स्वतंत्रता दिवस 2026: 80 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले से भाषण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण की शुरुआत वंदे मातरम् और तिरंगे के जिक्र से की। उन्होंने कहा कि आज हर दिल में वंदे मातरम गूंज रहा है, हर घर में तिरंगा है और हर मन में तिरंगा बस गया है। देश नए संकल्पों और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है। यह दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले से वंदे मातरम गूंजा। इस साल वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। पीएम ने महात्मा गांधी सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान किया। पीएम के भाषण का सबसे बड़ा संदेश बड़े सपने देखने का था। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं, क्षितिज को चौड़ा करते हैं और प्रगति की गति बढ़ाते हैं। जब संकल्प दृढ़ होता है तो संभावनाएं खुद रास्ता बना लेती हैं।
बड़े सपने देखें- पीएम मोदी
पीएम ने भारत ने एक बहुत बड़ा सपना देखा है- 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर विकसित भारत बनाना। यह लक्ष्य 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास, परिश्रम और भागीदारी से ही पूरा होगा। जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो यह हमारे साहस का परिचय बनता है और दुनिया हमारा दृष्टिकोण बदलने को मजबूर होती है।
12 साल की उपलब्धियां बताईं
पीएम ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र किया। कभी भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ में गिना जाता था, लेकिन आज वह दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है। 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को अब कोई रोक नहीं सकता। इन 12 वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए। रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी और ग्रामोद्योग पांच गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सात गुना, रेलवे कोच निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा। इंटरनेट यूजर्स चार गुना और डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े। सोलर एनर्जी क्षमता 2 गीगावॉट से बढ़कर 160 गीगावॉट हो गई। पाइप गैस कनेक्शन वाले शहर 70 से 700 हो गए और घरों की संख्या भी काफी बढ़ी।
आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर
पीएम के भाषण में आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर दिया गया। पीएम ने कहा कि अब भारत दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं चल सकता। मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल के जरिए क्षमताएं बढ़ानी होंगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तीन बड़े प्लांट स्थापित हो चुके हैं और उनसे निर्यात शुरू हो गया है। अगले 7-8 वर्षों में पांच से आठ और प्लांट लगेंगे। ऊर्जा सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है (स्रोतों के अनुसार 100 या 200 गीगावॉट तक)। इस दशक में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने की योजना है। हाइड्रोजन ट्रेन का भी जिक्र किया गया।
सप्त धारा के जरिए विकास
पीएम ने सप्तधारा (सात शक्ति धाराओं) का आह्वान किया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगले पांच-सात वर्षों में वह काम पूरा करना है, जो पिछले पांच-सात दशकों में नहीं हो सका। मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक सप्लाई चेन का हब बनाना है। लागत, गुणवत्ता और स्केल पर ध्यान देना होगा। 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हो चुके हैं, जिससे छोटे उद्योग, किसान और मछुआरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। युवा शक्ति को विकसित भारत का सबसे बड़ा इंजन बताया गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग देने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
सप्तधारा की सात अहम बातें
- पीएम ने कहा, “आज, लाल किले की प्राचीर से, मैं देश से ‘शक्ति की सप्तधारा’ अपनाने की अपील करता हूं। जब मैं सप्तधारा की बात करता हूं, तो पहली ताकत हमारी मैन्युफैक्चरिंग पावर है। हमें एक पूरी वैल्यू चेन बनानी होगी। डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर के तौर पर खुद को बनाना होगा। हमें कॉस्ट, क्वालिटी और स्केल के ग्लोबल स्टैंडर्ड तक पहुंचना होगा।
- पीएम ने कहा, “इस सप्तधारा की दूसरी ताकत खेती और खाने का उत्पादन है। आज, ग्लोबल मार्केट खुल रहे हैं, और एफटीए के जरिए, हमें बहुत बड़े नए मार्केट तक पहुंच मिल रही है। चाहे हमारे मसाले हों या बाजरा, उन्हें ग्लोबल ब्रांड बनना होगा।”
- सप्तधारा की तीसरी ताकत टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है। यह रोबोटिक्स, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस और डेटा सेंटर्स का ज़माना है। नई टेक्नोलॉजी नई चुनौतियां पेश कर रही हैं, और हमें इनोवेशन का ग्लोबल हब बनना होगा। हम UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए अपनी ताकत पहले ही दिखा चुके हैं। अब, हमें अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में अगला कदम उठाना होगा।
- “सप्त धारा की चौथी ‘शक्ति’ है ‘गति-शक्ति’, यानी देश में बिना रुकावट तेज़ कनेक्टिविटी। हमें बिना रुकावट हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, मॉडर्न हाईवे कनेक्टिविटी, इनलैंड वॉटरवे, एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और पोर्ट चाहिए। हमें पोर्ट-लेड डेवलपमेंट की दिशा में काम करना होगा।
- पांचवीं ‘शक्ति’ है डिफेंस प्रोडक्शन, जिसमें हमें आत्मनिर्भर बनना होगा और ग्लोबल सप्लायर बनने का लक्ष्य रखना होगा।”
- सप्तधारा की छठी ताकत ग्रीन और ब्लू इकॉनमी है। भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज में ग्लोबल लीडरशिप हासिल करनी चाहिए, साथ ही ग्लोबल चुनौतियों का सॉल्यूशन भी देना जारी रखना चाहिए। ब्लू इकॉनमी भी फिशरीज, कोस्टल टूरिज्म और ओशन टेक्नोलॉजी में बहुत सारे मौके देती है, जिससे भारत की ग्रोथ के लिए नए रास्ते खुलते हैं।
- सप्तधारा की सातवीं धारा है- भारत का सॉफ्ट पावर। आज योग ने पूरी दुनिया को भारत के साथ जोड़कर रखा हुआ है। योग दुनिया के लिए ऊर्जा बनता जा रहा है, भारत के लिए विश्वास का बड़ा कारण बनता जा रहा है।
युवाओं को फ्री में मिलेगी कोचिंग
पीएम मोदी ने युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि हमने तय किया है कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल की ट्रेनिंग दी जाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि लाल किले से मैं देश के युवाओं के लिए एक घोषणा करना चाहता हूं। हमने तय किया है कि अगले एक साल में हम एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स में ट्रेनिंग देंगे, ताकि हमारे देश के युवाओं में AI की दुनिया में नेतृत्व करने की क्षमता हो। पीएम मोदी ने कहा कि अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि स्पोर्ट्स टैलेंट हंट को लेकर गांवों और शहरों में 5 से 15 साल के बच्चों के लिए देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने क्या काम किया, पीएम ने देश को बताया
लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से 650 नए विश्वविद्यालय बने हैं और मेडिकल सीटों की संख्या दोगुनी हुई है। पीएम ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच हमारे देश में 350 से कम विश्वविद्यालय थे। आज, सिर्फ़ 10-12 सालों में लगभग 650 नए विश्वविद्यालय बने हैं, जिससे कुल संख्या 1,000 के करीब पहुंच गई है। 2014 से पहले, केवल 400 के आसपास मेडिकल कॉलेज थे। आज, यह संख्या बढ़कर लगभग 850 हो गई है। इतना ही नहीं, अब विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत आ रहे हैं। ऐसे इंतज़ाम भी किए गए हैं जिनसे हमारे युवा यहीं भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल कर सकें।
हम बहुत कम उम्र से ही अपने युवाओं को टेक्नोलॉजी की ओर आकर्षित करने के लिए काम कर रहे हैं। इसीलिए हमने छोटे बच्चों के लिए 10,000 से ज़्यादा अटल टिंकरिंग लैब बनाई हैं, ताकि उनमें इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के प्रति रुचि पैदा हो। हमने भारत के युवाओं के लिए कई नए रास्ते खोले हैं। आपने ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत देखी है। 28 साल की औसत उम्र वाले युवा उद्यमियों ने सैटेलाइट और रॉकेट लॉन्च किए हैं और अपनी पहली ही कोशिश में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। आज, भारत में 2.5 लाख से ज़्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं। हाल ही में, हमने AI इम्पैक्ट समिट का भी आयोजन किया। AI बहुत तेज़ी से फैल रहा है।
आत्मनिर्भर बन रहा भारत
पीएम ने कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है और तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने इस वर्ष ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण साधन है। उनका कहना था, ”हमने 200 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है और पांच नए परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं।” मोदी ने कहा, ”ऊर्जा सुरक्षा आज की जरूरत है और इसलिए हमने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं। हमने संसद में ‘शांति’ अधिनियम पारित किया है और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है।”
‘हथियारी नक्सल से खतरनाक हैं दिमागी नक्सल’
लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “21वीं सदी में यह बहुत ज़रूरी है कि हम उन दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करें जिन्होंने देश को पीछे रखा है। नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। उन्होंने अनगिनत माताओं के युवा बेटों को छीन लिया और देश भर के परिवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। लगभग चार दशकों तक, नक्सलवाद ने भारत के बड़े हिस्सों और उसकी आबादी के एक बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में रखा, बंदूक के दम पर शासन किया और संविधान की धज्जियां उड़ाईं। आज हथियारों वाले नक्सल से बड़ी चुनौती दिमागी नक्सली ज्यादा खतरनाक हैं, इससे देश को बचाना होगा।
नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प होगा पूरा
पीएम मोदी ने कहा, आम नागरिकों की रक्षा करते हुए हमारे 3,500 से ज़्यादा पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई। नक्सलवाद ने धरती को खून से लाल कर दिया था। जब आपने हमें 2014 में सेवा करने का मौका दिया, तो हमने उसी दिन देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया। आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि नक्सली और माओवादी हिंसा में अब खुद को बनाए रखने की ताकत नहीं बची है और यह अपने अंतिम चरण में है। हम इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
