अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उठ रहे सवालों के बाद अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने चंपत राय से खुद को अलग कर लिया है. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख हैं. ऐसे में अब VHP की ओर से चढ़ावा चोरी मामले की पूरी जांच की मांग की गई है.इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में VHP के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने कहा कि संगठन राम मंदिर ट्रस्ट के हालिया फैसलों की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. उन्होंने साफ किया कि राम जन्मभूमि आंदोलन में VHP की भूमिका तब ही खत्म हो गई थी, जब उस जगह पर मंदिर बनाने का मकसद पूरा हो गया.
आलोक कुमार ने कहा कि हमारी भूमिका खत्म हो चुकी है. देश के किसी भी हिस्से में मंदिर बनाना या उन्हें चलाना VHP का काम नहीं है. ट्रस्ट ही उन्हें चलाएगा और ट्रस्ट में जो कुछ भी होगा, उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की ही होगी. उन्होंने ये भी कहा कि RSS या सरकार पर इसकी जवाबदेही डालने की कोशिश करना गलत होगा.
चंपत राय के कामों से खुद को किया अलग
उन्होंने आगे कहा कि मैं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव के तौर पर चंपत राय के कामों से खुद को अलग कर रहा हूं. उनका ये बयान राजनीतिक रूप से ऐसे संवेदनशील समय में आया है, जब देश के सबसे अहम धार्मिक स्थलों में से एक की देखरेख करने वाले ट्रस्ट के कामकाज और श्रद्धालुओं के चढ़ावे के इस्तेमाल को लेकर जांच-पड़ताल तेज हो गई है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बनने से पहले लंबे समय तक VHP से जुड़े रहे चंपत राय ने वित्तीय गड़बड़ियों के बढ़ते आरोपों के कारण नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच के बाद बने दबाव के बीच ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है.
‘अयोध्या में जो हुआ, वह बहुत ही शर्मनाक और अपमानजनक’
चंपत राय के संगठन के साथ लंबे जुड़ाव को लेकर VHP पर उठ रहे सवालों के बीच आलोक कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के बाद से ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से काम करता रहा है. उन्होंने कहा, “अयोध्या में जो हुआ है, वह बहुत ही शर्मनाक और अपमानजनक है. हम सभी दुनिया भर के हिंदू खासकर वे लोग जिन्होंने चंदा दिया कार सेवक और उनके परिवार इस मामले से बहुत ज्यादा आहत हैं.”
कुमार ने तर्क दिया कि मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी ट्रस्ट की थी, न कि VHP की. राम जन्मभूमि फैसले के बाद के अपने रुख को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने साफ तौर पर कहा था कि वह न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसे चलाएगा.
