर कितना कर्ज: RBI के अनुसार, क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी ‘ट्रांसयूनियन सिबिल’ (Transunion CIBIL) को क्रेडिट संस्थानों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मार्च 2018 में 12.8 करोड़ उधारकर्ताओं पर कुल 43,61,013 करोड़ रुपए का बकाया कर्ज था, जिसमें प्रति उधारकर्ता औसत कर्ज 3,41,478 रुपए था. जो मार्च 2025 में 28.3 करोड़ उधारकर्ताओं पर बढ़कर 1,35,09,017 करोड़ रुपए हो गया, जिसमें प्रति उधारकर्ता औसत कर्ज बढ़कर 4,77,583 रुपए हो गया. कुल मिलाकर, इस दौरान उधारकर्ताओं की संख्या और उनका औसत कर्ज, दोनों में बढ़ोतरी हुई. बता दें कि प्रति उधारकर्ता औसत कर्ज का डेटा, सक्रिय और अलग-अलग उधारकर्ताओं पर बकाया कर्ज को दिखाता है. यह किसी भारतीय नागरिक के औसत कर्ज को नहीं दर्शाता है.
पर्सनल और होम लोन की ज्यादा डिमांड: भारतीय सबसे ज्यादा पर्सनल लोन और होम लोन लेते हैं. जहां होम लोन कुल क्रेडिट डेट में वैल्यू के हिसाब से सबसे बड़ा हिस्सा हैं, वहीं अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन की मांग और संख्या में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई है. लोग पर्सनल लोन, वाहन लोन, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन व शिक्षा और अन्य उपभोग संबंधी लोन भी ले रहे हैं.
इसकी वजह डिजिटल ऐप्स, तुरंत मंजूरी और रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतें हैं. गोल्ड लोन भी बहुत पसंद किए जाते हैं. क्योंकि, इनमें कम कागजी कार्रवाई के साथ तुरंत कैश मिल जाता है. क्रेडिट स्कोर की जरूरत भी नहीं होती. पर्सनल लोन के मुकाबले ब्याज दरें भी कम होती हैं. साथ ही, इनमें परिवारों को अपने पास मौजूद सोने को बेचे बिना उसकी वित्तीय वैल्यू का फायदा उठाने का मौका मिल जाता है.
छोटी-छोटी जरूरतों के लिए EMI के चक्कर में फंस रहे लोग: बहुत से लोग रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए छोटे लोन ले रहे हैं. यानी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग EMI के चक्कर में फंसते जा रहे हैं. वैसे, ज्यादातर मामलों में पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन लिए जा रहे हैं.
- घर खरीदने के लिए: अपना घर होना सामाजिक प्रतिष्ठा का एक अहम हिस्सा माना जाता है. बढ़ती महंगाई और प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों के कारण, अब सिर्फ अपनी जमा-पूंजी से घर खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है. होम लोन एक तरह का सिक्योर्ड लोन होता है. होम लोन लेने पर लोगों को टैक्स का फायदा भी मिल सकता है.
- एजुकेशन लोन: भारत समेत विदेश में पढ़ाई का खर्च हर दिन बढ़ रहा है. कॉलेज और स्कूल की फीस लगातार बढ़ने के कारण पेरेंट्स के लिए अच्छी क्वालिटी की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है. इस बढ़ते खर्च से निपटने का एकमात्र तरीका एजुकेशन लोन है, जिसके कॉलेज फीस भरने के अलावा और भी कई फायदे हैं.
- शादी के खर्च के लिए: भारतीय शादियों को अक्सर ‘बिग फैट इंडियन वेडिंग्स’ कहा जाता है. देश में वेडिंग इंडस्ट्री अरबों डॉलर की है. हर दिन नए ट्रेंड आने के साथ, यह एक बहुत महंगा इवेंट बनता जा रहा है. एक आम शादी के लिए कम से कम 10 लाख रुपए की ज़रूरत होती है. भारत में, कई लोग आरामदायक और सपनों जैसी शादी करने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, क्योंकि वे अपने खास दिन को सबसे अच्छे तरीके से मनाना चाहते हैं.
- दुनिया घूमने के लिए: ज्यादातर भारतीयों को घूमना-फिरना और अपने देश के साथ-साथ दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों को जानना पसंद है. लेकिन, एक जगह से दूसरी जगह घूमना सस्ता नहीं है. अगर आप दुनिया घूमना चाहते हैं, तो आपके पास पर्याप्त पैसे होने चाहिए. इसलिए, कई भारतीय नई जगहें देखने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं.
- बिजनेस बढ़ाने के लिए: भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है. इस सफलता का एक बड़ा हिस्सा भारत में चल रहे बिजनेस की वजह से है. भारत में बैंक और NBFCs बिजनेस मालिकों की जरूरतों के आधार पर कई तरह के लोन देते हैं. इसलिए वे अपना बिजनेस बढ़ाने या रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए बिजनेस लोन लेते हैं.
- कर्ज को एक साथ करने के लिए: भारत में अब लोगों के पास क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या कार लोन होना आम बात है. लेकिन, जब कर्ज चुकाने की बात आती है, तो बहुत मुश्किल होती है. जिन लोगों ने कई लोन लिए हैं, उनके लिए उनको एक साथ मैनेज करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है. इसलिए, ये लोग अक्सर अपने कर्जों को एक ही लोन में बदलने के लिए प्रॉपर्टी पर लोन या पर्सनल लोन लेते हैं. इस तरह, सिर्फ एक लोन और एक ही ब्याज दर चुकानी पड़ती है.
EMI के मकड़जाल में क्यों फंस रहे लोग: भारतीय परिवारों पर कर्ज में पर्सनल लोन, गोल्ड लोन और कंजम्पशन फाइनेंसिंग का बड़ा हिस्सा शामिल है. इसकी वजह, आसानी से मिलने वाला डिजिटल क्रेडिट, सोने के प्रति बदलता नजरिया और एक ऐसी पीढ़ी जो अपने माता-पिता और दादा-दादी के मुकाबले कर्ज लेने में ज्यादा सहज महसूस करती है.
रिटेल लोन का चलन बढ़ा: समय के साथ, बिना-घर वाले रिटेल लोन (Non Housing Retail Loans) का हिस्सा बढ़ा है. मार्च 2026 तक परिवारों पर कुल कर्ज का लगभग तीन-पांचवां हिस्सा, यानी 58.4%, इन्हीं लोन से आया था. मार्च 2025 में यह आंकड़ा 54.9% था. 2019 और 2020 में परिवारों के कुल कर्ज में बिना घर वाले रिटेल लोन का हिस्सा सिर्फ 50% के आसपास था.
ये लोन बिजनेस, खेती और घर के लिए लोन लेने की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं. कई अर्थव्यवस्थाओं में, बैंकों, क्रेडिट कार्ड, डिजिटल लेंडर और ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’ (Buy now, Pay later) जैसी सेवाओं के जरिए कर्ज लेना आसान और सामाजिक रूप से स्वीकार्य हो गया है.
देश में 84% लोग कम आय वाले: प्यू रिसर्च सेंटर के एनालिसिस के अनुसार, भारत की लगभग 84% आबादी 1,162 मिलियन (116 करोड़ 20 लाख) कम आय वाली कैटेगरी में आती है. सिर्फ 4.8% आबादी 6 करोड़ 60 लाख मिडिल-इनकम कैटेगरी में आते हैं. 2047 तक भारत की मिडिल-क्लास आबादी कुल आबादी का लगभग 61% होने की उम्मीद है. क्योंकि लगातार पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और इकोनॉमिक रिफॉर्म्स के साथ अगले ढाई दशकों तक सालाना 6% से 7% की ग्रोथ रेट बनी रहेगी, जिससे देश दुनिया के सबसे बड़े मार्केट में से एक बन जाएगा.
भारत का घरेलू कर्ज चीन-मलेशिया से कम: RBI की लेटेस्ट FSR रिपोर्ट के अनुसार भारत का घरेलू कर्ज चिली, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ज्यादा है. लेकिन, चीन, मलेशिया और थाईलैंड की तुलना में कम है. जून 2025 की FSR में, RBI ने कहा था कि कुल मिलाकर, व्यक्तिगत उधारकर्ताओं पर प्रति व्यक्ति कर्ज मार्च 2023 में 3.9 लाख रुपए से बढ़कर मार्च 2025 में 4.7 लाख रुपए हो गया है. जो आगे और बढ़ेगा.
करीब 47 फीसदी कर्ज जीवनशैली से जुड़ी जरूरतों के लिए लिया जा रहा. महंगी शॉपिंग, सेल्फ-केयर, शादियों,गैजेट्स के लिए लोग कर्ज लेने में पीछे नहीं हट रहे. लोन लेने के लिए सोशल मीडिया का दबाव भी बड़ी वजह है.मोबाइल पर मिनटों में आसानी से मिलने वाला लोन लोगों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है. वित्तीय सलाह के मुताबिक जरूरत के बजाय चाहतों के लिए पर्सनल लोन लेना भारी पड़ सकता है. विशेषज्ञों की सलाह-“आय का 50 फीसदी जरूरी खर्चों पर, 30 फीसदी चाहतों पर और 20 फीसदी बचत में रखें. कर्ज का बोझ कभी भी 30 फीसदी की सीमा से बाहर न जाने दें.
देश में बढ़ रहा आर्थिक बोझ..!:
-लोग जरूरतों से ज्यादा दिखावे के लिए ले रहे कर्ज
-महंगे मोबाइल, विदेश यात्रा,लग्जरी सामान के लिए पर्सनल लोन का बढ़ा चलन
-RBI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में घरेलू कर्ज बढ़कर देश की GDP का 45.5% हो चुका
-जबकि कुल ऋण में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 58.4 फीसदी तक पहुंची
-करीब 47 फीसदी कर्ज जीवनशैली से जुड़ी जरूरतों के लिए लिया जा रहा
-महंगी शॉपिंग, सेल्फ-केयर, शादियों,गैजेट्स के लिए लोग कर्ज लेने में पीछे नहीं हट रहे
-लोन लेने के लिए सोशल मीडिया का दबाव भी बड़ी वजह
-मोबाइल पर मिनटों में आसानी से मिलने वाला लोन लोगों को फंसा रहा कर्ज के जाल में
-वित्तीय सलाह के मुताबिक जरूरत के बजाय चाहतों के लिए पर्सनल लोन लेना पड़ सकता भारी
-विशेषज्ञों की सलाह-आय का 50 फीसदी जरूरी खर्चों पर,
-30 फीसदी चाहतों पर और 20 फीसदी बचत में रखें
-कर्ज का बोझ कभी भी 30 फीसदी की सीमा से बाहर न जाने दें
