कोलकाता: बीजेपी नेता शुभेन्दु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। शुक्रवार को कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के सीएम मोहन माझी को मौजूदगी में उनके नाम का ऐलान किया है। सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर से जीते हैं। उन्हाेंने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शुभेन्दु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा। जिसे विधायकाें ने आम सहमति से मुहर लगाई। सुवेंदु अधिकारी की उम्र 55 साल है। वह पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले से आते हैं। इस जिले में करकुली गांव उनका जन्म स्थान है। पश्चिम बंगाल चुनावों में बीजेपी को 293 सीटों में 207 पर जीत मिली हैं। शुभेन्दु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले सीएम होंगे।
अमित शाह ने ममता बनर्जी- राहुल गांधी को निशाने पर लिया
पश्चिम बंगाल में नए मुख्यमंत्री के तौर पर शुभेन्दु अधिकारी का नाम घोषित करने के बाद शुक्रवार को अमित शाह ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया। उन्होंने कोलकाता में विधायक दल की बैठक के बाद कहा कि उन्होंने ऐसा जनादेश नहीं देखा। बीजेपी का खाता बंगाल में 2014 में खुला था। इसके बाद 2017 में 3 सीटें मिलीं। इसके बाद 2021 में 77 सीटें मिलीं। शाह ने कहा अब 12 साल बाद बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी है। शाह ने कहा कि आज श्यामा प्रसाद मुखर्जी जहां कहीं भी होंगे। वे नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले बीजेपी के नेतृत्व को आशीर्वाद दे रहे होंगे। अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी का 9 जिलों में खाता भी नहीं खुला। टीएमसी को जीरो सीटें आईं। उनहोंने कहा कि मैंने ऐसा जनादेश नहीं देखा। शाह ने कहा वह इसके लिए बंगाल की जनता के सामने नतमस्तक हैं। अमित शाह ने कहा कि ममता जी के शासन में एडमिस्ट्रेशन का राजनीतिकरण हुआ और राजनीति का अपराधीकरण हुआ। अमित शाह ने कहा मैं जनता को यह विश्वास दिलाता हूं कि बीजेपी की राज में ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा गुंडागर्दी, कट मनी, करप्शन बंद होगी। अमित शाह ने कहा कि हम सोनार बंगला का सपना जरूर साकार करेंगे। अमित शाह ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि बंगाल समेत तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ गुजरात में अगर जीत नहीं मिली है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब अनुच्छेद 370 हटा तो देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में खुशी की लहर दौड़ी, लेकिन मुझे कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा था कि अभी भी कसर बाकी है। तब मैंने आश्चर्य से पूछा था, अब क्या बचा? तब उन्होंने कहा था, बंगाल में भाजपा का झंडा फहराना बाकी है। अमित शाह ने कहा कि मैं मानता हूं कि आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जहां भी होंगे, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को आशीर्वाद दे रहे होंगे कि आज मोदी जी के नेतृत्व ने भाजपा को गंगोत्री से गंगासागर तक पहुंचाया। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी बंगाल को घुसपैठ से मुक्त करेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी का सीएम बनने के बाद एक्शन शुरू होगा। उन्होंने कहा बंगाल में बीजेपी की जीत से राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
गृह मंत्री अमित शाह के बड़े हमले
23 प्रशासनिक जिलों में से 9 जिले ऐसे हैं, जहां दीदी का खाता भी नहीं खुला है। सूपड़ा साफ हो चुका है।
आज त्रिपुरा में हमारी सरकार है, असम में हमारी सरकार है और अब बंगाल में भी हमारी सरकार बनी है… घसपैठ और गौ तस्करी असंभव होने वाली है।
1950 से जिस विचार की यात्रा लेकर हम निकले और जिनके नेतृत्व में हम चले, आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि पर उन्हीं की पार्टी की सरकार बन रही है।
कम्युनिस्टों के समय से जिस प्रकार का माहौल बनाया जाता था, ममता जी ने भय में परिवर्तित किया। हिंसा और क्रूरता के सैकड़ों उदाहरण उसके प्रमाण हैं।
तीन दशक बाद संभालेंगे सीएम का पद
शुभेन्दु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर, 1970 को हुआ था। शुभेन्द अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। शुभेन्दु अधिकारी को राजनीति विरासत में मिली है। उन्होंने पंचयत से लेकर पार्लियामेंट तक सफर तय किया। वह 2005 में पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 2009 और फिर 2014 में तामलुक से लोकसभा के सदस्य चुने गए। नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें बंगाल की राजनीति में ‘मेदिनीपुर का बादशाह’ बना दिया। दिसंबर 2020 में वह तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हराकर सबको चौंका दिया। इसके बाद वह मई 2021 से 2026 तक वे पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। अब वह पश्चिम बंगाल में शीर्ष पद को संभालेंगे।
कांग्रेस से की थी राजनीति की शुरुआत
शुभेन्दु अधिकारी ने राजनीतिक की शुरुआत की थी। वह 1995 में कांग्रेस से कंटई नगर पालिका के पार्षद चुने गए थे। ऐसे में उन्होंने 1995 से 2026 तक करीब तीन दशक बाद मुख्यमंत्री का पद हासिल किया है। शुभेन्दु अधिकारी के परिवार में दो भाई हैं। दिब्येंदु अधिकारी तामलुक से सांसद और विधायक रह चुके हैं। दूसरे भाई सौमेंद्र अधिाकरी कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह वर्तमान में कांथी से सासंद हैं। शुभेन्दु अधिकारी अविवाहित हैं। हैं। शुभेन्दु अधिकारी की मां का नाम गायत्री अधिकारी है। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक और राजनीतिक कार्यों के लिए समर्पित कर रखा है। शुभेन्दु अधिकारी शनिवार (9 मई) को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर किसी नेता ने बीते कुछ वर्षों में तेजी से अपना कद बढ़ाया है, तो वह नाम है सुवेंदु अधिकारी। आज वे न सिर्फ राज्य में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि प्रदेश के नए मुख्यमंत्री भी बनने वाले हैं। कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज शुक्रवार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा की। सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानमंडल दल का नेता चुने जाने की घोषणा के बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी। वह कल शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण करेंगे।सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक के तौर पर भी जाना जाता है। लेकिन, एक समय था जब शुभेन्दु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों में उनकी अहम भूमिका ने ही ममता बनर्जी को राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई। समय के साथ दोनों नेताओं के रास्ते अलग हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव राज्य की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल हो गया।
शुभेन्दु अधिकारी वैसे नेता हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में न सिर्फ कड़ी चुनौती दी, लगातार दो विधानसभा चुनाव में करारी मात भी दी। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव लड़ते हुए अधिकारी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर दी और जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। इसके बाद इस बार के चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से उम्मीदवारी पक्की कर ली। भवानीपुर को ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट माना जा रहा था। लेकिन, चुनावी नतीजे में सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर से प्रचंड जीत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिया।पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी की मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने और चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं। सुशुभेन्दु अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया। कांथी पीके कॉलेज से स्नातक शुभेन्दु अधिकारी ने 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की।
वर्ष 2006 में वे कांथी दक्षिण सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2009 और 2014 में उन्होंने तमलुक लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2016 में नंदीग्राम से विधायक बनने के साथ ही वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने और परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला।2007 का नंदीग्राम आंदोलन शुभेन्दु अधिकारी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ के बैनर तले उन्होंने बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन ने न सिर्फ वाम मोर्चा सरकार को झुकने पर मजबूर किया, बल्कि टीएमसी के सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया। शुभेन्दु अधिकारी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस और बाद में टीएमसी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं, जिससे पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का व्यापक प्रभाव बना हुआ है।
