लखनऊ: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए सरकार ने एक्सप्रेस-वे आधारित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) की बड़ी योजना पर काम तेज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेस-वे के किनारे कुल 18 औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में बनने वाले ये क्लस्टर आने वाले समय में यूपी के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल को मिलेगा विकास का नया इंजन
सरकार की इस योजना का फोकस विशेष रूप से बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे पिछड़े क्षेत्रों पर है। यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार किए जाएंगे। इससे न सिर्फ स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।भारत की सड़क बुनियादी ढांचे में एक राज्य ऐसा है जो बाकी सभी राज्यों से काफी आगे निकल चुका है। इसे एक्सप्रेसवे का राजा या एक्सप्रेसवे प्रदेश कहा जा रहा है। यह राज्य और कोई नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश है। यहां 15 से ज्यादा एक्सप्रेसवे संचालित या निर्माणाधीन हैं, जो देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं। रिकॉर्ड देखकर हैरानी होती है यूपी अकेले देश के 42 प्रतिशत एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर कब्जा किए हुए है, और गंगा एक्सप्रेस-वे के पूरा होने के बाद यह आंकड़ा 62 प्रतिशत तक पहुंचने वाला है।
यूं ही नहीं कहा जाता एक्सप्रेस-वे का राजा
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7 से ज्यादा एक्सप्रेसवे पूरी तरह संचालित हैं, जबकि कई और तेजी से बन रहे हैं। देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी) भी यहीं है, जो मेरठ से प्रयागराज तक जाएगा। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (341 किमी), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी), यमुना एक्सप्रेसवे (165 किमी), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 किमी), गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (91 किमी) और अन्य कई महत्वपूर्ण मार्गों के साथ मिलकर यूपी को सड़क कनेक्टिविटी का हब बना रहा है। कुल मिलाकर यूपी में एक्सप्रेसवे की लंबाई 1500 किमी से ज्यादा हो चुकी है और आने वाले वर्षों में यह 4000 किमी के पार पहुंचने वाली है।
एक्सप्रेस-वे के फायदे
इन एक्सप्रेसवे ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, जो पहले विकास से पिछड़ा माना जाता था, अब गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं से सीधे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी से जुड़ रहा है। औद्योगिक निवेश बढ़ रहा है, लॉजिस्टिक लागत घटी है, कृषि उत्पाद बाजार तक तेजी से पहुंच रहे हैं और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। नतीजा यह कि यूपी अब भारत का सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन चुका है—ऐसा कोई दूसरा राज्य नहीं है जहां इतनी बड़ी संख्या में हाई-स्पीड कॉरिडोर हों।
सोशल मीडिया पर भी यूपी का जलवा
सोशल मीडिया पर यूजर्स इस रिकॉर्ड को शेयर करते हुए ‘एक्सप्रेसवे के राजा’ की तारीफ करते रहते हैं। कई लोग तुलना करते हुए कहते हैं कि दूसरे राज्यों में कुल एक्सप्रेसवे यूपी के आधे भी नहीं हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र या गुजरात जैसे राज्य भी तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी की गति और संख्या दोनों ही बेमिसाल हैं। यह उपलब्धि केवल सड़कों की नहीं, बल्कि विकास मॉडल की भी है। बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार बढ़ रहा है, युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर मिल रहे हैं और राज्य की जीडीपी में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का योगदान बढ़ा है।
