नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) नेता राघव चड्डा और संदीप पाठक ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह और आप के पांच अन्य राज्य सभा सदस्य बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते संदीप पाठक ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने जा रहे हैं। वहीं, राघव चड्ढा ने कहा कि ‘आप’ के लगभग दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और वे एक गुट के रूप में बीजेपी में शामिल होंगे। राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी की बागी नेता स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह समेत कई राज्यसभा सदस्यों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है। संवाददाता सम्मेलन में चड्डा और पाठक के साथ राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल भी मौजूद थे। राघव चड्डा, पाठक और मित्तल ने दावा किया कि आप के दस में से सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी है।आम आदमी पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हम, जो राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य हैं, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे। अपने फैसले की वजह बताते हुए चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने ‘अपने खून-पसीने से सींचा था’, वह अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। सांसद राघव चड्ढा ने आगे कहा कि जिस आप को मैंने अपनी जवानी के 15 साल दिए, जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। उन्होंने आगे कहा कि अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम करती है। आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी के पास पंजाब में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं। जिनमें 7 सांसदों ने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल,हरभजन सिंह,राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं। राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी बिफरी हुई है. AAP, राघव चड्ढा समेत तीन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत याचिका दाखिल करेगी. बीजेपी दफ्तर जाने वाले तीनों सांसदों के खिलाफ ये याचिका दाखिल करेगी. AAP का तर्क है कि जिन अन्य लोगों ने हस्ताक्षर करने का दावा किया था, वे सामने नहीं आए.
पंजाब के सीएम मान ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी हमेशा से पंजाब विरोधी रही है. उन्होंने साफ किया कि डरपोक नेता अपनी “जान बचाने” के लिए भगवा चोला ओढ़ रहे हैं, लेकिन व्यक्ति से बड़ी हमेशा पार्टी होती है. आम आदमी पार्टी के चाणक्य माने जाने वाले राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने आप को भ्रष्टाचार का दलदल बताकर बीजेपी का दामन थाम लिया. चड्ढा ने हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल के भी साथ छोड़ने का दावा कर सियासी हलचल तेज कर दी है. उन्होंने खुद को गलत पार्टी में सही आदमी बताते हुए पीएम मोदी के 12 साल के बेमिसाल नेतृत्व पर भरोसा जताया है.
दिल्ली और पंजाब की राजनीति में आज एक ऐसा सियासी भूकंप
दिल्ली और पंजाब की राजनीति में आज एक ऐसा सियासी भूकंप आया है जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) की बुनियाद हिला दी है. पार्टी के सबसे चमकते चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आप को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है. अकेले चड्ढा ही नहीं बल्कि उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया. राघव चड्ढा ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े नामों ने भी आम आदमी पार्टी छोड़ दी है. एक समय में अरविंद केजरीवाल के संकटमोचक कहे जाने वाले चड्ढा ने भावुक होकर कहा, “मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का करियर छोड़कर भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना लेकर आया था, लेकिन आज यह पार्टी खुद भ्रष्टाचार के दलदल और समझौतावादी लोगों के चंगुल में फंस चुकी है.” बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि वे एक ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ थे. उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में मोदी सरकार ने जो साहसिक फैसले लिए हैं, उन पर जनता का तीन बार भरोसा जताना इसकी सफलता का प्रमाण है. ‘आप’ के रणनीतिक स्तंभों के इस तरह टूटने से राज्यसभा में पार्टी की ताकत लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है.
परदे के पीछे की कहानी
आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी में मर्जर के दस्तावेज राज्यसभा चेयरमैन को सौंप दिए। यह सिर्फ दल-बदल नहीं, बल्कि एक ऐसी राजनीतिक पटकथा है जिसकी तैयारी लंबे समय से पर्दे के पीछे चल रही थी। इस पूरे घटनाक्रम की कमान राघव चड्ढा के हाथ में थी। बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने में अलग-अलग समय पर एक एक कर सांसदों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई थी। इन बैठकों को बेहद गोपनीय रखा गया। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इनका स्वागत करने की बात बैठकों में कही।शुक्रवार सुबह ठीक 11 बजे वह क्षण आया, जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने खुद हस्ताक्षरित दस्तावेज राज्यसभा चेयरमैन को सौंपे। यह दस्तावेज सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थे, बल्कि आम आदमी पार्टी की संसदीय राजनीति में सबसे बड़े भूकंप का संकेत थे। एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत सदस्यता बचाने के लिए दो-तिहाई संख्या जरूरी थी। AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए कम से कम 7 सांसदों का साथ होना अनिवार्य था। यही वजह थी कि इस पूरी कवायद में संख्या सबसे बड़ा हथियार भी थी और सबसे बड़ा जोखिम भी।
यदि इनमें से एक भी सांसद अंतिम समय में पीछे हटता, तो बाकी छह सांसदों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से रणनीति बनाने वालों ने सात पर नहीं, बल्कि आठ सांसदों को साथ रखने की कोशिश की।पंजाब से राज्यसभा सांसद बाबा बलवीर सिंह सीचेवाल को मनाने के लिए कई दौर की कोशिश हुई। उन्हें साथ लाने की कोशिश इसलिए भी की गई ताकि संख्या का जोखिम खत्म हो सके। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वे पार्टी से बगावत के लिए तैयार नहीं हुए। यही वजह रही कि आखिरी समय तक बेचैनी बनी रही। सूत्रों के मुताबिक, जब तक सातों सांसदों के दस्तखत पक्के नहीं हो गए, तब तक पूरी टीम बेहद सतर्क रही।इन सात सांसदों में तीन पुराने पार्टी कार्यकर्ता रहे हैं और चार उद्योगपति हैं। पुराने कार्यकर्ताओं में राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल के असंतोष की चर्चा पहले से थी। लेकिन संदीप पाठक का नाम सामने आना पार्टी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। संदीप पाठक दिल्ली चुनाव में संगठन के सबसे अहम चेहरों में थे। लेकिन चुनाव हारने के बाद उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिला। सूत्र बताते हैं कि इसी दौरान उनकी नाराजगी गहराती गई। कुछ दिन पहले उन्हें बंगला आवंटित हुआ और इसी दौर में उनकी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात भी हुई थी।
अशोक मित्तल का नाम भी इस कहानी में अहम है। लगभग 10 दिन पहले उनके घर और प्रतिष्ठानों पर ईडी की रेड हुई थी। दिलचस्प बात यह रही कि इससे कुछ दिन पहले ही उन्हें राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी का उपनेता बनाया गया था। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को संयोग से ज्यादा संकेत माना जा रहा है। अब वही अशोक मित्तल इस बड़े राजनीतिक बदलाव का हिस्सा बन गए हैं।परदे के पीछे महीनों से चल रही नाराजगी, गुप्त बैठकें, कानूनी गणित और सत्ता समीकरण इन सबने मिलकर वह पटकथा लिखी, जिसने शुक्रवार को भारतीय राजनीति में नया मोड़ दे दिया। राघव चड्ढा और AAP नेतृत्व के बीच दूरी 2024 से बढ़नी शुरू हुई, जो उनकी लगातार चुप्पी, चुनावी निष्क्रियता और पार्टी गतिविधियों से दूरी में साफ दिखी। राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद यह दरार खुलकर सामने आई और अंततः यही असंतोष बड़े राजनीतिक बदलाव की वजह बना।
राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दरार की शुरुआत 2024 से मानी जा रही है। जब अरविंद केजरीवाल शराब नीति मामले में गिरफ्तार हुए तब चड्ढा की चुप्पी ने पहली बार सवाल खड़े किए।उन्होंने लंदन में मेडिकल चेकअप का हवाला दिया, लेकिन पार्टी के भीतर इसे अलग नजर से देखा गया। इसके बाद पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से उनकी दूरी लगातार चर्चा में रही।सितंबर 2024 में लंदन से लौटने के बाद उनकी केजरीवाल से मुलाकात ने कुछ समय के लिए अटकलों को शांत किया, लेकिन यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिक सकी।2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी राघव चड्ढा की सक्रियता बेहद सीमित रही। पार्टी की हार और सत्ता से बाहर होने के बाद उनके और नेतृत्व के बीच दूरी और साफ दिखने लगी।फिर जब केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जेल से बाहर आए, तब भी चड्ढा की चुप्पी ने संकेत दे दिया कि अंदर कुछ बड़ा चल रहा है।इस महीने की शुरुआत में पार्टी ने राघव को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दे दी।इसके साथ ही सदन में पार्टी की ओर से बोलने के अवसर भी कम कर दिए गए।इसके बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि साइलेंसड बट नॉट डिफिटिड। इसके बाद उन्होंने पार्टी पर कई आरोप लगाए थे।यह घटनाक्रम सिर्फ सात सांसदों का दल-बदल नहीं, बल्कि AAP की राष्ट्रीय राजनीति के लिए सबसे बड़ा झटका है। जिस पार्टी ने खुद को वैकल्पिक राजनीति का चेहरा बताया था, उसके भीतर की असहमति अब खुलकर सामने आ गई है।
