सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के एनरोलमेंट रोकने के निर्देश पर कड़ी नाराजगी जताई. हालांकि, मनन मिश्रा ने बाद में इन निर्देशों को वापस ले लिया था.भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने बीसीआई के इस मामले में दख़ल देने पर सवाल उठाया.लाइव लॉ के मुताबिक़ सीजेआई ने कहा, “बीसीआई बेवजह कार्रवाई कर रहा है. अगर छात्रों के पास विरोध करने का कोई मुद्दा है तो उन्हें विरोध करने का अधिकार है. हो सकता है छात्रों ने मुझे कोई पत्र लिखा हो. यह छात्रों और मेरे बीच का संवाद है. बीसीआई कौन होता है जो बेवजह इस मुद्दे को उठाए? यह पूरी तरह अनावश्यक है. बीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है.”सीजेआई सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद भी छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं.उन्होंने कहा कि अगर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने दिया जाना चाहिए.उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि वे ग़लत भी हैं, फिर भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है. उन्हें कौन रोक सकता है? जब तक वे क़ानून के दायरे में रहकर और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, उनकी बात सुनी जानी चाहिए. बार काउंसिल या किसी अन्य संस्था को इसमें दखल क्यों देना चाहिए?”वहीं सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा, “अब ध्यान बीसीआई के चेयरमैन पर होना चाहिए और इस बात पर कि ऐसे लोग वैधानिक संस्थाओं के प्रमुख पद तक कैसे पहुंच जाते हैं.”
मनन मिश्रा बनाम सीजेपी; बार काउंसिल ने नालसार के 2026 बैच पर फ़ैसला बदला, पहले एनरोलमेंट पर लगाई थी रोक
नालसर लॉ यूनिवर्सिटी (NALSAR) को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के फैसले और फिर उसपर यूटर्न ने नया बवाल खड़ा कर दिया है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके बीसीआई के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए. पूरे विवाद पर मनन मिश्रा ने कहा है कि जरूरत होगी तो मैं सीजेपी के नेताओं से बात करूंगा. जो बातें हैं, उसको मैं एक्सप्लेन करूंगा. कहीं कोई बात नहीं थी कि स्टूडेंट को आघात पहुंचे. निर्णय हुआ, काउंसिल में बात चली. हमलोगों ने इसे वापस ले लिया. उन्होंने कहा कहा, ”अभिजीत दीपके और सौरव दास से कहता चाहता हूं कि छात्रों के इंट्रेस्ट में कहीं कोई दिक्कत नहीं है. स्टूडेंट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए, मैं हूं. कहीं कोई कम्यूनिकेशन में दिक्कत हुई है, कोई दिक्कत हुई है तो मैं क्लियर करना चाहता हूं कि छात्र ही सर्वोपरि है. जो अभिजीत दीपके चाहते हैं, युवाओं के इंट्रेस्ट को प्रोटेक्ट करना, वही हमारा भी उद्देश्य है.” मनन मिश्रा ने कहा, ”यंग लॉयर्स के हितों की रक्षा करना बार काउंसिल का काम है. जो आदेश आया, आनन-फानन में रोका गया. जुडिशरी और स्टूडेंट्स में कोई क्लैश न हो, इंटर्नशिप में दिक्कत नहीं हो, उसमें कोई बाधा नहीं पहुंचे. यही मंशा है.”
कैसे शुरू हुआ विवाद
नालसर लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत के शामिल होने के विरोध पर बार काउंसिल आफ इंडिया ने सख्ती दिखाई थी. अपने आदेश में कहा था कि NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के बतौर वकील नामांकन न हो. यूनिवर्सिटी से 3 दिन में रिपोर्ट मांगी. साथ ही विरोध अभियान के आयोजकों की भी सूची मांगी. रिपोर्ट मिलने के बाद 19 अगस्त को आगे की कार्रवाई की बात कही. BCI ने कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसी के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया. कॉकरोच जनता पार्टी ने इसका विरोध किया और मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी. इस बीच बीसीआई ने अपना फैसला वापस ले लिया. इसके बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ”युवाओं की एक और बड़ी जीत! लेकिन जवाबदेही की लड़ाई जारी रहेगी।”
10 अगस्त को प्रकाशित बीबीसी तेलुगु की एक आर्टिकल के मुताबिक़, जुलाई के दूसरे सप्ताह में, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रोफ़ेसरों को सूचना मिली कि नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ का दीक्षांत समारोह जल्द ही आयोजित किया जाएगा. जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भाग लेने इच्छा ज़ाहिर की है.इसके बाद यूनिवर्सिटी के कुछ स्टूडेंट्स ने विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को ईमेल भेजा.इसमें कहा गया, “दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने पर हमें कुछ आपत्तियां हैं.”एक स्टूडेंट ने बताया कि ईमेल शुरू में क़ानून के स्टूडेंट्स द्वारा भेजा गया था और फिर अन्य विभागों के स्टूडेंट्स ने भी ईमेल में अपनी आपत्तियां जोड़ दीं.20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर युवाओं और स्टूडेंट्स ने दिल्ली में संसद की ओर मार्च किया था.एक वकील ने विद्यार्थियों और युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.वकील ने याचिका में कहा था, “पुलिस की बर्बरता के वीडियो सबूत मौजूद हैं. विद्यार्थी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस बहुत सख़्ती से पेश आ रही है.”इस याचिका का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी, “अपना समय बर्बाद न करें, हमारा समय भी बर्बाद न करें.”नालसार विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स ने ईमेल में युवाओं और विद्यार्थियों पर मुख्य न्यायाधीश की इन्हीं टिप्पणियों का हवाला दिया था.
