लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर दान में गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को अब कोर्ट में उठाया गया है। मंदिर के दानपात्रों के चढ़ावे के पैसे और संपत्तियों के कथित गबन के मामले की सीबीआई जांच कराने का मांग की गई है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर कर यह मांग की गई है। साथ ही, मामले की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से भी विशेष ऑडिट कराए जाने की मांग याचिका में की गई है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा होने के कारण इस पर सुनवाई का अनुरोध किया गया।
लखनऊ के वकील मोहित अशोक की ओर से व्यक्तिगत तौर पर राम मंदिर दान गबन मामले की जांच को लेकर याचिका दायर की गई है। इसमें उन्होंने अनुरोध किया है कि अगर आवश्यक हो तो एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को मामले पर सुनवाई हो सकती है। राम मंदिर दान गबन का मामला सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया। इसके बाद से लगातार मामले में राजनीतिक बयानबाजी सामने आई है। अब मामला कोर्ट में पहुंच चुका है।
सीएजी ऑडिट कराने की मांग
मोहित अशोक की ओर से दायर याचिका में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित नकद धनराशि, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से विशेष ऑडिट कराए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। चढ़ावे के कथित गबन से संबंधित खबरें मीडिया में प्रकाशित हुई हैं। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और फाइनांसियल ऑडिट जरूरी है।
याचिका में केंद्र सरकार, यूपी सरकार, सीबीआई, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पक्षकार बनाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित होना चाहिए। इसके लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच और सीएजी ऑडिट जनहित में जरूरी है।
