बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली से एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां सरकारी काम में लापरवाही बरतने पर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया है. 15 एडीओ (ADO) पंचायत और 150 पंचायत सचिवों की सैलरी को रोकने का आदेश दिया गया है. आखिर ऐसा क्या हुआ आइए जानते हैं.शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक में सामने आया कि सभी ब्लॉकों में आयुष्मान कार्ड बनाने का काम बहुत धीमा चल रहा है. इस पर नाराजगी जताते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कमल किशोर ने कई अहम निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जब तक काम में सुधार नहीं होता, तब तक संबंधित सचिवों और पंचायत सहायकों को सैलरी नहीं मिलेगी. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक आयुष्मान कार्ड बनाने के काम में तेजी नहीं आएगी और लक्ष्य पूरा नहीं होगा, तब तक इनकी सैलरी रुकी रहेगी.इसके अलावा, ग्राम पंचायतों के बचे हुए पैसे (पूलिंग धनराशि) को तुरंत शत-प्रतिशत पूलिंग खाते में जमा करने को कहा गया है. वहीं, मुख्यमंत्री की बैठक के निर्देशों का पालन करते हुए गांवों में साफ-सफाई, एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग कराने को कहा गया है ताकि संचारी रोगों (जैसे डेंगू, मलेरिया) को फैलने से रोका जा सके.साथ ही पौधरोपण (पेड़ लगाने) के भी निर्देश दिए गए.
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्षों का 5 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा था. आमतौर पर कार्यकाल खत्म होने पर सरकारी अफसरों को कमान सौंप दी जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. अब निवर्तमान (जिनका कार्यकाल खत्म हो चुका है) जिला पंचायत अध्यक्ष ही अगला चुनाव होने तक ‘प्रशासक’ के रूप में काम संभालेंगे. यह यूपी के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाकर दोबारा कमान सौंपी गई है. पंचायती राज के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने शुक्रवार को इसका आधिकारिक आदेश जारी कर दिया.
26 मई को जब ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हुआ था, तब उन्हें भी गांवों का प्रशासक बनाया गया था. अब 19 जुलाई को ब्लॉक प्रमुखों का भी 5 साल का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है. माना जा रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्षों की तरह ब्लॉक प्रमुखों को भी अगला चुनाव होने तक प्रशासक बना दिया जाएगा.
