नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उनके नॉमिनेशन पेपर खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं और इसे खारिज किया जाता है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने आर्टिकल 329 के तहत संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए अपनी रिट अधिकार-क्षेत्र का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया। इसलिए, रिट याचिका को सुनवाई के लायक न मानते हुए खारिज कर दिया गया।
चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकतेः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता। अदालत ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो।
नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे। सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया।
नटराजन का नामांकन कर दिया गया था रद्द
बता दें कि राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है।
यह लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए झटकाः मीनाक्षी नटराजन
वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा, ‘यह कोई व्यक्तिगत झटका नहीं है। यह लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए झटका है… मैंने शुरू में ही कहा था कि चुनाव आयोग के सदस्य निष्पक्ष नहीं रहे। जब हमारे लोग चुनाव आयोग के पास गए, तो उन्होंने 48 घंटे तक हमें कोई जवाब नहीं दिया। कम से कम सुप्रीम कोर्ट ने हमारी याचिका सुनी और फैसला सुनाया।’
