नई दिल्ली. भारतीय राजनीति के गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है. बीजू जनता दल (BJD) के वरिष्ठ सांसद सस्मित पात्रा ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) पर बनी संसदीय स्थायी समिति से अपने इस्तीफे देकर सबको चौंका दिया है. उन्होंने भाजपा सांसद और समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे के विवादास्पद बयान के विरोध में उठाया है. दरअसल, दुबे ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीजू पटनायक पर अमेरिकी CIA के एजेंट होने के गंभीर आरोप लगाए थे.
दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई, जब निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर थ्रेड पोस्ट जारी की. उन्होंने दावा किया कि 1960 के दशक में नेहरू-गांधी परिवार अमेरिकी दलाल के रूप में काम कर रहा था. दुबे ने 27 मार्च, 1963 की तारीख का हवाला देते हुए लिखा कि उस दिन ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिका पहुंचे थे. दुबे का आरोप है कि बीजू पटनायक तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के बीच एक महत्वपूर्ण लिंक के रूप में काम कर रहे थे. उन्होंने यहां तक कह दिया कि 1962 का भारत-चीन युद्ध अमेरिका के इशारे और उनके पैसों से लड़ा गया था.
राष्ट्रीय नायक का अपमान बर्दाश्त नहीं- सस्मित पात्रा
निशिकांत दुबे के इन आरोपों पर ओडिशा की विपक्षी पार्टी (BJD) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह एक ऐसे व्यक्ति की अध्यक्षता वाली समिति में काम नहीं कर सकते जो एक महान स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेता के खिलाफ अपमानजनक, झूठी और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां करता हो.
इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप
पात्रा ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘बीजू पटनायक जी एक राष्ट्रीय नायक हैं. उनके योगदान पर सवाल उठाना न केवल इतिहास के साथ छेड़छाड़ है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करना भी है. मेरा विवेक मुझे अनुमति नहीं देता कि मैं निशिकांत दुबे जैसे व्यक्ति के नेतृत्व में कार्य जारी रखूं.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजू पटनायक की विरासत राजनीतिक क्षुद्रताओं से कहीं अधिक ऊंची है.निशिकांत दुबे ने अपने दावों में दलाई लामा के भाई और 1955 से 1962 के बीच हुए चुनावों में अमेरिकी वित्तीय सहायता का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, बीजू पटनायक ने ही भारत के रणनीतिक मामलों में अमेरिकी दखल को सुगम बनाया था. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के पुराने ऐतिहासिक संदर्भों को वर्तमान राजनीति में घसीटना 2026 के आगामी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
इंडोनेशिया की आजादी में योगदान
बीजू पटनायक न केवल ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री थे, बल्कि एक कुशल पायलट और स्वतंत्रता संग्राम के जांबाज सिपाही भी थे. इंडोनेशिया की आजादी में उनकी भूमिका के लिए उन्हें वहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी मिल चुका है. ऐसे में उन्हें ‘CIA लिंक’ बताना ओडिशा के गौरव पर सीधे हमले के रूप में देखा जा रहा है.
